Saturday , 6 June 2026

लखनऊ में दर्दनाक हादसा: रेजिडेंसी में सीवर साफ करने उतरे पिता-बेटे की जहरीली गैस से मौत, बिना सेफ्टी किट 20 फीट गहरे नरक में उतारा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वीआईपी इलाके रेजिडेंसी क्षेत्र से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ सीवर लाइन की सफाई करने उतरे एक बदनसीब पिता और उसके जवान बेटे की जहरीली गैस की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। दोनों करीब दो घंटे तक लगभग 20 फीट गहरे और अंधेरे सीवर के अंदर फंसे रहे। जब तक उन्हें बाहर निकालकर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। इस हादसे के बाद ठेकेदार की क्रूर लापरवाही को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है।

बिना ऑक्सीजन और सेफ्टी बेल्ट के मौत के कुएं में उतारा

जानकारी के मुताबिक, दोनों मृतक एक निजी ठेकेदार के अधीन काम कर रहे थे। आरोप है कि ठेकेदार ने चंद रुपयों के लालच में दोनों की जिंदगी दांव पर लगा दी और उन्हें बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीधे मौत के कुएं में उतार दिया। चश्मदीदों और पुलिस के अनुसार, सीवर में उतरते समय मजदूरों के पास न तो ऑक्सीजन सिलेंडर था, न जहरीली गैस का पता लगाने वाला गैस डिटेक्टर और न ही कोई सेफ्टी बेल्ट। इसी का नतीजा रहा कि नीचे कदम रखते ही दोनों जहरीली गैस का शिकार हो गए और उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला।

ठेकेदार होगा ब्लैकलिस्ट, दर्ज होगी FIR: नगर आयुक्त

इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले संबंधित ठेकेदार को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और उसके खिलाफ थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी। इसके साथ ही पीड़ित परिवार की मदद के लिए नगर आयुक्त ने नियमानुसार उचित मुआवजा देने का भी एलान किया है।

एक महीने के भीतर लखनऊ में दूसरा बड़ा हादसा

लखनऊ में सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले बीते 8 मई 2026 को भी लखनऊ के माल क्षेत्र में एक ऐसा ही खौफनाक मंजर देखने को मिला था। वहाँ एक सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे दो मजदूरों, रिंकू और राजेश की भी जहरीली गैस से दम घुटने के कारण तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी। बार-बार हो रहे इन हादसों से साफ है कि प्रशासन की सख्ती के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कोई सुधार नहीं हो रहा है।

इन हादसों के पीछे का ‘खतरनाक पैटर्न’ समझिए

अगर हाल के दिनों में हुए इन सभी हादसों का विश्लेषण करें, तो सबमें एक जैसा ही जानलेवा पैटर्न नजर आता है। सबसे पहले ठेकेदारों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा किट के सीवर या टैंक में उतार दिया जाता है। लंबे समय से बंद पड़े सीवर और सेप्टिक टैंकों के भीतर मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी अत्यंत जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं। इन गैसों का असर इतना घातक होता है कि अंदर जाते ही चंद सेकेंड में इंसान का दम घुटने लगता है। अक्सर हादसे के दौरान जब पहला व्यक्ति अंदर बेहोश होता है, तो उसे बचाने के चक्कर में दूसरा व्यक्ति भी बिना सोचे-समझे नीचे कूद जाता है और वह भी काल के गाल में समा जाता है।

क्या कहता है देश का कानून?

भारत सरकार ने हाथ से मैला उठाने और सीवर की खतरनाक सफाई को रोकने के लिए बेहद कड़ा कानून बनाया है। ‘प्रोहिबिशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट ऐज मैनुअल स्कैवेंजर्स एंड देयर रिहैबिलिटेशन एक्ट, 2013’ के तहत बिना आधुनिक सुरक्षा उपकरणों और मैकेनाइज्ड सिस्टम के किसी भी व्यक्ति को सीवर या सेप्टिक टैंक के भीतर उतारना एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। इस कानून का उल्लंघन करने पर संबंधित ठेकेदार, निजी मालिक या जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की सजा का प्रावधान है।

जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा नगर निगम!

हर बड़े हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल नगर निगम और प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही पर खड़ा होता है। अमूमन देखा गया है कि हादसा होते ही नगर निगम और संबंधित सरकारी एजेंसियां सारा ठीकरा निजी ठेकेदारों के सिर फोड़कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती हैं। जबकि नियम यह कहते हैं कि शहर में हो रहे किसी भी सीवर कार्य के दौरान श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना और मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करवाना सीधे तौर पर संबंधित सरकारी विभागों की भी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है।

एक्शन में प्रशासन: खुला मैनहोल दिखे तो तुरंत मिलाएँ यह नंबर

इस ताजा हादसे से सबक लेते हुए नगर निगम ने अब सख्ती दिखाने की बात कही है। हालिया घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए निगम ने शहर के सभी खुले नालों और मैनहोल को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह ढकने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही control room के माध्यम से 24 घंटे इन संवेदनशील जगहों की निगरानी की जा रही है। नगर निगम ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें शहर में कहीं भी कोई मैनहोल खुला या क्षतिग्रस्त दिखाई दे, तो वे तत्काल इसकी सूचना टोल फ्री नंबर 1533 पर दें, ताकि समय रहते हादसों को रोका जा सके।

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