Sunday , 13 September 2026

क्या 22 वर्षीय भतीजी संभालेंगी बसपा की कमान? मायावती के एक ऐलान ने बदला यूपी का सियासी समीकरण, जानें कौन हैं दीपिका आनंद?

लखनऊ उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के एक अप्रत्याशित बयान ने सूबे के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। शनिवार, 12 सितंबर को मायावती ने साफ संकेत दिए कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर और कार्यक्षमता परखने के बाद वह पार्टी की बागडोर अपनी भतीजी दीपिका आनंद को सौंप सकती हैं। इस ऐलान के साथ ही उन्होंने अपने दोनों भतीजों—आकाश आनंद और ईशान आनंद—को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की दौड़ से पूरी तरह बाहर कर दिया है। इसके बाद से ही सियासी गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या दीपिका आनंद 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से सक्रिय राजनीति में पदार्पण करने जा रही हैं।

कौन हैं दीपिका आनंद? लंदन में कानून की पढ़ाई कर रहीं मायावती की भतीजी दीपिका आनंद बसपा सुप्रीमो मायावती के सबसे छोटे भाई आनंद कुमार की इकलौती बेटी हैं। 22 वर्षीय दीपिका फिलहाल ब्रिटेन की राजधानी लंदन में रहकर कानून (Law) की उच्च शिक्षा हासिल कर रही हैं। अब तक वह राजनीतिक मंचों और मीडिया की चकाचौंध से पूरी तरह दूर रही हैं, लेकिन मायावती के हालिया बयान के बाद अचानक उनका नाम देश के सबसे बड़े राजनीतिक राज्यों में से एक के केंद्र में आ गया है।

क्या यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से होगी राजनीति में धमाकेदार एंट्री? वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मात्र एक सीट पर सिमटने के बाद बसपा 2027 के आगामी चुनावों के लिए संगठन को नए सिरे से खड़ा करने में जुटी है। पार्टी का लक्ष्य सभी सीटों पर समय रहते प्रत्याशियों के नाम तय करना है। मायावती ने हाल ही में पार्टी संगठन में युवाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने और ‘जेन-जी’ (Gen-Z) पीढ़ी को चुनावी मैदान में प्राथमिकता देने की बात कही है। 22 साल की युवा पृष्ठभूमि के साथ दीपिका इस रूपरेखा में सटीक बैठती हैं। हालांकि, मायावती ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी बड़ा पद या जिम्मेदारी देने से पहले वह दीपिका की कार्यकुशलता, समझ और समर्पण का जमीनी स्तर पर आकलन करेंगी।

परिवार से सिर्फ दीपिका का विकल्प, इनकार पर मिशनरी कार्यकर्ता को मौका बसपा प्रमुख ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि आकाश आनंद और ईशान आनंद को पार्टी में कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। ऐसे में यदि परिवार के भीतर से किसी को आगे बढ़ाना हुआ, तो एकमात्र संभावित चेहरा दीपिका आनंद ही होंगी। इसके साथ ही मायावती ने यह विकल्प भी खुला रखा है कि यदि दीपिका यह जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो पार्टी की आम सहमति से दलित समाज के किसी निष्ठावान और समर्पित ‘मिशनरी कार्यकर्ता’ को बसपा की कमान सौंपी जा सकती है।

‘परिवारवाद से मुक्त रहेगी बसपा’: आनंद कुमार के योगदान और भविष्य की सीमा रेखा मायावती ने पार्टी को परिवारवाद के आरोपों से दूर रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि उनके अविवाहित होने के कारण सुरक्षा और अन्य व्यक्तिगत जरूरतों के मद्देनजर सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को साथ रखना पड़ा था। आनंद कुमार उनकी देखभाल के साथ-साथ पार्टी के महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन लंबे समय से करते आ रहे हैं। हालांकि, मायावती ने दो टूक कहा कि आनंद कुमार की सेवा और निष्ठा का अनुचित लाभ उनके परिवार के बाकी सदस्यों को मिलना पार्टी और बहुजन आंदोलन के व्यापक हितों के अनुकूल नहीं होगा।

 

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