Sunday , 13 September 2026

BRICS 2026: ‘ईरान कभी घुटने नहीं टेकेगा’, दिल्ली में गरजे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान; अमेरिका और इजराइल पर लगाए गंभीर आरोप

 नई दिल्ली राजधानी नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे और अंतिम दिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर पश्चिम एशिया का तनाव केंद्र में आ गया। समिट में भाग लेने भारत पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजराइल को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि तेहरान किसी भी सैन्य या आर्थिक दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने दोनों देशों पर सीधा आरोप लगाया कि वे ईरानी सेना का सामना करने के बजाय आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे, भोजन, पानी, दवाओं और रोजगार के साधनों को निशाना बनाकर युद्ध अपराध कर रहे हैं।

‘अगर अमेरिकी योद्धा हैं तो सेना से लड़ें’, नागरिकों पर हमले पर भड़के पेजेश्कियान राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि यदि अमेरिकी वास्तव में खुद को योद्धा मानते हैं, तो उन्हें ईरान की बहादुर सेना का सामना करना चाहिए। आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और नागरिक ठिकानों पर युद्ध थोपने का क्या औचित्य है? उन्होंने कहा कि यदि उनमें तनिक भी इंसानियत बाकी है, तो वे निर्दोष लोगों के भोजन, स्वच्छ पानी और जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति क्यों बाधित कर रहे हैं? पेजेश्कियान ने दृढ़ता से कहा कि धमकियों और पाबंदियों के दम पर ईरानी जनता के आत्मसम्मान को दबाया नहीं जा सकता और देश किसी भी कीमत पर घुटने नहीं टेकेगा।

परमाणु हथियार बनाने के आरोपों को सिरे से किया खारिज भारत में मीडिया से बातचीत करते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने वाशिंगटन और तेल अवीव द्वारा तेहरान पर लगाए जा रहे परमाणु हथियार विकसित करने के सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को केवल सैन्य आक्रामकता का झूठा बहाना बना रहे हैं। पेजेश्कियान ने सवाल दागा कि क्या वाशिंगटन या तेल अवीव के पास उनके दावों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस सबूत मौजूद है? उन्होंने इन मनगढ़ंत दावों को सुनियोजित प्रोपेगैंडा करार दिया।

‘NPT के दायरे में है ईरान का कार्यक्रम, रोजाना होती है सख्त निगरानी’ पेजेश्कियान ने जोर देकर कहा कि ईरान की समस्त परमाणु गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय नियमों के पूर्ण अनुपालन के साथ संचालित हो रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि ईरान ‘परमाणु अप्रसार संधि’ (NPT) का एक प्रतिबद्ध सदस्य देश है। ईरान की परमाणु सुविधाओं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद सख्त और नियमित निगरानी की गई है। अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों ने बार-बार आकर जांच की है और ईरान ने हमेशा तय वैश्विक सिद्धांतों के दायरे में ही काम किया है। उन्होंने दोहराया कि तेहरान NPT के तय नियमों के आधार पर परमाणु मुद्दों पर सार्थक बातचीत के लिए सदैव तैयार है।

डोनाल्ड ट्रंप के साथ सीधी बातचीत से इनकार, भरोसे की भारी कमी ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि तेहरान परमाणु वार्ताओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका के साथ किसी भी सीधी द्विपक्षीय बातचीत की संभावना पूरी तरह खारिज है। दोनों देशों के बीच उपजे भारी अविश्वास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के शुरुआती दिन ही पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सीधे टेबल पर बैठना असंभव है। उन्होंने सवाल किया कि किस अधिकार से उनके सर्वोच्च नेता को निशाना बनाया गया, जिसे ईरानी समाज कभी स्वीकार नहीं कर सकता। बिना शर्त सीधी बातचीत के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा फैसला तुरंत नहीं लिया जा सकता।

समझौते से मुकरने का आरोप और इजराइल के परमाणु कार्यक्रम पर दोहरा मापदंड पेजेश्कियान ने आरोप लगाया कि पूर्व में तेहरान और अमेरिका के बीच सहमति बनने और सहमति पत्र (MoU) पर दस्तखत होने के बावजूद वाशिंगटन अपनी ही प्रतिबद्धताओं से पीछे हट गया। उन्होंने साफ कहा कि ईरान का रुख अडिग है—अमेरिका सभी अन्यायपूर्ण प्रतिबंध तत्काल हटाए और ईरान पर हमले बंद करे। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक मंचों के दोहरे रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए सवाल उठाया कि इजराइल के परमाणु शस्त्रागार की कभी कोई अंतरराष्ट्रीय जांच क्यों नहीं होती, जबकि इजराइल NPT का सदस्य तक नहीं है। उन्होंने कहा कि इजराइली नीतियों का विरोध करने और फिलिस्तीनी अधिकारों के समर्थन को ही अमेरिका और इजराइल ईरान पर सैन्य हमलों का औजार बना रहे हैं।

 

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