Sunday , 13 September 2026

BRICS Summit: जिनपिंग के सामने पीएम मोदी की दो टूक, टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स को हथियार बनाना बंद करे दुनिया

वैश्विक स्तर पर गहराते भू-राजनीतिक तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच से बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। सम्मेलन के अंतिम दिन आयोजित ओपन सेशन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के रणनीतिक दुरुपयोग पर खुलकर बात रखी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में पीएम मोदी ने चेताया कि संवेदनशील तकनीक और जरूरी खनिजों को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि दुनिया भर में बढ़ रहे संघर्षों की सीधी मार आम नागरिकों के जीवन पर पड़ रही है, जिसे रोकने के लिए ब्रिक्स देशों को एकजुट होकर ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाना होगा।

ग्लोबल क्राइसिस से निपटने को साझा रणनीति जरूरी

प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के मौजूदा स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहा कि आज पूरा विश्व आपस में जुड़ा हुआ है, लिहाजा कोई भी संकट अब किसी एक सीमा या क्षेत्र तक सीमित नहीं रह जाता। उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि हालिया महामारियों, गंभीर जलवायु आपदाओं और वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने इस सच्चाई को साबित कर दिया है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स देशों को भविष्य में आने वाले ऐसे किसी भी बड़े संकट से निपटने के लिए पहले से खुद को पूरी तरह तैयार रखना होगा और जरूरत पड़ने पर तत्काल एक्शन लेने में सक्षम होना होगा।

महामारी से बचाव के लिए बनेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम

स्वास्थ्य सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ा ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि ब्रिक्स देशों के बीच संक्रामक रोगों की रोकथाम और समय रहते पहचान के लिए ‘ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ स्थापित करने पर आम सहमति बन गई है। इसके साथ ही चेतावनी तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए डेटा इंटीग्रेशन मैकेनिज्म की विस्तृत गाइडलाइंस भी फाइनल कर ली गई हैं। पीएम मोदी के अनुसार, यह ढांचा भविष्य में किसी भी संभावित महामारी या गंभीर बीमारी के खतरे को शुरुआती दौर में ही पकड़ने और त्वरित कदम उठाने में गेमचेंजर साबित होगा।

सप्लाई चेन को मजबूती और स्टार्टअप्स को नया मंच

व्यापारिक अनिश्चितताओं को दूर करने के लिए पीएम मोदी ने ‘ब्रिक्स लॉजिस्टिक सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क’ का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस पहल का मकसद सदस्य देशों के बीच आपूर्ति शृंखला को अधिक मजबूत, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है, ताकि दुनिया के किसी हिस्से में संकट आने पर भी सप्लाई लाइन बाधित न हो। इसके अलावा उन्होंने ‘ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क’ का खाका पेश करते हुए कहा कि यह नेटवर्क सभी सदस्य देशों के स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर्स को एक साथ जोड़ेगा, जिससे नए बिजनेस आइडिया, रिसर्च और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी पर साझा काम करने के नए रास्ते खुलेंगे।

भारत की अध्यक्षता के चार स्तंभ और ग्लोबल साउथ की उम्मीदें

अपने संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के मूल विजन को साझा किया। उन्होंने कहा कि भारत का फोकस मुख्य रूप से चार मजबूत स्तंभों—रेजिलिएंस (लचीलापन), इनोवेशन (नवाचार), कोऑपरेशन (सहयोग) और सस्टेनेबिलिटी (सतत विकास) पर रहा है। सदस्य देशों के सहयोग से इन प्राथमिकताओं को तेजी से आगे बढ़ाया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि आज विकासशील देशों यानी ‘ग्लोबल साउथ’ का ब्रिक्स में भरोसा अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है, इसलिए संगठन का यह नैतिक दायित्व है कि वह इन देशों की वास्तविक चुनौतियों को सुलझाने और समावेशी विकास को गति देने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम करे।

 

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