
नई दिल्ली। आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीतिक जमीन तैयार करने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने अपने संगठन में आमूलचूल बदलाव की कवायद तेज कर दी है। पार्टी हाईकमान ने सभी राष्ट्रीय महासचिवों और प्रदेश प्रभारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि उनसे संबद्ध सचिवों को हर महीने कम से कम 15 से 20 दिन अपने आवंटित राज्यों में जमीनी स्तर पर बिताने होंगे। अब सचिव केवल औपचारिक दौरों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे लगातार ग्राउंड जीरो पर रहकर संगठन की नब्ज टटोलेंगे और केंद्रीय नेतृत्व के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएंगे।
राहुल और प्रियंका खुद ले रहे इंटरव्यू, बांटी जा रही विशेष जिम्मेदारी पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह नई गाइडलाइन वर्तमान में कार्यरत सचिवों के साथ-साथ जल्द नियुक्त होने वाले नए चेहरों पर भी पूरी तरह लागू होगी। संगठन में नई ऊर्जा भरने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा खुद शॉर्टलिस्ट किए गए दावेदारों के साक्षात्कार ले रहे हैं। इसके साथ ही महासचिवों और प्रभारियों को यह ताकीद भी की गई है कि वे अपने सहयोगी सचिवों को राज्यों के भीतर विशिष्ट कार्य और जिम्मेदारियां सौंपें, ताकि जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय हो सके।
परफॉर्मेंस के आधार पर नपेंगे पदाधिकारी, ‘C’ कैटेगरी वालों को नोटिस ‘संगठन सृजन अभियान’ के अंतिम चरण के तहत कांग्रेस अब जिला और उससे निचले स्तर के पदाधिकारियों के कामकाज का कड़ा ऑडिट करने जा रही है। जिला, मंडल और ब्लॉक अध्यक्षों के परफॉर्मेंस की बारीक समीक्षा की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि जिला अध्यक्षों के काम के आधार पर उन्हें ‘A’, ‘B’ और ‘C’ तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। खराब प्रदर्शन करने वाले यानी ‘C’ श्रेणी में आने वाले अध्यक्षों को तत्काल नोटिस थमाए जाएंगे। इसके अलावा राज्यों में निष्क्रिय पड़े विभिन्न विभागों और प्रकोष्ठों (सेल्स) के प्रभारियों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।
बिहार, गुजरात और यूपी में मंथन तेज इस नई नीति के तहत राज्यों में तेज हलचल शुरू हो चुकी है। बिहार में मंडल और ब्लॉक अध्यक्षों का व्यापक मूल्यांकन करने का फैसला लिया गया है, जहां संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल लगातार प्रदेश नेतृत्व के साथ समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। वहीं गुजरात में नव-नियुक्त प्रभारी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला की अगुवाई में हर महीने नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने का खाका तैयार हुआ है। उत्तर प्रदेश में भी नए जिला अध्यक्षों और विभिन्न स्तरों पर समितियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया जोरों पर है, जिसके संदर्भ में वेणुगोपाल ने 4 सितंबर को वरिष्ठ नेताओं के साथ रणनीति तय की थी।
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