
बमाको: पश्चिम अफ्रीकी देश माली से एक दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। राजधानी बमाको के बाहरी इलाके में स्थित काटी मिलिट्री बेस पर अल-कायदा से जुड़े आतंकी समूह JNIM ने भीषण हमला किया है। इस आत्मघाती हमले में माली के रक्षा मंत्री सादियो कामारा के आवास को निशाना बनाया गया, जिसमें उनकी मौत हो गई है। रक्षा मंत्री की मौत ने सैन्य सरकार की जड़ों को हिला कर रख दिया है और पूरे देश में हड़कंप मच गया है।
राजधानी के पास गूंजी गोलियां, दहला सैन्य बेस
यह हमला शनिवार को उस वक्त हुआ जब पूरा देश पहले से ही एक दिन पहले हुए बड़े हमलों के सदमे में था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य छावनी वाले शहर काटी में शनिवार तड़के गोलियों की गड़गड़ाहट और धमाकों की आवाजें सुनी गईं। बताया जा रहा है कि अल-कायदा और तुआरेग विद्रोहियों ने हाल के वर्षों के सबसे बड़े समन्वित हमले को अंजाम दिया है। आतंकियों ने सीधे रक्षा मंत्री के घर को निशाना बनाकर सुरक्षा व्यवस्था के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
The Secretary‑General is deeply concerned by reports of attacks in several locations across Mali. He strongly condemns these acts of violence, expresses solidarity with the Malian people & stresses the need to protect civilians & civilian infrastructure.https://t.co/VldVXfmzmo https://t.co/9y2KDVT0Z6
— UN Spokesperson (@UN_Spokesperson) April 26, 2026
संयुक्त राष्ट्र ने जताई गहरी चिंता, अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील
माली में बिगड़ते हालात और रक्षा मंत्री की हत्या के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। UN महासचिव के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि महासचिव माली के कई हिस्सों में हो रहे इन हिंसक हमलों से बेहद चिंतित हैं और इसकी कड़ी निंदा करते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने साहेल क्षेत्र में बढ़ते आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होकर प्रतिक्रिया देने का आह्वान किया है।
रविवार को भी जारी रहा तांडव, ‘किदाल’ पर कब्जे का दावा
आतंकियों और विद्रोहियों का दुस्साहस यहीं नहीं रुका। रविवार को भी राजधानी बमाको के आसपास के इलाकों और सोना उत्पादक क्षेत्रों में सुनियोजित हमले जारी रहे। अल-कायदा से जुड़े गुट और तुआरेग विद्रोहियों ने इन ऑपरेशनों की जिम्मेदारी ली है। सबसे चौंकाने वाला दावा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर ‘किदाल’ को लेकर किया गया है। विद्रोहियों का कहना है कि उन्होंने सरकारी सेना को खदेड़कर किदाल पर दोबारा कब्जा कर लिया है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से मरने वालों की संख्या और किदाल की स्थिति पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सैन्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती
माली की वर्तमान सैन्य सरकार के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है। रक्षा मंत्री का मारा जाना न केवल सुरक्षा तंत्र की विफलता है, बल्कि विद्रोहियों के बढ़ते मनोबल का भी प्रतीक है। साहेल क्षेत्र में शांति की उम्मीदें अब और भी धूमिल होती नजर आ रही हैं। आने वाले दिनों में सेना की जवाबी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय दबाव माली के भविष्य को तय करेंगे।
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