
–हाईकोर्ट ने घटाई गुजारा भत्ता राशि
प्रयागराज । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि पति की कृषि आय का निर्धारण हाईकोर्ट नहीं कर सकता। पत्नी को गुजारा भत्ता देने के मुद्दे पर पति के वेतन पर ही विचार किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि याची पति ग्राम रोजगार सेवक है। दस हजार वेतन स्वीकृत है। ईपीएफ की कटौती के बाद उसे 7788 रूपये प्रतिमाह मिलते हैं। इसलिए परिवार अदालत द्वारा धारा 125 व धारा 12 की कार्यवाही में दो हजार व चार हजार कुल छह हजार रुपये प्रतिमाह का गुजारा भत्ता देने का आदेश उचित नहीं है। कोर्ट ने याची पति को निर्देश दिया है कि पत्नी को प्रतिमाह 2500 रूपये गुजारा भत्ता का भुगतान करे।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार ने आजमगढ़ के रवि प्रकाश चौहान व तीन अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याची का कहना था कि धारा 125 में अदालत ने 3000 गुजारा देने का आदेश दिया। जिसे हाईकोर्ट ने दो हजार किया। इसके बाद परिवार अदालत ने धारा 12 की अर्जी पर 60 हजार एकमुश्त गुजारा देने का आदेश दिया। इसके खिलाफ अपील पर अदालत ने 4000 रूपये प्रतिमाह कर दिया। इस प्रकार 6000 रूपये प्रतिमाह देने का आदेश हुआ तो याची ने हाईकोर्ट की शरण ली।
कहा कि यदि भत्ते का भुगतान किया तो उसके लिए कुछ नहीं बचेगा। वेतन का 90 फीसदी पत्नी को देना होगा। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पति की आय के 25 फीसदी से अधिक पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं दिया जा सकता। पति की आय को देखते हुए गुजारा भत्ता आदेश दिया जाना चाहिए। जिस पर हाईकोर्ट ने याची पति को अपनी पत्नी रंजना चौहान को 2500 रूपये प्रतिमाह गुजारा भत्ते का भुगतान करने का आदेश दिया है।
voice of india