नई दिल्ली (voiceofindia.online): आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली से लेकर पंजाब तक की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। राज्यसभा सचिवालय ने एक अहम अधिसूचना जारी करते हुए ‘आप’ के सातों बागी सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही उच्च सदन (राज्यसभा) में भाजपा की ताकत और बढ़ गई है, जबकि अरविंद केजरीवाल की पार्टी महज 3 सांसदों के साथ सिमट कर रह गई है।
राज्यसभा का बदला समीकरण: 113 पर पहुंची भाजपा
सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के बाद अब राज्यसभा में भाजपा सदस्यों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है। वहीं, आम आदमी पार्टी के पास अब केवल 3 सांसद बचे हैं। सदन की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो कांग्रेस 29 सांसदों के साथ दूसरे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) 13 सांसदों के साथ तीसरे नंबर पर है। अन्य दलों में डीएमके के 8, जेडीयू, एनसीपी और सपा के 4-4, जबकि राजद के 3 और जेएमएम के 2 सांसद सदन में मौजूद हैं।
MPs Raghav Chadha, Ashok Kumar Mittal, Harbhajan Singh, Sandeep Kumar Pathak, Dr. Vikramjit Singh Sahney, Swati Maliwal and Rajinder Gupta, who quit AAP to join BJP on 24th April, are now listed among the 113 Rajya Sabha MPs of BJP pic.twitter.com/Etof1vbb5g
— ANI (@ANI) April 27, 2026
पंजाब चुनाव से पहले राघव चड्ढा और संदीप पाठक का साथ छूटना बड़ी चोट
आम आदमी पार्टी के लिए यह झटका इसलिए भी दर्दनाक है क्योंकि पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी छोड़ने वालों में राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं, जिन्होंने 2022 के पंजाब चुनाव में ‘आप’ की प्रचंड जीत की पटकथा लिखी थी। इनके अलावा स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता ने भी भगवा चोला ओढ़ लिया है। इन रणनीतिकारों और चेहरों का साथ छोड़ना आगामी चुनाव में पार्टी की संभावनाओं पर असर डाल सकता है।
क्यों फेल हुई AAP की ‘दल-बदल कानून’ वाली चाल?
आम आदमी पार्टी ने इन सांसदों की सदस्यता खत्म कराने के लिए राज्यसभा सभापति के पास अर्जी लगाई थी। पार्टी का तर्क था कि जब शुरुआती तीन सांसदों ने पार्टी छोड़ी, तब बाकी चार साथ नहीं थे, इसलिए यह सीधे तौर पर दल-बदल का मामला है। हालांकि, सचिवालय ने इस दलील को खारिज कर दिया। संविधान की दसवीं अनुसूची के मुताबिक, यदि किसी विधायी दल के दो-तिहाई (2/3) सदस्य एक साथ किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो उन पर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता।
कानून का गणित: ऐसे बची सातों सांसदों की कुर्सी
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई सांसद अकेला पार्टी छोड़ता है, तो उसे अपनी सदस्यता गंवानी पड़ती है। लेकिन ‘आप’ के मामले में कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 एक साथ अलग हुए हैं। यह संख्या दो-तिहाई के आंकड़े (करीब 6.66) से अधिक है। इसी ‘सेफ एग्जिट’ फॉर्मूले की वजह से राघव चड्ढा समेत सातों सांसदों की राज्यसभा सदस्यता बरकरार रहेगी और वे अब भाजपा सांसद के रूप में सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।
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