Thursday , 16 July 2026

राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: पुलिस रिमांड में टूटे आरोपी, 13 घंटे की मैराथन पूछताछ में उगले राज, एक कमरा सील

अयोध्या। विश्व प्रसिद्ध राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में अयोध्या पुलिस की जांच अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। पुलिस ने बुधवार को इस महाघोटाले के दो मुख्य आरोपियों, रामाशंकर मिश्रा और सेवानिवृत्त बैंक कर्मी सुभाष श्रीवास्तव को कड़ी सुरक्षा के बीच रिमांड पर लिया। फैजाबाद पुलिस लाइन में सुबह 8 बजे से शुरू हुई यह मैराथन पूछताछ रात 9 बजे तक यानी पूरे 13 घंटे तक चली। पुलिस की तफ्तीश इतनी सख्त थी कि दोनों आरोपियों के लिए अलग-अलग सवालों की लंबी फेहरिस्त तैयार की गई थी। इस पूछताछ के बाद पुलिस ने एक आरोपी के ठिकाने पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और सीसीटीवी का डीवीआर (DVR) जब्त किया है, जबकि उसका कमरा पूरी तरह सील कर दिया गया है।

पूछताछ में रो पड़ा रामाशंकर मिश्रा, कबूला— ‘नहीं सोचा था कभी पकड़े जाएंगे’

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, 13 घंटे तक चली पुलिस की तीखी पूछताछ के आगे आरोपी रामाशंकर मिश्रा ज्यादा देर टिक नहीं सका। वह जांच अधिकारियों के सामने बुरी तरह टूट गया और रोते हुए इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया। रामाशंकर ने कबूल किया कि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ा यह काला कारनामा कभी दुनिया के सामने उजागर हो जाएगा।

जांच में सामने आया है कि रामाशंकर मिश्रा इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्रा के साथ मिलकर काम कर रहा था। पुलिस पहले ही रामाशंकर के पास से ₹7 लाख 32 हजार की नकदी, भारी मात्रा में चांदी के सिक्के और कीमती आभूषण बरामद कर चुकी है। पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि चोरी किए गए इस पवित्र धन को उसने प्रॉपर्टी (जमीन) में इन्वेस्ट किया था।

किराए के मकान पर छापेमारी, पुलिस ने जब्त किया CCTV का DVR

रामाशंकर मिश्रा से मिले इनपुट के आधार पर अयोध्या पुलिस की एक विशेष टीम उसे लेकर उसके किराए के मकान पर पहुंची। पुलिस ने वहां सघन तलाशी अभियान चलाया और कई संदिग्ध वित्तीय दस्तावेज बरामद किए। इसके साथ ही साक्ष्यों को सुरक्षित करने के लिए पुलिस ने घर में लगे सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर भी अपने कब्जे में ले लिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वहां कौन-कौन लोग आते-जाते थे। पुलिस ने रामाशंकर के पिता, भाई और फोटोग्राफी का काम करने वाले उसके एक बेहद करीबी दोस्त से भी घंटों पूछताछ की है। साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए पुलिस ने रामाशंकर के कमरे को आधिकारिक रूप से सील कर दिया है।

बैंक के पूर्व अधिकारी सुभाष श्रीवास्तव से तीखे सवाल, बरामदगी का इंतजार

इस पूरे मामले में दूसरे आरोपी सुभाष श्रीवास्तव से भी पुलिस लाइन में आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि सुभाष श्रीवास्तव के पास से अब तक किसी भी तरह की नकदी या सामान की बरामदगी नहीं हो पाई है। बुधवार को रामाशंकर की तरह सुभाष को पुलिस किसी बाहरी लोकेशन पर तस्दीक के लिए लेकर नहीं गई, बल्कि पुलिस लाइन में ही उससे कड़े सवाल किए गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुभाष द्वारा दिए गए बयानों और तथ्यों का बारीकी से सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया जा रहा है और जल्द ही इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

चढ़ावा पहुंचाने और गिनने के काम में तैनात थे दोनों आरोपी

इस सनसनीखेज मामले में दोनों आरोपियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी, जिसने उन्हें इस चोरी को अंजाम देने का मौका दिया। आरोपी सुभाष श्रीवास्तव एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी है, जिसे उसकी विशेषज्ञता के कारण राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा चढ़ावे की नकदी गिनने के काम की निगरानी (सुपरविजन) के लिए रखा गया था।

वहीं, दूसरा आरोपी रामाशंकर मिश्रा करीब 5 साल पहले राम मंदिर परिसर में तैनात हुआ था। शुरुआती दिनों में वह मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की तस्वीरें खींचकर अपनी आजीविका चलाता था, लेकिन बाद में उसकी पहुंच प्रबंधन तक हो गई और उसे दानपात्र से चढ़ावे की रकम को मुख्य काउंटिंग रूम (विश्राम कक्ष) तक पहुंचाने की बेहद संवेदनशील जिम्मेदारी सौंप दी गई। इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपी इस बड़ी चोरी को अंजाम दे रहे थे।

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