Sunday , 13 September 2026

घाटी में लश्कर के नेटवर्क पर NIA का बड़ा प्रहार: जम्मू-कश्मीर के 5 जिलों में 10 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे, सीमा पार से रची जा रही थी खौफनाक साजिश

जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के पाकिस्तान में बैठे आकाओं और उनके स्थानीय ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के बीच गठजोड़ को तोड़ने के लिए एनआईए की टीमों ने घाटी के पांच संवेदनशील जिलों में एक साथ 10 ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई उत्तरी और दक्षिणी कश्मीर के कुपवाड़ा, कुलगाम, बांदीपोरा, बारामूला और सोपोर में की गई। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य घुसपैठ करने वाले विदेशी आतंकियों को लॉजिस्टिक्स, हथियार और पनाह मुहैया कराने वाले पूरे तंत्र की कड़ियों को जोड़ना और पुख्ता कानूनी सबूत जुटाना है।

नाके पर हैंड ग्रेनेड के साथ पकड़ा गया था मददगार, वहीं से खुली परतें जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे टेरर सिंडिकेट का भंडाफोड़ 31 मार्च 2026 की देर रात सुरक्षा बलों की एक नाका चेकिंग के दौरान हुआ था। उस समय लश्कर से जुड़े एक स्थानीय ओवर ग्राउंड वर्कर को रंगे हाथों दबोचा गया था। तलाशी में उसके कब्जे से जिंदा हैंड ग्रेनेड और कारतूस बरामद हुए थे। इस गिरफ्तारी के बाद जब कड़ाई से पूछताछ हुई, तो सीमा पार बैठे पाकिस्तानी आतंकियों और घाटी के भीतर फैले उनके सपोर्ट नेटवर्क के नाम सामने आने लगे। शुरुआती जांच में कुछ पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी भी की गई, जिससे स्थानीय स्तर पर सक्रिय कई संदिग्ध मददगारों की पहचान उजागर हुई।

श्रीनगर के ज़कूरा थाने से शुरू हुआ केस, NIA ने अपने हाथ में ली कमान यह मामला शुरुआत में श्रीनगर के ज़कूरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 0024/2026 के तहत दर्ज किया गया था। साजिश के तार सीमा पार और कई जिलों में फैले होने के चलते मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार के निर्देश पर एनआईए ने इसकी जांच अपने हाथ में ली। जांच एजेंसी ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) 1967 की धारा 23, आर्म्स एक्ट की धारा 7 व 25 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 के तहत केस संख्या RC-02/2026/NIA/JMU दर्ज कर जांच का दायरा विस्तृत कर दिया।

घुसपैठियों को पनाह, रेकी और हथियारों की सप्लाई चेन की पड़ताल जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि पाकिस्तान में बैठे लश्कर के हैंडलर्स अपने स्थानीय मददगारों के जरिए भारतीय सीमा में घुसने वाले आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध करा रहे थे। ये ओजीडब्ल्यू न केवल आतंकियों को सुरक्षित स्थानों पर छिपाते थे, बल्कि संवेदनशील ठिकानों की रेकी करने, उनकी आवाजाही को सुगम बनाने और संचार माध्यम स्थापित करने में मदद कर रहे थे। एनआईए अब इन संदिग्धों के वित्तीय लेन-देन, विदेशी फंडिंग, एन्क्रिप्टेड चैट, हथियारों व गोला-बारूद के रूट तथा सप्लाई चेन के पूरे रूट मैप को खंगाल रही है।

डिजिटल साक्ष्य और अहम दस्तावेज बरामद, जल्द हो सकती हैं नई गिरफ्तारियां शनिवार को की गई इस व्यापक छापेमारी के दौरान जांच अधिकारियों ने कई संदिग्ध ठिकानों से आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य साक्ष्य जब्त किए हैं। एजेंसी इन जब्त सामग्रियों का फॉरेंसिक विश्लेषण कर पहले से मौजूद तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों से मिलान कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आतंकी नेटवर्क के सभी सक्रिय तत्वों की पहचान कर ली गई है और आने वाले दिनों में जांच के आधार पर कुछ और महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां तथा हथियारों की बरामदगी हो सकती है।

 

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