भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विवाद-मुक्त बनाने की दिशा में आयोग ने कई बड़े और ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव किए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने दोनों चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें कार्यप्रणाली में सुधार से लेकर मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े 13 बड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग की बैठकों में लिए गए निर्णयों पर किसी भी तरह की अस्पष्टता या विवाद से बचने के लिए अब बैठकों से पहले ही उनका पूरा एजेंडा जारी किया जाएगा और बैठक समाप्त होने के बाद कार्यवाही विवरण (मिनट्स) भी सार्वजनिक मंच पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा, अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर सख्त नियंत्रण लगाते हुए आयोग की पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई है।
विवादों से बचने के लिए पारदर्शी व्यवस्था, विदेश यात्रा से पहले लेनी होगी मंजूरी
चुनाव आयोग ने अपनी आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। अब चुनाव आयोग की किसी भी आधिकारिक बैठक का एजेंडा पहले ही सर्कुलेट कर दिया जाएगा और सभी बैठकों की कार्यवाही का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा।
प्रशासनिक अनुशासन को लेकर आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब निर्वाचन आयोग से जुड़े किसी भी स्तर के अधिकारी को विदेश यात्रा पर जाने से पहले आयोग से औपचारिक मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। बिना पूर्व अनुमति कोई भी अधिकारी विदेश दौरा नहीं कर सकेगा। साथ ही, चुनाव आयुक्तों द्वारा समय-समय पर अधिकारियों को दिए जाने वाले सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने यह भी समय-सीमा तय की है कि सभी अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) हर हाल में प्रतिवर्ष 31 दिसंबर तक पूरी हो जानी चाहिए।
कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र पर आयोग का रुख साफ
हाल ही में कैबिनेट सचिव को भेजे गए एक पत्र को लेकर चल रही चर्चाओं पर आयोग ने स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग के अनुसार, वह पत्र निर्वाचन आयोग या उसके आईटी विभाग से जुड़ी किसी नीतिगत व्यवस्था को लेकर नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति (डेप्युटेशन) पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। आयोग ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य-वितरण आदेश को दो चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किया गया था। साथ ही, आयोग के आईटी प्रभाग की देखरेख में उप निर्वाचन आयुक्त (DEC) की भूमिका को कभी भी वापस नहीं लिया गया था।
दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR के तहत दावे-आपत्ति की तारीखें बढ़ीं
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बाहर हुए मतदाताओं को राहत देते हुए आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) के अनुरोध पर तारीखों में बदलाव की घोषणा की है। दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 और उनके निस्तारण की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2026 कर दी गई है। वहीं, महाराष्ट्र के लिए दावे व आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर 2026 और निपटारे की अंतिम तिथि 10 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।
निर्वाचन आयोग की बैठक में लिए गए 13 बड़े और महत्वपूर्ण फैसले
आयोग की इस अहम बैठक में मतदाताओं की सुविधा, निष्पक्षता और पारदर्शी तकनीकी प्रबंधन के लिए कुल 13 प्रमुख निर्णय लिए गए हैं:
-
घर-घर जाएंगे बीएलओ: जिन मतदाताओं को SIR प्रक्रिया के दौरान ‘अनमैप्ड’ स्टेटस या तकनीकी विसंगतियों के चलते नोटिस मिला है, उन्हें ईआरओ (ERO) या एईआरओ (AERO) कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद ऐसे लोगों के घर जाकर दस्तावेज एकत्रित करेंगे और उन्हें ECINet पोर्टल पर अपलोड करेंगे।
-
ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा: भौतिक उपस्थिति केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ईआरओ के निर्णय पर होगी और वह भी ऑनलाइन माध्यम से संपन्न होगी। मतदाता की अनुपस्थिति में परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य सुनवाई में भाग ले सकेगा।
-
कमजोर वर्गों के लिए विशेष कैंप: जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को रैन बसेरों, शेल्टर होम, दिहाड़ी मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के मतदाता पंजीकरण के लिए विशेष हेल्प डेस्क और कैंप आयोजित करने का निर्देश दिया गया है।
-
घोषणा पत्र पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर: सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-6 के साथ डिक्लेरेशन फॉर्म की अनिवार्यता को वैध ठहराया है। गैर-एसआईआर अवधि में निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत पुराने फॉर्म लागू रहेंगे।
-
ECINet पोर्टल की उच्चस्तरीय समीक्षा: फील्ड अफसरों को ECINet पोर्टल पर रोल-बेस्ड एक्सेस दिया जाता है। अब वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में IIT और IIIT के स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की एक समिति पोर्टल के नियमों और विधिक अनुपालन की समीक्षा करेगी।
-
आईटी प्रोजेक्ट्स के लिए सीओओ की मंजूरी जरूरी: सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ा कोई भी नया प्रोजेक्ट अब सीधे लागू नहीं होगा। इस पर पहले अधिकारियों की समिति (COO) में व्यापक विचार-विमर्श होगा, जिसके बाद ही आयोग से अंतिम मंजूरी मिलेगी।
-
बैठकों का एजेंडा सार्वजनिक: आयोग की प्रत्येक बैठक का एजेंडा पहले ही जारी किया जाएगा और बैठक समाप्त होने के बाद उसकी औपचारिक कार्यवाही (मिनट्स) को सार्वजनिक किया जाएगा।
-
सालाना अप्रेजल की समय-सीमा: सभी अधिकारियों की वार्षिक परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (APAR) प्रतिवर्ष 31 दिसंबर की तय समय-सीमा तक अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी।
-
विदेश यात्रा पर आयोग की पूर्व मंजूरी: चुनाव आयोग के किसी भी अधिकारी की विदेश यात्रा के लिए आयोग की पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई है।
-
दिल्ली में संशोधित कार्यक्रम: दावों और आपत्तियों के लिए 30 अक्टूबर 2026 तथा उनके निपटारे के लिए 30 नवंबर 2026 तक की समय-सीमा तय की गई।
-
महाराष्ट्र में संशोधित कार्यक्रम: दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की आखिरी तारीख 12 अक्टूबर 2026 और निपटारे की तारीख 10 नवंबर 2026 निर्धारित की गई।
-
छूटे वोटरों के लिए स्पेशल ड्राइव: बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में SIR का कार्य पूरा हो चुका है। छूटे हुए मतदाताओं और पहली बार वोट देने वाले युवाओं को जोड़ने के लिए CEOs, DEOs और EROs को तुरंत विशेष अभियान (Special Drive) शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
-
गोवा में शत-प्रतिशत कवरेज की ओर कदम: तीसरे चरण के 12 राज्यों में अंतिम मतदाता संख्या इलेक्टोरल रोल के अंतिम प्रकाशन पर तय होगी। गोवा में बीएलओ घर-घर संपर्क कर रहे हैं, जहां चिह्नित 97 छूटे मतदाताओं में से 81 के फॉर्म-6 भरवाए जा चुके हैं।
voice of india
