
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। सात वर्षों में शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा है। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने हाल के महीनों में भारत-चीन संबंधों में हुई निरंतर प्रगति का स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि द्विपक्षीय संबंधों को तात्कालिक घटनाओं के चश्मे से देखने के बजाय रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
पीएम मोदी ने दिए संबंधों को साधने के 3 मूल मंत्र वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन रिश्तों की बहाली और मजबूती के लिए तीन बुनियादी स्तंभों को अनिवार्य बताया। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों का संबंध आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि दो बड़े पड़ोसियों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इन मतभेदों को किसी भी सूरत में विवाद का रूप नहीं लेने देना चाहिए।
तियानजिन बैठक के बाद रिश्तों में सकारात्मक बदलाव विदेश मंत्रालय के अनुसार, पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर हुई अपनी मुलाकात को याद किया। नेताओं ने संतोष व्यक्त किया कि तियानजिन संवाद के बाद से सीमा और कूटनीतिक स्तर पर द्विपक्षीय रिश्तों में निरंतर सुधार दर्ज किया गया है। नई दिल्ली में हुई यह उच्चस्तरीय बैठक उसी विश्वास-बहाली प्रक्रिया की अगली कड़ी है।
व्यापार और निवेश को पटरी पर लाने की कवायद साल 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक सैन्य झड़पों के बाद से दोनों देशों के आर्थिक और कूटनीतिक रिश्ते गहरे तनाव में आ गए थे। इस बैठक में सीमावर्ती इलाकों में शांति बहाली के साथ-साथ व्यापार और निवेश संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने पर गहन मंथन हुआ। दोनों पक्षों ने माना कि संतुलित आर्थिक साझेदारी दोनों देशों की जनता के हित में है, हालांकि अरुणाचल प्रदेश और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़ी भारत की सुरक्षा चिंताओं का समाधान प्राथमिक शर्त बना हुआ है।
उच्चस्तरीय संवाद से तैयार हुई शीर्ष मुलाकात की जमीन शी जिनपिंग की इस ऐतिहासिक भारत यात्रा से पहले दोनों देशों के सुरक्षा और कूटनीतिक तंत्र लगातार सक्रिय रहे। हाल ही में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में विशेष प्रतिनिधि (SR) स्तर की गहन वार्ता हुई थी। इसी सिलसिलेवार कूटनीतिक प्रयास के चलते दोनों राष्ट्रप्रमुखों के बीच यह सकारात्मक बैठक संभव हो सकी।
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