उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने तबाही मचा रखी है। लगातार हो रही भारी बरसात के कारण शहर के अलग-अलग इलाकों में कई भारी-भरकम पेड़ धराशायी हो गए, जिससे कई जगह लोग मौत के मुंह में जाने से बाल-बाल बचे। निशातगंज में जहां एक शताब्दी पुराना पूजनीय बरगद का पेड़ ढह गया, वहीं इंदिरा नगर, फैजुल्लागंज और आशियाना जैसे प्रमुख इलाकों में पेड़ गिरने से यातायात व्यवस्था चरमरा गई और घंटों बिजली आपूर्ति ठप रही। लगातार बारिश के बीच पेड़ों के गिरने से करंट फैलने का खतरा बना रहा, लेकिन स्थानीय नागरिकों की तत्परता से समय रहते बिजली कटवाई गई, जिससे बड़े हादसे टल गए।
निशातगंज में टला बड़ा हादसा, शिकायत के 10 दिन बाद भी नहीं जागा निगम
निशातगंज की गली नंबर-4 में भारी बारिश के दौरान करीब 100 साल पुराना विशाल बरगद का पेड़ अचानक एक मकान की बाउंड्री पर आ गिरा। गनीमत रही कि हादसे के वक्त मकान के बाहर कोई मौजूद नहीं था, वरना जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था। स्थानीय निवासी इस दैवीय पेड़ की नियमित पूजा-अर्चना करते थे। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग को सूचना देकर सप्लाई बंद कराई और नगर निगम को खबर दी, जिसके बाद छंटाई का काम शुरू हुआ। क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि 10 दिन पहले ही स्थानीय पार्षद को इस जर्जर पेड़ के बारे में लिखित व मौखिक सूचना दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हादसे के बाद भी जनप्रतिनिधि मौके पर हाल जानने तक नहीं पहुंचे।
इंदिरा नगर से फैजुल्लागंज तक पेड़ टूटे, बत्ती गुल
शहर के अन्य हिस्सों में भी पेड़ों के टूटने से भारी अव्यवस्था देखने को मिली। इंदिरा नगर सेक्टर-19 में सड़क पर विशाल पेड़ गिरने से लंबा जाम लग गया और यातायात कई घंटों तक रेंगता रहा। उधर, फैजुल्लागंज के जुड़वां मंदिर के पास बिजली की मुख्य लाइन पर पेड़ गिर पड़ा, जिससे पूरे इलाके की बिजली गुल हो गई और लोगों को भीषण दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
नाले और सड़कों का अंतर खत्म, गड्ढों में गिरकर चोटिल हुए दर्जनों राहगीर
शहर में मूसलाधार बारिश के बाद सड़कें जलमग्न हो गईं और ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल नजर आया। आशियाना के नाबार्ड चौराहे समेत सेक्टर आर, एल, जी और एच में गंभीर जलभराव हुआ, जहां किला मोहम्मदी नाले और सड़क का फर्क ही मिट गया। इंदिरा नगर सेक्टर-17 के मुख्य बाजार, महानगर और भूतनाथ जैसे व्यस्त व्यापारिक केंद्रों में पानी भरने से जनजीवन पटरी से उतर गया। जानकीपुरम विस्तार के सभी सात सेक्टरों में सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया। न्यू एमटी कॉलेज और गोमतीनगर के कई इलाके तालाब जैसे नजर आए। जलभराव के चलते सड़कों के गहरे गड्ढे छिप गए, जिससे दिनभर में दर्जनों दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल होते रहे।
विशेष हेल्पलाइन: आपात स्थिति में तुरंत यहां मिलाएं फोन
जलभराव, पेड़ गिरने या बिजली से जुड़े हादसों के दौरान त्वरित सहायता के लिए संबंधित विभागों ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। मोहल्ले में पेड़ गिरने या गंभीर जलभराव होने पर नगर निगम के आपातकालीन नंबर 1533 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। बिजली का तार टूटने, पोल पर पेड़ गिरने या शॉर्ट सर्किट होने की स्थिति में तत्काल 1912 पर कॉल करके विद्युत आपूर्ति बंद करवाएं। इसके अतिरिक्त नजदीकी पुलिस थाने, स्थानीय पावर हाउस और क्षेत्रीय पार्षद को भी तुरंत घटना से अवगत कराएं।
कंक्रीटीकरण और अफसरों की अनदेखी से घनी आबादी में मौत के जाल बने पेड़
राजधानी के मुख्य मार्गों और रिहायशी कॉलोनियों में खड़े जर्जर व विशाल पेड़ अब सीधे तौर पर लोगों की जान के लिए खतरा बनने लगे हैं। इससे यह साफ उजागर होता है कि वन विभाग, नगर निगम और लेसा के बीच किसी तरह का तालमेल नहीं है और न ही पेड़ों की नियमित तकनीकी जांच हो रही है। विकास नगर में कई जगह पेड़ हाइटेंशन लाइनों को छू रहे हैं, जिनकी समय पर प्रूनिंग (छंटाई) नहीं कराई गई। वहीं सेक्टर-25 इंदिरा नगर की सर्विस रोड और सिकंदर बाग के आसपास दर्जनों भारी-भरकम पेड़ खड़े हैं, जो बारिश में अत्यधिक वजन बढ़ने से कभी भी गिर सकते हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, अनियोजित कंक्रीटीकरण, सड़कों के चौड़ीकरण और सीवर-नाली निर्माण के दौरान पेड़ों की जड़ों के पास की मिट्टी और पोषण पूरी तरह खत्म हो जाता है। जब जड़ें कमजोर हो जाती हैं, तो भारी बारिश और तेज हवा का दबाव सहन नहीं कर पातीं। नगर निगम और प्रशासन हर साल मानसून से पहले छंटाई के दावे तो करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम तब शुरू होता है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है।
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