Tuesday , 15 September 2026

सऊदी अरब की लाइफलाइन पर बड़ा हमला: ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ठप, दुनिया पर मंडराया भीषण ऊर्जा संकट

सऊदी अरब द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संभावित संकट से निपटने के लिए अरबों डॉलर की लागत से तैयार की गई रणनीतिक ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ पर बड़ा ड्रोन हमला हुआ है। फारस की खाड़ी के तनाव से बचकर लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक कच्चा तेल पहुंचाने वाला यह वैकल्पिक मार्ग अब गंभीर संकट में घिर गया है। रियाद और मदीना क्षेत्रों में स्थित प्रमुख पंपिंग स्टेशनों को निशाना बनाए जाने के बाद सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने एहतियातन पूरी पाइपलाइन को बंद करने का फैसला किया है।

पंप स्टेशनों को बनाया निशाना, मरम्मत में लगेंगे 5 से 6 हफ्ते

इराक के मैसान प्रांत से लॉन्च किए गए ड्रोनों ने सीधे पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाने के बजाय संवेदनशील पंपिंग मशीनरी पर सटीक प्रहार किया। जानकारों के अनुसार, पाइपलाइन में लीकेज को कुछ दिनों में ठीक किया जा सकता है, लेकिन जटिल पंपिंग सिस्टम की खराबी को दुरुस्त करने में कम से कम 5 से 6 सप्ताह का समय लग सकता है। लगभग 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली इस पाइपलाइन से सामान्य दिनों में 4 से 5 मिलियन बैरल तेल गुजरता था, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 4 से 5 प्रतिशत हिस्सा है। इस रुकावट से पूरा तेल प्रवाह पूरी तरह रुक गया है।

होर्मुज, बाब अल-मंदेब और पाइपलाइन: एक साथ तीन बड़े चोकपॉइंट पर खतरा

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ऐसे नाजुक मोड़ पर बंद हुई है जब क्षेत्रीय तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले ही अपनी सामान्य क्षमता से बेहद कम स्तर पर काम कर रहा है। सामान्य दिनों में होर्मुज से करीब 20 मिलियन बैरल तेल रोजाना गुजरता था। उधर लाल सागर के मुहाने पर स्थित बाब अल-मंदेब में हूती विद्रोहियों के प्रभाव के चलते आवागमन पर गहरा जोखिम बना हुआ है।

इन तीनों रास्तों को मिलाकर वैश्विक बाजार में लगभग 30 मिलियन बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति या तो रुक गई है या गंभीर खतरे में है। दुनिया भर में रोजाना करीब 100 मिलियन बैरल तेल की खपत होती है, ऐसे में कुल खपत के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से में यह व्यवधान आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर ऊर्जा संकट का रूप लेता दिख रहा है।

कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार, सऊदी की अतिरिक्त क्षमता निष्प्रभावी

हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी हैं। यानबू बंदरगाह पर मौजूद तेल का स्टॉक सीमित है और कुछ ही दिनों में खत्म होने की कगार पर है। सऊदी अरब के पास अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मौजूद होने के बावजूद सुरक्षित परिवहन मार्ग न होने के कारण यह क्षमता फिलहाल वैश्विक बाजार के किसी काम नहीं आ पा रही है। सुरक्षित लॉजिस्टिक्स के अभाव में सऊदी अरब का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

ड्रोन हमलों की रणनीति ने बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर उठाए सवाल

सऊदी अधिकारियों के अनुसार, यह हमला केवल नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि आपूर्ति को हफ्तों तक ठप रखने की सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया। हालांकि किसी भी समूह ने आधिकारिक तौर पर इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि आधुनिक ड्रोन हमलों के दौर में कोई भी रणनीतिक ढांचा पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। यदि बाब अल-मंदेब मार्ग भी पूरी तरह अवरुद्ध होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में महंगाई, ईंधन किल्लत और आर्थिक मंदी का खतरा और गहरा सकता है।

 

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