Sunday , 27 September 2026

UNGA में गरजे एस. जयशंकर: पाकिस्तान को दिखाया आईना, बोले- आतंकवाद को सामान्य बताने की दलीलें नहीं टिकेंगी, भारत करता रहेगा अपना बचाव

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें उच्च-स्तरीय सत्र के मंच से भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक पटल पर आतंकवाद के खिलाफ देश की स्पष्ट और आक्रामक नीति को पूरी मजबूती के साथ सामने रखा। न्यूयॉर्क में आम बहस के दौरान विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने आतंकवाद पर भारत की ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति को दोहराया और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उसे दुनिया के सामने पूरी तरह बेनकाब कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि दशकों से ‘आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने वाले देश’ की ओर से इस वैश्विक मंच पर गलत तथ्य पेश किए गए हैं, लेकिन इस घिनौने कृत्य को जायज ठहराने और इसके गंभीर परिणामों से बचने की कोई भी चाल अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर टिकने वाली नहीं है।

आत्मरक्षा के अधिकार पर समझौता नहीं, आतंकवाद और दोस्ती साथ-साथ संभव नहीं

विदेश मंत्री ने साफ लफ्जों में कहा कि अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल लगातार करता रहेगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन की ओर सीधा इशारा करते हुए जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को सामान्य गतिविधि बताने और अपनी करतूतों के नतीजों से मुंह मोड़ने के लिए बनाई गई मनगढ़ंत दलीलें बेअसर हैं। उन्होंने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि आतंक की सरपरस्ती करने वालों के साथ दोस्ती, सद्भावना और सामान्य संबंध कभी एक साथ आगे नहीं बढ़ सकते। आतंक और रिश्तेदारी एक पटरी पर नहीं दौड़ सकते।

‘आतंकवाद फैलाने वालों को बदलना होगा रवैया, रुके टेरर फंडिंग’

डॉ. जयशंकर ने वैश्विक नेताओं से आह्वान करते हुए कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा और लगातार बना रहने वाला खतरा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की फैक्ट्री चलाने वाली सरकारों और सत्ताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। भारत ने दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर ‘जीरो-टॉलरेंस’ की नीति में रत्ती भर भी ढील नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने विशेष तौर पर जोर देकर कहा कि आतंक के नेटवर्क को जिंदा रखने वाली आर्थिक धमनियों यानी टेरर फंडिंग (वित्तीय सहायता) के सभी रास्तों को दुनिया के सामने लाकर उनका पूरी ताकत से मुकाबला करना अनिवार्य है। ऐसी दूषित मानसिकता पर आधारित किसी भी समझौते पर सवाल उठना बिल्कुल स्वाभाविक है, इसलिए आतंक फैलाने वाले तंत्र को ही अपना ढर्रा बदलना होगा।

शहबाज शरीफ के दावों की खुली पोल

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इससे पूर्व संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने करीब 23 मिनट के भाषण में भारत के खिलाफ पुराना राग अलापा था। शरीफ ने मंच से वर्ष 2025 के संघर्ष में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दखल का जिक्र करते हुए उनकी सराहना की थी और कश्मीर के मुद्दे को फिर से उछालने की कोशिश की थी। शहबाज शरीफ ने दक्षिण एशिया में टकराव टालने के लिए कश्मीर के तथाकथित समाधान की वकालत की थी, जिसके जवाब में विदेश मंत्री जयशंकर ने पाकिस्तान द्वारा मंच पर फैलाए गए झूठ और तथ्यों की तोड़-मरोड़ को विश्व बिरादरी के सामने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के लिए ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ की जरूरत

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष और गहराते मानवीय संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति केवल ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ के जरिए ही संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस जटिल स्थिति को सुधारने और इलाके में स्थिरता लौटाने के हर सार्थक प्रयास में सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत संकटग्रस्त फिलिस्तीनी नागरिकों तक लगातार मानवीय सहायता और जरूरी राहत सामग्री पहुंचा रहा है। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि शांति का अर्थ केवल हथियारों का खामोश होना नहीं है, बल्कि दुनिया को एक सुरक्षित, स्थिर और तनावमुक्त वातावरण की दरकार है। यदि हम लगातार खतरों और दबावों के बीच जी रहे हैं, तो हम गहरी खाई के मुहाने पर खड़े हैं, जहां से एक कदम का भटकाव भारी विनाश ला सकता है।

यूक्रेन युद्ध पर पीएम मोदी का संदेश: ‘यह युग अंतहीन युद्ध का नहीं’

यूक्रेन में चल रहे संघर्ष पर बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह संकट अब अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है, जो बेहद गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक संदेश को याद दिलाते हुए कहा कि अब अंतहीन युद्धों का दौर खत्म होना चाहिए और सभी पक्षों को युद्धविराम की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। भारत स्थायी शांति की हर पहल का समर्थन करता है। इसके साथ ही जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैश्विक खाद्य आपूर्ति, अनाज, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्ग से आने-जाने वाले नाविकों व जहाजों की निर्बाध सुरक्षा सुनिश्चित करने की तात्कालिक आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

 

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