
वॉशिंगटन रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने वाले बहुचर्चित अमेरिकी विधेयक पर प्रतिनिधि सभा में बहस तेज हो गई है। विधेयक को पारित कराने की समयसीमा बेहद करीब आने के बीच अमेरिकी सांसदों ने इसमें कई अहम संशोधन पेश किए हैं। इन संशोधनों में सबसे संवेदनशील प्रस्ताव रूस के प्रमुख कारोबारी साझेदारों पर सीधा निशाना साधने का है, जिसमें भारत का नाम भी शामिल किया गया है। दूसरी तरफ, सांसदों का एक गुट ऐसा भी है जो द्विपक्षीय व्यापार और कूटनीतिक रिश्तों को बचाने के लिए टैरिफ लगाने के पूरे प्रावधान को ही समाप्त करने की मांग कर रहा है।
भारत और चीन समेत 10 देशों को सीधे दायरे में लाने की मांग डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ सांसद स्टेनी होयर द्वारा लाए गए संशोधन में रूस के शीर्ष 10 व्यापारिक साझेदार देशों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस सूची में भारत, चीन, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिज गणराज्य शामिल हैं। प्रस्ताव के तहत इन देशों से होने वाले आयात पर 100 प्रतिशत तक का भारी शुल्क लगाया जा सकता है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब संसद के निचले सदन के पास चुनाव पूर्व अवकाश पर जाने से पहले केवल चार कार्यदिवस शेष हैं।
सीनेट में पहले ही भारी बहुमत से पास हो चुका है विधेयक ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ को अमेरिकी सीनेट पहले ही 86-11 के विशाल बहुमत से मंजूरी दे चुकी है। इस कानून का मुख्य लक्ष्य रूसी ऊर्जा क्षेत्र, शीर्ष नेतृत्व और प्रतिबंधों को चकमा देकर तेल ढोने वाले ‘शैडो फ्लीट’ जहाजों पर नकेल कसना है। वॉशिंगटन का तर्क है कि रूस के कच्चे तेल की वैश्विक बिक्री से मिलने वाला राजस्व यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना को वित्तीय ताकत दे रहा है।
राष्ट्रपति को 100 फीसदी शुल्क लगाने का विशेषाधिकार सीनेट से पारित मूल प्रारूप में किसी देश का स्पष्ट नाम दर्ज करने के बजाय तेल और गैस का सबसे बड़ा आयात करने वाले शीर्ष पांच खरीदारों का उल्लेख था। इसके जरिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह अधिकार देने की व्यवस्था की गई है कि वे रूसी तेल के बड़े खरीदारों पर शत-प्रतिशत शुल्क थोप सकें। अब इस बिल को कानून बनने के लिए प्रतिनिधि सभा की अंतिम मुहर की दरकार है, जिसे आगामी मध्यावधि चुनावों से पूर्व निपटाने की जद्दोजहद चल रही है।
सांसद ग्रेगरी मीक्स का तीखा विरोध, धारा 113 हटाने की मांग दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स ने राष्ट्रपति को अतिरिक्त टैरिफ का बेलगाम अधिकार दिए जाने का कड़ा विरोध किया है। मीक्स ने संशोधन पेश कर विधेयक की धारा 113 को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की है, जो व्यापारिक साझेदार देशों पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने की शक्ति देती है। तीन अन्य सांसदों के समर्थन वाले इस प्रस्ताव में तर्क दिया गया है कि साझेदार देशों पर इस तरह का आर्थिक दबाव कूटनीतिक रूप से आत्मघाती साबित हो सकता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा छूट और यूक्रेन को 15 अरब डॉलर की मदद इसके साथ ही सांसद मीक्स ने एक अन्य संशोधन में राष्ट्रपति को यह अधिकार देने की वकालत की है कि यदि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में आवश्यक हो, तो किसी विदेशी व्यक्ति या संस्था पर लगे प्रतिबंधों में 90 दिनों की छूट दी जा सके, जिसे आगे भी बढ़ाया जा सकेगा। इसके अलावा उन्होंने यूक्रेन को अपनी रक्षा जरूरतों और सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए 15 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष ऋण उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव रखा है। प्रतिनिधि सभा की रूल्स कमेटी ने इन सभी संशोधनों को सार्वजनिक कर चर्चा शुरू कर दी है।
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