Tuesday , 15 September 2026

FATF के खौफ से पाकिस्तान में खलबली: आतंकी मसूद अजहर पर 70 लाख का इनाम, रेड बुक में नाम; क्या फिर शुरू हुआ नया पाखंड?

इस्लामाबाद ब्यूरो। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ की अक्टूबर में प्रस्तावित महत्वपूर्ण प्लेनरी बैठक से ठीक पहले पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख बचाने के लिए एक नया दांव चला है। आतंकियों की पनाहगाह के तौर पर घिरे पाकिस्तान ने खूंखार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को लेकर बड़ा ऐलान किया है। पाकिस्तान की शीर्ष संघीय जांच एजेंसी (FIA) ने मोस्ट वांटेड आतंकियों की अपनी नई ‘रेड बुक’ जारी कर दी है, जिसमें मसूद अजहर के सिर पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये का नकद इनाम घोषित किया गया है।

हर पांच साल में छपने वाली रेड बुक और दिखावे की सियासत

पाकिस्तानी जांच एजेंसी एफआईए की ओर से हर पांच साल में जारी होने वाली इस आधिकारिक रेड बुक में मसूद अजहर का नाम प्रमुखता से शामिल किया गया है। हालांकि कूटनीतिक गलियारों और रक्षा विशेषज्ञों के बीच पाकिस्तान के इस कदम को महज एक बनावटी औपचारिकता और अंतरराष्ट्रीय दबाव कम करने का दिखावा माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि पेरिस स्थित एफएटीएफ की अक्टूबर प्लेनरी में सख्ती से बचने और वैश्विक संस्था की आंखों में धूल झोंकने के लिए पाकिस्तान ने ऐन मौके पर यह चाल चली है।

2021 में भी चला था चाल, तब 50 लाख का था इनाम

मसूद अजहर के मामले में पाकिस्तान पहले भी इसी तरह के मनगढ़ंत दावे करके दुनिया को गुमराह करता रहा है। साल 2021 में जब पाकिस्तान एफएटीएफ की बदनाम ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा था और मसूद अजहर पर कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घिर चुका था, तब उसने आधिकारिक तौर पर दावा किया था कि जैश सरगना देश से गायब हो चुका है और अफगानिस्तान में कहीं छिपा है। उसी दौरान एफआईए ने उस पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। अब पूरे पांच साल बाद जारी हुई अद्यतन रेड बुक में उसी पुराने ड्रामे को दोहराते हुए इनाम की रकम को 20 लाख रुपये बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया गया है।

अफगानिस्तान का बहाना और पाकिस्तान के दावों की खुली पोल

पाकिस्तान की यह दोहरी नीति खुद उसके अपने ही बयानों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ तो इस्लामाबाद लगातार वैश्विक मंचों पर यह राग अलापता रहा है कि मसूद अजहर पाकिस्तान की सरजमीं पर मौजूद ही नहीं है बल्कि वह तालिबान शासित अफगानिस्तान में पनाह लिए बैठा है। वहीं दूसरी तरफ उसकी अपनी ही जांच एजेंसी अपनी घरेलू रेड बुक में उसके नाम पर लाखों का इनाम बढ़ाकर गिरफ्तारी का स्वांग रच रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जो शख्स पाकिस्तान के दावों के मुताबिक मुल्क में है ही नहीं, उसे पकड़ने के लिए उसकी अपनी एजेंसी इनाम का ढिंढोरा क्यों पीट रही है?

ऑपरेशन सिंदूर में बहावलपुर के आतंकी अड्डे पर हुआ था एक्शन

जैश-ए-मोहम्मद और उसके आका मसूद अजहर का नाम भारत के खिलाफ रची गई कई भीषण आतंकवादी साजिशों, संसद हमले और पुलवामा जैसी बर्बर वारदातों से सीधे तौर पर जुड़ा रहा है। भारत के खिलाफ आतंकी नेटवर्क संचालित करने की कीमत भी उसे चुकानी पड़ी है। भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मुख्यालय को सीधे निशाने पर लेकर जोरदार प्रहार किया गया था। इस कार्रवाई ने पाकिस्तान के भीतर पल रहे जैश के पूरे ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया था।

असली धरपकड़ की नीयत या एफएटीएफ से बचने का नया स्टंट?

अब एफएटीएफ की बेहद अहम अक्टूबर प्लेनरी से ठीक पहले मसूद अजहर पर 70 लाख रुपये का इनाम घोषित करने की टाइमिंग ने पाकिस्तान की नीयत का पर्दाफाश कर दिया है। रक्षा विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि यह कोई आतंकी नेटवर्क को खत्म करने या मसूद अजहर को सलाखों के पीछे पहुंचाने की ईमानदार कोशिश नहीं है, बल्कि दुनिया को केवल कागजी एक्शन दिखाकर ब्लैक या ग्रे लिस्ट के संभावित खतरों से खुद को सुरक्षित निकालने का एक पुराना आजमाया हुआ पैंतरा है।

Check Also

मिशन 2027: नीली जींस-शर्ट में कैंपस पहुंचे अखिलेश के ‘दूत’, Gen Z को साधने के लिए सपा का नया सियासी दांव; 6 महीने में नौकरी का बड़ा वादा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की छात्र और युवा राजनीति में समाजवादी पार्टी ने एक नया और …