
कानपुर। फर्जी जमानत के दस्तावेज तैयार कर अदालतों को गुमराह करने वाले गिरोह के खिलाफ कानपुर पुलिस कमिश्नरेट को बड़ी सफलता मिली है। पूर्वी जोन पुलिस ने वर्ष 2020 से फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी और शातिर अपराधी शिवम शर्मा को लखनऊ से धर दबोचा। आरोपी पर हत्या, लूट, चोरी और कूटरचना जैसे लगभग तीन दर्जन संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
2020 से पुलिस को दे रहा था चकमा
अपर पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) शिवा सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार आरोपी शिवम शर्मा फर्जी जमानत के कूट रचित दस्तावेज तैयार कर अदालत को धोखा देने वाले एक बड़े सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य था। वह साल 2020 में दर्ज एक मुकदमे में वांछित चल रहा था और लगातार अपनी पहचान छिपाकर पुलिस की पहुंच से दूर भाग रहा था। पुलिस ने उस पर 25,000 रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
गैंगस्टर एक्ट में जेल जाने के बाद बनाया फर्जी जमानत का खेल
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी शिवम शर्मा मूल रूप से लखनऊ के बाजारखाला थाना क्षेत्र स्थित ऐशबाग (मिल रोड) का रहने वाला है। वह वर्ष 2010 में जीआरपी कानपुर द्वारा दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मामले में जेल जा चुका था। जेल में रहने के दौरान ही उसने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी व कूटरचित जमानत प्रपत्र तैयार करवाए और उन्हें असली बताकर अदालत में पेश कर जमानत हासिल कर ली थी। इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर वर्ष 2020 में गैंगस्टर कोर्ट के लिपिक की तहरीर पर कोतवाली थाने में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
तीन दर्जनों मुकदमों का आरोपी और जीआरपी का हिस्ट्रीशीटर
शिवम शर्मा कोई आम अपराधी नहीं है, बल्कि उस पर कानपुर, आगरा, लखनऊ, जीआरपी कानपुर, जीआरपी झांसी और जीआरपी वाराणसी सहित कई जिलों व थानों में लूट, चोरी, धोखाधड़ी और साजिश रचने जैसी संगीन धाराओं में 36 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। आपराधिक इतिहास को देखते हुए जीआरपी कानपुर द्वारा उसे पहले ही हिस्ट्रीशीटर घोषित किया जा चुका था।
80 आरोपी जा चुके हैं जेल, 22 अन्य पुलिस की रडार पर
एडीसीपी शिवा सिंह ने बताया कि शिवम शर्मा से पूछताछ के दौरान फर्जी जमानत नेटवर्क और गिरोह से जुड़े कई अन्य प्रमुख चेहरों के नाम सामने आए हैं। उन्होंने खुलासा किया कि इस फर्जी जमानत प्रकरण में पुलिस अब तक करीब 80 आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है, जबकि गिरोह से जुड़े 22 अन्य संदिग्ध लगातार पुलिस की रडार पर हैं। पुलिस की टीमें अब आरोपी से मिली जानकारियों के आधार पर बाकी फरार सदस्यों की धरपकड़ के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
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