Saturday , 2 May 2026

शेयर बाजार में लौटी रौनक, सोना-चांदी भी चमके….अब कहां निवेश करना होगा फायदेमंद?

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Share Market vs Gold Silver Investment Strategy: करीब डेढ़ साल तक सुस्त रहने के बाद शेयर बाजार में अचानक जान आ गई है. भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा के बाद सेंसेक्स और निफ्टी ने ऐसी छलांग लगाई, जो पिछले आठ महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी तेजी मानी जा रही है. दूसरी तरफ, सोना-चांदी भी चार दिन की गिरावट के बाद फिर से चढ़ने लगे हैं. ऐसे में आम निवेशक के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है- अब पैसा शेयर में लगाएं या सोना-चांदी में? जो पहले से है, उसे बेचा जाए या संभाल कर रखा जाए?

मंगलवार को बाजार में जो तेजी दिखी, उसके पीछे सबसे बड़ा कारण भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील का पूरा होना है. सेंसेक्स 2,072 अंक उछलकर 83,739 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 639 अंकों की तेजी के साथ 25,727 पर पहुंच गया. असल में जुलाई 2024 से ही निफ्टी 25,000 के आसपास अटका हुआ था. रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका की तरफ से टैरिफ, रूसी तेल को लेकर दबाव, इन सब वजहों से बाजार ऊपर उठ ही नहीं पा रहा था. अब डील के बाद निवेशकों का भरोसा लौटता दिख रहा है.
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सोना-चांदी में क्यों आई तेजी?

पिछले एक साल में सोने ने निवेशकों को दोगुना और चांदी ने करीब तीन गुना रिटर्न दिया. जब शेयर बाजार साइडवेज था, तब बड़ी संख्या में निवेशकों ने पैसा निकालकर गोल्ड-सिल्वर में लगाया. हालांकि अब तस्वीर बदल रही है. सोना-चांदी अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 25% नीचे है. यानी अभी भी इसमें उतार-चढ़ाव बना हुआ है, लेकिन सुरक्षित निवेश का टैग बरकरार है.

सरकार ने सोना-चांदी पर क्या फैसला लिया?

इसी बीच सरकार ने गोल्ड और सिल्वर के बेस इंपोर्ट प्राइस घटा दिए हैं. CBIC की अधिसूचना के मुताबिक, गोल्ड का इंपोर्ट बेस प्राइस 50 डॉलर घटकर 1,518 डॉलर प्रति 10 ग्राम और सिल्वर का बेस प्राइस 800 डॉलर से ज्यादा घटकर 2,657 डॉलर प्रति किलो कर दिया गया है. इससे आयात सस्ता होगा और बुलियन व ज्वेलरी इंडस्ट्री को राहत मिलेगी. हालांकि बाजार में मांग बनी रहने से कीमतों में ज्यादा बड़ी गिरावट की उम्मीद फिलहाल नहीं है.

अब निवेशक क्या करें?

एक्सपर्ट्स की राय साफ है कि हड़बड़ी नुकसान करा सकती है. सोना-चांदी में अगर 5–10 साल का नजरिया है, तो SIP के जरिए निवेश करें. एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से बचें. वहीं, शेयर बाजार में भी धीरे-धीरे और हर गिरावट पर निवेश बेहतर रहेगा. फंडामेंटली मजबूत कंपनियों पर फोकस रखें और स्मॉलकैप में ज्यादा जोखिम न लें. डायवर्सिफिकेशन जरूरी है यानी पोर्टफोलियो का 10–20% ही सोना-चांदी में रखें, ताकि उतार-चढ़ाव का असर कम हो.

निचोड़ यही है कि शेयर बाजार में मौके बन रहे हैं, लेकिन जोखिम अभी खत्म नहीं हुआ है. सोना-चांदी सुरक्षा देता है, पर बहुत ज्यादा लालच नुकसान करा सकता है. संतुलन ही असली कमाई का रास्ता है.

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