Wednesday , 23 September 2026

मऊ में बाहर से लौटे युवाओं में HIV संक्रमण के मामलों से हड़कंप: 5 महीने में 18 नए केस, बड़े शहरों से घर लौटने पर हुआ खुलासा, महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक

मऊ ब्यूरो। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में रोजी-रोटी और उच्च शिक्षा के लिए महानगरों का रुख करने वाले युवाओं के बीच ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) का तेजी से बढ़ता संक्रमण स्वास्थ्य विभाग के लिए गहरी चिंता का विषय बन गया है। जिला संयुक्त चिकित्सालय स्थित एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) सेंटर में बीते पांच महीनों के दौरान हुई चिकित्सीय जांचों में 18 युवाओं में एचआईवी संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि हुई है। इनमें से अधिकांश युवा रोजगार की तलाश में बड़े औद्योगिक शहरों में रह रहे थे और हाल ही में घर लौटे थे, जबकि तीन छात्र प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए राज्य से बाहर गए हुए थे। घर वापसी के बाद जब इनकी तबीयत बिगड़ी और चिकित्सीय परीक्षण कराए गए, तब इस गंभीर बीमारी का खुलासा हुआ।

एआरटी सेंटर में 2,661 संक्रमितों का उपचार, महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक

जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर से मिले आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में जिले में कुल 2,661 एचआईवी संक्रमित मरीजों का नियमित उपचार चल रहा है। कुल उपचाराधीन मरीजों में सबसे बड़ा अनुपात महिलाओं का है, जिनकी संख्या 1,398 है, जबकि 1,239 पुरुष और 119 किशोर इस संक्रमण से जूझ रहे हैं। मार्च 2026 से लेकर अब तक 137 नए मरीज केंद्र में पंजीकृत हुए हैं, जिनमें 96 पुरुष, 38 महिलाएं और 2 किशोर शामिल हैं। विगत वर्ष के तुलनात्मक आंकड़ों को देखें तो पंजीकृत मरीजों की कुल संख्या 2,580 थी, जिसमें अब लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है।

काउंसिलिंग में चौंकाने वाले खुलासे: टैटू और असुरक्षित जीवनशैली बनी संक्रमण की वजह

एआरटी सेंटर के नोडल प्रभारी डॉ. मुकुल मौर्या ने बताया कि आजीविका और शिक्षा के सिलसिले में गृह जनपद से दूर जाने वाले युवा अक्सर सही मार्गदर्शन और स्वास्थ्य जागरूकता के अभाव में असावधानी का शिकार हो जाते हैं। सेंटर के चीफ फार्मासिस्ट शिवेंद्र सिंह के अनुसार, संक्रमित पाए गए युवाओं की गहन काउंसिलिंग के दौरान यह तथ्य सामने आया कि महानगरों की चकाचौंध और पारिवारिक नियंत्रण के अभाव में वे असुरक्षित जीवनशैली के प्रभाव में आ गए।

काउंसिलिंग रिपोर्ट के अनुसार, पांच मामलों में असुरक्षित शारीरिक संबंध संक्रमण का प्राथमिक कारण बने, जबकि दो युवाओं में गैर-मानकीकृत और असुरक्षित सुइयों से टैटू बनवाने के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने और संक्रमण फैलने की पुष्टि हुई है। जांच दल ने स्पष्ट किया कि किसी भी संक्रमित युवक के पारिवारिक इतिहास (फैमिली हिस्ट्री) में पूर्व से एचआईवी संक्रमण का कोई मामला दर्ज नहीं था, जिससे साफ है कि संक्रमण बाहर प्रवास के दौरान ही लगा। वर्तमान में सभी मरीजों की पहचान की पूर्ण गोपनीयता बरतते हुए उनका एआरटी प्रोटोकॉल के तहत उपचार शुरू कर दिया गया है।

महानगरों से लौटे युवाओं के तीन प्रमुख मामले

केस 1: दिल्ली से लौटा श्रमिक लगातार बुखार से था बेहाल मधुबन तहसील के ग्रामीण अंचल का निवासी 24 वर्षीय युवक पिछले दो वर्षों से दिल्ली की एक औद्योगिक इकाई में कार्यरत था। करीब तीन माह पूर्व गांव लौटने के बाद वह लगातार बुखार और शारीरिक क्षीणता से ग्रस्त रहने लगा। स्थानीय स्तर पर आराम न मिलने पर जब जिला अस्पताल में परीक्षण कराया गया, तो उसकी एचआईवी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। काउंसिलिंग के दौरान युवक ने स्वीकार किया कि कार्यस्थल पर प्रवास के दौरान वह असुरक्षित जीवनशैली की चपेट में आ गया था।

केस 2: उच्च शिक्षा के लिए बाहर गए मेधावी छात्र की रिपोर्ट पॉजिटिव जिले का 24 वर्षीय एक छात्र उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्य के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान में अध्ययनरत था। अचानक उसका वजन अप्रत्याशित रूप से घटने लगा और वह बार-बार संक्रामक बीमारियों से घिरने लगा। परिजनों द्वारा कराई गई विस्तृत चिकित्सीय जांच में वह एचआईवी से संक्रमित पाया गया। छात्र ने काउंसिलिंग में माना कि सहपाठियों की अनपेक्षित संगत और आवश्यक सुरक्षा उपायों की अनभिज्ञता के कारण उससे यह चूक हुई।

केस 3: मुंबई से गांव लौटे युवक में टाइफाइड-निमोनिया के बाद पुष्टि आर्थिक विषमताओं के चलते मुंबई में निर्माण क्षेत्र में मजदूरी करने गया 26 वर्षीय युवक ढाई महीने पहले अपने गृह जनपद लौटा था। गांव आने के बाद वह लगातार टाइफाइड और गंभीर निमोनिया से पीड़ित रहने लगा। मानक एंटीबायोटिक दवाओं के बेअसर होने पर चिकित्सकों ने एचआईवी स्क्रीनिंग की अनुशंसा की। परीक्षण में संक्रमण की पुष्टि होने के उपरांत उसे तत्काल एआरटी केंद्र पर पंजीकृत कर जीवन रक्षक दवाएं प्रारंभ की गई हैं।

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