
सेंट पीटर्सबर्ग (voiceofindia.online): मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में महीनों से जारी तनाव के बीच अब राहत की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से ठप पड़ी ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बातचीत दोबारा शुरू होने की उम्मीद जग गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिए हैं कि यदि परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो दोनों महाशक्तियां एक बार फिर मेज पर आमने-सामने बैठ सकती हैं। विश्व शांति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए इसे एक सकारात्मक मोड़ माना जा रहा है।
रूस पहुंचे अराघची: राष्ट्रपति पुतिन के साथ होगी हाई-प्रोफाइल बैठक
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची पाकिस्तान और ओमान का अहम दौरा संपन्न कर अब रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंच चुके हैं। यहां उनकी मुलाकात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से होनी है। इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि रूस और ईरान के संबंध सामरिक रूप से काफी गहरे हैं। अराघची और पुतिन के बीच मध्य पूर्व में संभावित ‘सीजफायर’ (युद्धविराम) और युद्ध की स्थितियों को टालने के लिए आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
ओमान में हॉर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर मंथन: तेल बाज़ार को मिलेगी राहत
अराघची ने बताया कि ओमान की राजधानी मस्कट में हुई बैठकों का मुख्य केंद्र ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Hormuz Strait) रहा। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। ईरान और ओमान दोनों ही इस जलमार्ग के तट पर स्थित हैं, इसलिए इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। अराघची ने कहा कि दोनों देश इस मुद्दे पर एक राय रखते हैं कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए निरंतर संवाद जरूरी है। विशेषज्ञ स्तर पर बातचीत जारी रखने पर भी सहमति बनी है।
पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को भेजा ‘स्पेशल मैसेज’
कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक अपना संदेश पहुंचा दिया है। इस संदेश में ईरान ने अपनी कुछ मुख्य शर्तें और ‘रेड लाइन’ (अंतिम सीमा) स्पष्ट कर दी हैं। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि अभी तक अमेरिका के साथ कोई सीधी मुलाकात नहीं हुई है, लेकिन पाकिस्तान और ओमान जैसे देशों की मध्यस्थता बातचीत का रास्ता साफ कर सकती है।
वैश्विक मंच पर रूस-चीन का मिला साथ, ईरान की बढ़ी ताकत
संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर रूस और चीन का समर्थन ईरान के लिए बड़ी राहत बनकर आया है। हाल ही में अमेरिका द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर लाए गए एक प्रस्ताव का रूस और चीन ने कड़ा विरोध किया था। इससे ईरान को अपनी कूटनीतिक पकड़ मजबूत करने में मदद मिली है। अब सबकी नजरें सेंट पीटर्सबर्ग की बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि रूस की मध्यस्थता ईरान और अमेरिका के बीच जमी बर्फ को पिघलाने में निर्णायक साबित हो सकती है।
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