Thursday , 3 September 2026

कानपुर में लगातार बारिश का कहर: भरभराकर गिरा कच्चा मकान, मलबे में दबकर दंपती गंभीर रूप से घायल; सरकारी योजनाओं पर उठे सवाल

बिल्हौर/कानपुर ।  उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात और नगर क्षेत्र में जारी भारी बारिश का सिलसिला अब जानलेवा हादसों में तब्दील हो रहा है। लगातार दूसरे दिन मूसलाधार बारिश के चलते बिल्हौर के अरौल थाना अंतर्गत भीटी हवेली गांव में एक कच्चा मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस भीषण हादसे में घर के भीतर मौजूद दंपती मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों की तत्परता से दोनों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकालकर नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत पर डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं।

मिट्टी धंसने से सुबह के वक्त हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक, भीटी हवेली गांव निवासी रामशरण (पुत्र स्वर्गीय जबरूलाल) का परिवार कच्चे मकान में रहता है। कई दिनों से जारी बारिश के चलते मकान की मिट्टी की दीवारें पूरी तरह सीलन खा चुकी थीं और नींव कमजोर हो गई थी। बुधवार सुबह बारिश के तेज दबाव को दीवारें बर्दाश्त नहीं कर सकीं और पूरा मकान अचानक भरभराकर गिर पड़ा। उस वक्त कमरे में मौजूद रामशरण के पुत्र दिलीप (35 वर्ष) और पुत्रवधू शीटू कटियार (30 वर्ष) मलबे के भारी ढेर के नीचे दब गए।

चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीण, मलबे से खींचकर बचाई जान

मकान गिरने की तेज आवाज और चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। गांव में अफरातफरी मच गई और ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए राहत व बचाव कार्य शुरू किया। फावड़े और हाथों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद मलबे को हटाया गया और दोनों को अचेत अवस्था में बाहर निकाला गया। इसके बाद एंबुलेंस की मदद से घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल भेजा गया। अरौल थानाध्यक्ष विनय तिवारी ने बताया कि घायलों को समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन की ओर से मौके पर जरूरी कानूनी और राहत संबंधी कार्रवाई की जा रही है।

आवास योजनाओं की जमीनी हकीकत पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

इस हादसे के बाद इलाके के ग्रामीणों में स्थानीय प्रशासन और आवास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के दावों के बावजूद वास्तविक जरूरतमंद आज भी खस्ताहाल कच्चे मकानों में जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि यदि इन योजनाओं का आवंटन पूरी पारदर्शिता के साथ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचता, तो आज इस गरीब दंपती को इस दर्दनाक हादसे का सामना न करना पड़ता।

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