
गुरुग्राम में हुए सनसनीखेज हिट एंड रन मामले के मुख्य आरोपी कल्याण बैंसला को राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार कर लिया गया है। पीड़िता सिया की बाइक पर लगे कैमरे के फुटेज से स्पष्ट हुआ कि टक्कर के बाद चालक रुका नहीं और सिया सड़क पर काफी दूर तक घिसटती रही। इसी डिजिटल साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने मामले में हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी हैं। 1 जुलाई 2024 से देशभर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होने के बाद हिट एंड रन मामलों की कानूनी परिभाषा और दंड प्रक्रिया में क्या बदलाव आए हैं, आइए बिंदुवार समझते हैं।

लापरवाही से मौत और BNS की धारा 106
सड़क दुर्घटना में किसी की मृत्यु होने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 मुख्य रूप से लागू होती है। इसके प्रावधान दो भागों में विभाजित हैं:
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धारा 106(1) — सूचना देने और सहायता करने पर: यदि लापरवाही या तेज गति से वाहन चलाने पर किसी की जान जाती है, लेकिन चालक मौके पर रुकता है, एंबुलेंस बुलाता है या तुरंत पुलिस/मजिस्ट्रेट को सूचित करता है, तो अधिकतम 5 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
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धारा 106(2) — मौके से फरार होने पर: टक्कर मारकर मौके से भागने और पुलिस को सूचित न करने पर 10 साल तक की जेल और जुर्माने का सख्त प्रावधान किया गया था। ट्रक एवं बस चालकों के विरोध के बाद सरकार ने इसे फिलहाल अधिसूचित (Hold) नहीं किया है। इसलिए 10 साल की सजा हर मामले में स्वतः लागू नहीं होती; यह अधिसूचना और घटना की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
लापरवाह ड्राइविंग और गंभीर चोट से जुड़ी धाराएं
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BNS धारा 281: सार्वजनिक मार्ग पर उतावलेपन या लापरवाही से वाहन चलाने पर जान-माल के खतरे के तहत यह धारा लगती है। यह उन मामलों में भी लगाई जाती है जहां मृत्यु नहीं हुई हो।
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गंभीर चोट व हत्या का प्रयास: यदि घायल को गंभीर चोटें आती हैं, तो संबंधित धाराएं जुड़ती हैं। जैसा कि गुरुग्राम मामले में हुआ, यदि फुटेज से यह साबित होता है कि चालक ने जानते-बूझते घायल को घसीटा या जान से मारने की नीयत से वाहन नहीं रोका, तो मामला सीधे हत्या के प्रयास तक पहुंच जाता है।
मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की अनिवार्य जिम्मेदारियां
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धारा 134: दुर्घटना के तुरंत बाद वाहन रोकना, घायल को चिकित्सा सहायता दिलाना, अस्पताल कर्मियों को सही जानकारी देना और पुलिस को सूचित करना चालक का कानूनी कर्तव्य है।
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धारा 187: दुर्घटना के बाद आवश्यक जानकारी छिपाने या पुलिस जांच में सहयोग न करने पर इस धारा के तहत पृथक सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
कानूनी स्थिति: जमानत, जुर्माना और मुआवजा
| कानूनी पहलू | मुख्य प्रावधान व स्थिति |
| जुर्माना राशि | कानून में कोई तय राशि (जैसे 7 लाख रुपये) निर्धारित नहीं है; यह अदालत मामले की गंभीरता के आधार पर तय करती है। |
| जमानत की संभावना | धारा 106(1) में जमानत संभव है। यदि नशे में ड्राइविंग, तेज गति, जानबूझकर घसीटना या हत्या के प्रयास की धाराएं हों, तो मामला गैर-जमानती और जटिल हो जाता है। |
| पीड़ित मुआवजा (धारा 161) | हिट एंड रन में मृत्यु होने पर आश्रितों को 2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल होने पर 50 हजार रुपये तक की वैधानिक सहायता का प्रावधान है। |
दुर्घटना होने पर चालक का सही कानूनी आचरण
दुर्घटना के तत्काल बाद वाहन रोकें और स्वयं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए 112 डायल कर पुलिस को सूचना दें। यदि स्थानीय भीड़ से जान का खतरा हो, तो चालक सुरक्षित दूरी पर जाकर नजदीकी थाने में तत्काल आत्मसमर्पण कर घटना दर्ज करा सकता है। वाहन की पहचान मिटाना, नंबर प्लेट बदलना या भागना कानूनी संकट को अत्यधिक बढ़ा देता है।
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