Tuesday , 28 April 2026

पंजाब की सियासत में ‘खेला’ होने के आसार! क्या गिर जाएगी भगवंत मान सरकार?  

चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त भूचाल आया हुआ है। आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर सुलग रही असंतोष की चिंगारी अब शोला बनती नजर आ रही है। सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि भगवंत मान सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हाल ही में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों के भाजपा के संपर्क में होने की खबरों ने सूबे के राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

विपक्ष का बड़ा हमला: क्या टूटने वाली है ‘आप’?

पंजाब में मचे इस घमासान के बीच कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उदित राज ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि पंजाब की मौजूदा सरकार का भविष्य खतरे में है। वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने ‘आप’ नेतृत्व को आगाह करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर दरारें बहुत गहरी हो चुकी हैं। जयहिंद सेना के प्रमुख नवीन जयहिंद ने तो यहां तक दावा कर दिया है कि ‘आप’ के लगभग 27 विधायक पाला बदलने की तैयारी में हैं, जिससे मान सरकार की स्थिरता पर सीधा असर पड़ सकता है।

विक्रमजीत सिंह साहनी के खुलासे से मची खलबली

हाल ही में ‘आप’ का दामन छोड़कर भाजपा का हाथ थामने वाले राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी के बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है। साहनी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने यह कदम ‘पंजाब के हित’ में उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे कद्दावर नेताओं को हाशिए पर धकेला जा रहा था, जिससे कैडर में भारी नाराजगी है। साहनी का दावा है कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर इन परिस्थितियों से अवगत कराया था, लेकिन नेतृत्व ने जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर दिया।

आंतरिक कलह और विकास कार्यों पर ब्रेक

पूर्व ‘आप’ नेता साहनी के मुताबिक, पार्टी अब केवल चुनावी राजनीति तक सीमित होकर रह गई है और दीर्घकालिक विकास की योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच तालमेल की कमी के कारण पंजाब के विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। साहनी ने यह भी आरोप लगाया कि जब पंजाब के हक की बात आती है, तो पार्टी नेतृत्व गंभीरता दिखाने के बजाय चुप्पी साध लेता है, जिससे सांसदों और विधायकों में घुटन का माहौल बना हुआ है।

क्या कहते हैं सत्ता के आंकड़े?

हालांकि, इन तमाम दावों और कयासों के बीच अभी तक आम आदमी पार्टी की ओर से किसी बड़े विद्रोह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब में सरकार को अस्थिर करना इतना आसान नहीं है, क्योंकि आंकड़ों के लिहाज से ‘आप’ के पास अभी भी मजबूत बहुमत है। लेकिन जिस तरह से एक के बाद एक सांसदों के टूटने की खबरें आ रही हैं, उसने भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल की चिंता जरूर बढ़ा दी है। क्या यह महज विपक्षी प्रोपेगेंडा है या वाकई पंजाब में कोई बड़ा उलटफेर होने वाला है? इसका फैसला आने वाला वक्त ही करेगा।

Check Also

गुजरात निकाय चुनाव परिणाम: 15 नगर निगमों में खिला ‘कमल’, कांग्रेस का सूपड़ा साफ, सूरत में AAP को तगड़ा झटका

गांधीनगर। गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर प्रदेश की सियासत में …