मुजफ्फराबाद/इस्लामाबाद। भारत के सबसे बड़े जख्मों में से एक ‘पुलवामा आतंकी हमले’ में शामिल और मोस्ट वांटेड आतंकी अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई है। मुजफ्फराबाद के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में त्वरित कार्रवाई करते हुए ‘अब्दुल्ला कमाल’ नाम के एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
पकड़ा गया आरोपी अब्दुल्ला कमाल पाकिस्तान के वाह कैंट का रहने वाला है। सीटीडी ने उसे गुप्त स्थान पर ले जाकर कड़ी पूछताछ शुरू कर दी है। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से आधुनिक हथियार भी बरामद किया गया है। अब फॉरेंसिक और जांच एजेंसियां इस बात की तफ्तीश में जुटी हैं कि आतंकी हमजा बुरहान को मारने में इसी हथियार का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।
कॉलेज के बाहर ताबड़तोड़ फायरिंग, सिर में मारी तीन गोलियां
न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) के मुताबिक, यह सनसनीखेज वारदात मुजफ्फराबाद के एआईएमएस (AIMS) कॉलेज के ठीक बाहर हुई। गुरुवार को जब आतंकी हमजा बुरहान वहां से गुजर रहा था, तभी अज्ञात हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। हमलावरों ने बेहद करीब से उसके सिर को निशाना बनाया और तीन गोलियां सीधे उसके सिर में जा धंसी। खून से लथपथ बुरहान को आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले के दौरान मौके पर दो अन्य संदिग्ध भी मौजूद थे, जो वारदात के बाद फरार होने में कामयाब रहे। सुरक्षा एजेंसियां इलाके की नाकेबंदी कर उनकी सरगर्मी से तलाश कर रही हैं। इस बीच, मुख्य आरोपी अब्दुल्ला कमाल की एक एक्सक्लूसिव तस्वीर भी सामने आई है। मारे गए आतंकी हमजा बुरहान को आज इस्लामाबाद के बर्मा टाउन स्थित फातिमा स्कूल परिसर में सुपुर्द-ए-खाक (दफनाया) किया जाएगा।
कड़े पहरे और कमांडो सुरक्षा के बीच रह रहा था भारत का यह दुश्मन
हैरानी की बात यह है कि हमजा बुरहान मुजफ्फराबाद के चीला बांदी इलाके में बेहद कड़े पहरे और भारी सुरक्षा के बीच छिपा बैठा था। उसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की तरफ से विशेष कमांडो सुरक्षा, बुलेटप्रूफ गाड़ी और बकायदा एस्कॉर्ट वाहन दिए गए थे। वह पहले खूंखार आतंकी संगठन ‘अल बद्र’ से जुड़ा था और बाद में ‘अल बराक’ के लिए ऑपरेशन्स संभालने लगा था। भारत सरकार ने उसकी खतरनाक हरकतों को देखते हुए साल 2022 में गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत उसे ‘आतंकी’ घोषित किया था। वह घाटी के बड़े आतंकी चेहरे अबू दुजाना, अबू कासिम, बुरहान वानी और जाकिर मूसा का बेहद करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता था।
वैध तरीके से गया था पाकिस्तान, फिर बन गया घाटी का काल
जांच रिकॉर्ड के अनुसार, अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था। महज 23 साल का हमजा कुछ साल पहले वैध कानूनी दस्तावेजों और वीजा के जरिए भारत से पाकिस्तान गया था। लेकिन वहां जाकर उसने रास्ता बदल लिया और प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल बद्र में शामिल हो गया।
अपनी क्रूरता के दम पर वह जल्द ही संगठन का सक्रिय कमांडर बन गया और पाकिस्तान की सरजमीं से बैठकर ही भारत के खिलाफ साजिशें रचने लगा। उस पर कश्मीर के भोले-भाले युवाओं को बरगलाने, उन्हें अल बद्र में भर्ती करने के लिए उकसाने और घाटी में आतंकी गतिविधियों के लिए टेरर फंडिंग (पैसा जुटाने) करने के गंभीर आरोप थे। साल 2020 में सीआरपीएफ जवानों पर हुए ग्रेनेड हमले की साजिश के पीछे भी इसी का हाथ था।
पुलवामा हमले में गई थी 40 जांबाज जवानों की जान
हमजा बुरहान 14 फरवरी 2019 को हुए उस काले दिन यानी पुलवामा आत्मघाती हमले की साजिश का हिस्सा था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर लेथपोरा इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार ने विस्फोटकों से भरी एक एसयूवी (SUV) कार को सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले की बस से टकरा दिया था। वह धमाका इतना भयावह था कि दो बसों के परखच्चे उड़ गए और हमारे 40 वीर जवान शहीद हो गए थे। बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी चार्जशीट में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को इसका मास्टरमाइंड बताया था।
इसके अलावा, हमजा 18 नवंबर 2020 को पुलवामा के काकापोरा में हुए एक अन्य हमले में भी शामिल था। तब आतंकियों ने सेना के एक बंकर को निशाना बनाकर ग्रेनेड फेंका था, जो चूककर सड़क पर फट गया था और उसकी चपेट में आने से 12 स्थानीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
बुरहान वानी और जाकिर मूसा का था सबसे खास गुर्गा
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, हमजा बुरहान लंबे समय से पाकिस्तान और पीओके में बैठकर भारत विरोधी नेटवर्क चला रहा था। वह कश्मीर में आतंक का पोस्टर बॉय रहे बुरहान वानी का बेहद खास था। बुरहान वानी 8 जुलाई 2016 को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के साथ एक एनकाउंटर में मारा गया था, जिसके बाद घाटी में कई महीनों तक हिंसक प्रदर्शन हुए थे। वानी की मौत के बाद जाकिर मूसा ने हिजबुल मुजाहिद्दीन की कमान संभाली थी, लेकिन वह भी 23 मई 2019 को पुलवामा के त्राल इलाके में सेना के एक बड़े ऑपरेशन में ढेर कर दिया गया था। अब मुजफ्फराबाद में हमजा बुरहान का खात्मा होना आतंकी संगठनों के लिए एक और करारा झटका माना जा रहा है।
4 महीने में पाकिस्तान के 4 बड़े आतंकियों की मौत
पाकिस्तान में पिछले 4 महीने में 4 बड़े आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। इनके पीछे अज्ञात हमलावर का हाथ बताया जा रहा है, हालांकि इनकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
1. लश्कर आतंकी- मोहम्मद कासिम गुज्जर
लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी मोहम्मद कासिम गुज्जर की फरवरी 2026 में पाकिस्तान के पेशावर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अज्ञात बंदूकधारियों ने उस पर हमला किया था। हालांकि इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई।
कासिम गुज्जर उर्फ सलमान/सुलेमान को भारत सरकार ने 2024 में UAPA के तहत घोषित आतंकवादी घोषित किया था। भारतीय एजेंसियों के अनुसार, वह कई आतंकी गतिविधियों में शामिल था और जम्मू-कश्मीर में नए आतंकी मॉड्यूल तैयार करने का काम कर रहा था।
उस पर आतंकियों को हथियार और फंडिंग पहुंचाने, सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए भर्ती करने और कई आतंकी हमलों में भूमिका निभाने के आरोप थे।

2. जैश-ए-मोहम्मद कमांडर- सलमान अजहर
अप्रैल 2026 में पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के सीनियर कमांडर सलमान अजहर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, वो एक ‘हिट-एंड-रन’ जैसी घटना का शिकार हुआ। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स इसे टारगेट किलिंग बताया गया था। इसकी भी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई।
सलमान अजहर को जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर का करीबी सहयोगी माना जाता था। जैश-ए-मोहम्मद वही आतंकी संगठन है जिसे भारत, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं।
सलमान अजहर संगठन के ऑपरेशनल नेटवर्क और भर्ती अभियान से जुड़ा हुआ था। बहावलपुर को लंबे समय से जैश का प्रमुख ठिकाना माना जाता रहा है।

3. लश्कर कमांडर- शेख यूसुफ अफरीदी
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी की अप्रैल 2026 को अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
यूसुफ अफरीदी को लश्कर-ए-तैयबा के बड़े नेटवर्क से जुड़ा माना जाता था। वह कथित तौर पर संगठन के लॉजिस्टिक्स और कम्युनिकेशन सिस्टम को संभालता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे हाफिज सईद का करीबी भी माना जाता था।

4. हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर- सज्जाद अहमद
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मई 2026 में हिजबुल मुजाहिदीन का सीनियर कमांडर सज्जाद अहमद संदिग्ध परिस्थितियों में मारा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया। हालांकि पाकिस्तान सरकार की ओर से घटना पर ज्यादा आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी।
सज्जाद अहमद मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के बारामूला इलाके का रहने वाला था। कहा जाता है कि वह 1990 के दशक के अंत में पाकिस्तान चला गया था, जहां उसने आतंकी ट्रेनिंग ली। बाद में वह हिजबुल मुजाहिदीन के लिए फंडिंग, ट्रेनिंग और नेटवर्किंग जैसे काम संभालने लगा।
वह पाकिस्तान से कश्मीर में आतंकी एक्टिविटी के कॉर्डिनेशन में एक्टिव रोल निभा रहा था। हिजबुल मुजाहिदीन लंबे समय तक घाटी में एक्टिव प्रमुख आतंकी संगठनों में शामिल रहा है।

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