Tuesday , 15 September 2026

Vande Bharat Sleeper: वाराणसी-नई दिल्ली के बीच जल्द दौड़ेगी स्लीपर वंदे भारत, त्योहारों से पहले काशीवासियों को रेलवे का बड़ा तोहफा

वाराणसी। शिवनगरी के बाशिंदों के लिए स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस के आरामदायक सफर का इंतजार अब खत्म होने की कगार पर है। रेलवे बोर्ड ने इस सेमी-हाई स्पीड स्लीपर ट्रेन को वाराणसी जंक्शन (कैंट रेलवे स्टेशन) और देश की राजधानी नई दिल्ली के बीच पटरी पर उतारने की कवायद तेज कर दी है। विभाग की पूरी कोशिश है कि आगामी दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों से पहले ही यह ट्रेन रफ्तार भरने लगे, ताकि त्योहार के सीजन में घर आने-जाने वाले यात्रियों की राह आसान हो सके।

रूट पर मंथन जारी, त्योहारों पर मिलेगा सुहाना सफर रेलवे बोर्ड की ओर से हरी झंडी मिलने के संकेत के बाद अब इसके संचालन रूट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। ट्रेन किस तय रूट से होकर गुजरेगी, इस पर मंथन चल रहा है और जल्द ही आधिकारिक सहमति बनने के आसार हैं। त्योहारी भीड़भाड़ को देखते हुए रेलवे इसे समय से पहले शुरू करने की योजना पर काम कर रहा है, जिससे यात्रियों को लंबी वेटिंग लिस्ट से छुटकारा मिल सके।

बनारस की जगह कैंट स्टेशन से चलेगी ट्रेन, यह है मुख्य वजह रेलवे सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल रेलवे के पास स्लीपर वंदे भारत के दो रैक उपलब्ध हैं। शुरुआती योजना के तहत इनमें से एक रैक को बनारस रेलवे स्टेशन (मंडुवाडीह) से नई दिल्ली के लिए चलाने का खाका तैयार हुआ था। इसके लिए बनारस स्टेशन प्रशासन से फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी मांगी गई थी। हालांकि, वहां मेंटेनेंस (रखरखाव) की पर्याप्त तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध न होने के चलते अब इसे वाराणसी जंक्शन (कैंट स्टेशन) से संचालित करने का फैसला लिया गया है। कैंट स्टेशन पर आधुनिक मेंटेनेंस डिपो और जरूरी संसाधन पहले से मौजूद हैं। हालांकि, उत्तर रेलवे के अधिकारी अभी औपचारिक घोषणा से बच रहे हैं, लेकिन दबी जुबान से फिजिबिलिटी रिपोर्ट मांगे जाने की पुष्टि कर रहे हैं।

5 प्रमुख ट्रेनों के बाद भी मारामारी, स्लीपर वंदे भारत बनेगी तारणहार वर्तमान में बनारस और वाराणसी कैंट स्टेशन से दिल्ली के लिए काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस, शिवगंगा एक्सप्रेस, बनारस-नई दिल्ली सुपरफास्ट एक्सप्रेस और दो चेयरकार वंदे भारत के साथ-साथ हफ्ते में तीन दिन चलने वाली महामना एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें चल रही हैं। इसके बावजूद दिल्ली रूट पर यात्रियों का दबाव इतना अधिक है कि टिकट कन्फर्म मिलना बेहद मुश्किल रहता है। खासकर रविवार की शाम ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं होती। ऐसे में नई दिल्ली-वाराणसी स्लीपर वंदे भारत के शुरू होने से पूर्वांचल और बिहार तक के रेल यात्रियों को सीट की किल्लत से बड़ी राहत मिलने जा रही है।

 

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