Thursday , 16 July 2026

गडकरी का बड़ा दावा: ₹100 में 450 KM चलेगी कार, आसमान में दौड़ेगी 135 सीटों वाली ‘फ्लाइंग बस’, जानिए क्या है प्लान 

 नई दिल्ली। इथेनॉल क्रांति के बाद अब भारत ने क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर ली है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश के परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र की पूरी तस्वीर बदलने वाला विजन सामने रखा है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने एलान किया कि देश में ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ को लेकर युद्धस्तर पर काम चल रहा है। सरकार का लक्ष्य इसकी मौजूदा लागत को ₹300 प्रति किलो से घटाकर महज ₹100 प्रति किलो पर लाना है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मात्र एक किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन की मदद से कार को लगभग 450 किलोमीटर तक चलाया जा सकेगा। इसके साथ ही उन्होंने देश में जल्द ही ‘फ्लाइंग बस’ (हवा में उड़ने वाली बस) लाने की महत्वाकांक्षी योजना का भी खुलासा किया है।

पानी से पैदा होगा भविष्य का ईंधन, जानिए क्यों खास है ग्रीन हाइड्रोजन

नितिन गडकरी ने ईंधन के वर्गीकरण को स्पष्ट करते हुए बताया कि कोयले से बनने वाली हाइड्रोजन को ‘ब्लैक हाइड्रोजन’, पेट्रोलियम से तैयार होने वाली को ‘ब्राउन हाइड्रोजन’ कहा जाता है, जबकि पानी से तैयार होने वाली हाइड्रोजन ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ कहलाती है। वर्तमान में बायोवेस्ट मीथेन से भी हाइड्रोजन बनाने की दिशा में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रीन हाइड्रोजन को तैयार करने के लिए इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) का उपयोग होता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन बिल्कुल शून्य रहता है। यही वजह है कि इसे दुनिया का सबसे स्वच्छ ईंधन माना जा रहा है, जो भविष्य में भारी वाहनों, जहाजों और उद्योगों की पहली पसंद बनेगा।

हवा में उड़ेगी 135 यात्रियों वाली ‘फ्लाइंग बस’, 30 सेकंड में होगी चार्ज

नितिन गडकरी के ‘फ्लाइंग बस’ वाले बयान ने हर किसी को हैरान कर दिया है। हालांकि, यह पारंपरिक हवाई जहाज की तरह पंखों वाली बस नहीं होगी, बल्कि यह मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (MRTS) के तहत एक बेहद आधुनिक एलिवेटेड केबल बस या एरियल पॉड सिस्टम होगा। यह सड़क के ट्रैफिक से पूरी तरह ऊपर, मजबूत खंभों और एलिवेटेड ट्रैक के सहारे चलेगी। बिना ड्राइवर के पूरी तरह ऑटोमैटिक चलने वाली इस बस में एक साथ 135 यात्री सफर कर सकेंगे। इस हाई-टेक बस में सेंसर बेस्ड कंट्रोल सिस्टम, वाई-फाई, एयर कंडीशनर और बस होस्टेस जैसी प्रीमियम सुविधाएं मिलेंगी। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘फ्लैश चार्जिंग तकनीक’ है, जिससे स्टेशन पर महज 30 सेकंड रुकने के दौरान यह इतनी चार्ज हो जाएगी कि 40 किलोमीटर का सफर आसानी से तय कर सके। भविष्य में इसे सोलर और ग्रीन हाइड्रोजन ग्रिड से जोड़ने की योजना है।

₹19,744 करोड़ का नेशनल मिशन, 2030 तक ग्लोबल हब बनने का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने देश को स्वच्छ ऊर्जा का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए 4 जनवरी 2023 को ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ को मंजूरी दी थी। ₹19,744 करोड़ के प्रारंभिक बजट वाले इस मिशन का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश में हर साल कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की क्षमता हासिल करना है। इसके साथ ही 125 गीगावाट की अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को भी जोड़ा जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से देश में ₹8 लाख करोड़ से अधिक का भारी-भरकम निवेश आएगा और 6 लाख से ज्यादा रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा। सबसे बड़ी राहत भारत के खजाने को मिलेगी, क्योंकि इससे जीवाश्म ईंधन (क्रूड ऑयल) के आयात में ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा की बचत होगी और सालाना 50 मिलियन मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन कम किया जा सकेगा।

पटरियों पर दौड़ेगी हाइड्रोजन ट्रेन, तीन बड़े बंदरगाह बनेंगे एनर्जी हब

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने इस मिशन के तहत उल्लेखनीय प्रगति की है और देश में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की क्षमता करीब 8,000 टन प्रति वर्ष के स्तर को छू चुकी है। देश के तीन प्रमुख बंदरगाहों—कांडला, तूतीकोरिन और पारादीप को विशाल ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही भुवनेश्वर, जोधपुर, कोच्चि और पुणे में ‘हाइड्रोजन वैली क्लस्टर’ तैयार हो रहे हैं। भारतीय रेलवे भी इस रेस में पीछे नहीं है और हरियाणा के जींद-सोनीपत मार्ग पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। वहीं, घरेलू तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए SIGHT कार्यक्रम के तहत इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण पर भारी वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।

ई20 पेट्रोल पर फैलाया जा रहा भ्रम, ग्रीन स्ट्रैटेजी से आत्मनिर्भर बनेगा भारत

वैकल्पिक ईंधनों को लेकर गडकरी ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20 पेट्रोल) से वाहनों में खराबी आने की बातें पूरी तरह निराधार हैं और इसके खिलाफ झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं। भारत की रणनीति अब इथेनॉल से आगे बढ़कर ग्रीन हाइड्रोजन पर केंद्रित हो चुकी है। सरकार का मकसद सिर्फ प्रदूषण कम करना नहीं, बल्कि खाड़ी देशों से आने वाले महंगे ईंधन पर भारत की निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना है। अगर यह राष्ट्रीय मिशन अपने तय लक्ष्यों को हासिल कर लेता है, तो आने वाले समय में भारत न सिर्फ अपनी ऊर्जा जरूरतों में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि दुनिया भर को ग्रीन फ्यूल निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश बनकर उभरेगा।

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