Sunday , 13 September 2026

राम वनगमन पथ पर निर्माण के तुरंत बाद आईं दरारें, भड़के सीएम योगी; अफसरों व कंपनी पर गिरी गाज, अब 10 से अधिक इंजीनियरों पर गोपनीय जांच की तलवार

 प्रयागराज प्रभु श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या को तपोभूमि चित्रकूट से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना ‘राम वनगमन पथ’ पर निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ ही दिनों के भीतर उभरी गहरी दरारों ने प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस सड़क की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घोर लापरवाही को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद गंभीरता से लेते हुए कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। मुख्यमंत्री के कड़े तेवरों के बाद शासन ने निर्माण फर्म और जिम्मेदार शीर्ष अफसरों के खिलाफ शनिवार को बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। इसके साथ ही पूरी सड़क के क्षतिग्रस्त होने के तकनीकी व प्रशासनिक कारणों की उच्चस्तरीय गोपनीय जांच बैठाने की तैयारी कर ली गई है, जिसकी जद में 10 से अधिक विभागीय अभियंताओं के आने की प्रबल संभावना है।

407 करोड़ से बने 14 किमी लंबे मार्ग पर 350 मीटर तक दरकी सड़क, आरई वाल भी टूटी राम वनगमन पथ परियोजना के दूसरे पैकेज के तहत प्रतापगढ़ के अवतारपुर से प्रयागराज के ऐतिहासिक श्रृंगवेरपुर तक 14 किलोमीटर से अधिक लंबे मार्ग का निर्माण लगभग 407 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से कराया गया था। हालांकि, निर्माण कार्य समाप्त होते ही लखनऊ राजमार्ग के क्रॉस पॉइंट से लेकर श्रृंगवेरपुर धाम स्थित गंगा पुल तक करीब 350 मीटर के दायरे में सड़क बीच से फटने लगी और उसमें बड़ी दरारें दिखाई देने लगीं। इसके अलावा करीब दो किलोमीटर के क्षेत्र में कई जगहों पर गड्ढे और दरारें सामने आई हैं तथा आरई (RE) वाल भी कई स्थानों पर दरक गई है। इससे निर्माण में घटिया सामग्री और तकनीकी मानकों की अनदेखी की कलई खुल गई।

निर्माण कंपनी डिबार, अधीक्षण व अधिशासी अभियंता पर गिरी गाज मार्ग की बदहाली उजागर होने के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) राष्ट्रीय मार्ग के मुख्य अभियंता एके जैन ने 8 सितंबर को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को पत्र लिखकर निर्माण एजेंसी नई दिल्ली स्थित एसएंडपी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स और स्वतंत्र निगरानी एजेंसी एलएन मालवीय इन्फ्रा प्रोजेक्ट को डिबार (काली सूची में डालने) की सिफारिश भेजी थी। इसके साथ ही पीडब्ल्यूडी राष्ट्रीय मार्ग खंड प्रयागराज के अधीक्षण अभियंता ओंकार भारतीय और अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह के निलंबन की संस्तुति की गई थी। शासन स्तर से इन सभी पर कार्रवाई की मुहर लगा दी गई है।

गोपनीय जांच में परखी जाएगी अफसरों की मिलीभगत, आनन-फानन में मरम्मत शुरू सीएम योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के बाद अब इस पूरे प्रकरण की परतों को खोलने के लिए एक गोपनीय तकनीकी जांच टीम गठित की जा रही है। जांच टीम यह पड़ताल करेगी कि निर्माण के दौरान सामग्री परीक्षण और विभागीय निरीक्षण में किन-किन अधिकारियों ने आंखें मूंदे रखीं और ठेकेदार फर्म को किस आधार पर हरी झंडी दी गई। सूत्रों का कहना है कि जांच का दायरा बढ़ने से परियोजना से जुड़े एक दर्जन से ज्यादा सहायक व अवर अभियंता भी कार्रवाई के लपेटे में आ सकते हैं। उधर, भारी फजीहत के बीच कार्यदायी संस्था ने दरार वाले हिस्सों पर लीपापोती और मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि तीन से चार दिनों के भीतर क्षतिग्रस्त मार्ग को दुरुस्त कर दिया जाएगा।

 

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