Sunday , 13 September 2026

BRICS Summit: भारत की धरती से व्लादिमीर पुतिन की यूरोप को दो टूक, बोले- ‘यूक्रेन में सेना भेजी तो रूस के खिलाफ माना जाएगा सीधा युद्ध’

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के मंच से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों और पश्चिमी सैन्य गठबंधन नाटो (NATO) को अत्यंत कठोर लहजे में चेतावनी दी है। पुतिन ने साफ लफ्जों में कहा कि यदि यूरोपीय देशों ने यूक्रेनी क्षेत्र में अपनी सेना तैनात करने की जुर्रत की, तो मॉस्को इसे अपनी संप्रभुता पर हमला और रूस के खिलाफ सीधे युद्ध की शुरुआत मानेगा। पुतिन के इस सख्त बयान ने अमेरिका, ब्रिटेन और पश्चिमी देशों के कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। रूस ने स्पष्ट कर दिया है कि यूक्रेन की जमीन पर पश्चिमी बूट्स की मौजूदगी को किसी भी सूरत में मानवीय सहायता या शांति मिशन नहीं माना जाएगा, बल्कि इसे खुली सैन्य भागीदारी माना जाएगा।

यूक्रेन में सेना की तैनाती रूस की सबसे बड़ी ‘रेड लाइन’

शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे रूसी राष्ट्रपति ने सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के बाद मीडिया और प्रतिनिधियों के सामने अपना रुख रेखांकित किया। रूसी समाचार एजेंसियों के हवाले से पुतिन ने कहा कि यूरोपीय नेतृत्व इस बात पर लगातार मंथन कर रहा है कि यूक्रेन में अपनी सैन्य टुकड़ियों को कैसे उतारा जाए। उन्होंने आगाह किया कि ऐसा कोई भी कदम सीधे तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति को न्योता देगा। मॉस्को शुरुआत से ही दोहराता रहा है कि यूक्रेन में नाटो या यूरोपीय सैनिकों की आधिकारिक मौजूदगी उसकी अंतिम ‘रेड लाइन’ है। हालांकि यूरोपीय देशों में संभावित शांति समझौते के बाद सैनिकों को भेजने पर अनौपचारिक चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन रूस की इस दो टूक चेतावनी के बाद स्थिति और संवेदनशील हो गई है।

‘यूरोप के लिए खतरा नहीं रूस, नेता अपनी जनता में न फैलाएं खौफ’

कड़े सैन्य संदेश के बीच पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस का इरादा किसी भी यूरोपीय देश पर हमला करने या उनके साथ कोई नया मोर्चा खोलने का नहीं है। उन्होंने यूरोपीय नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए जनता के बीच रूस का काल्पनिक हौव्वा खड़ा कर रहे हैं। पुतिन के मुताबिक, यूरोप पर मॉस्को की तरफ से न कभी हमले का खतरा था और न ही आज है। रूस शांति चाहता है, लेकिन अगर यूरोपीय सैनिक यूक्रेन की सीमा में दाखिल होते हैं, तो इसे सीधे तौर पर रूस से युद्ध का ऐलान मानकर निर्णायक सैन्य कार्रवाई की जाएगी।

मोदी-पुतिन वार्ता: रणनीतिक संबंधों को और धार देने पर सहमति

वैश्विक उथल-पुथल और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय मुलाकात पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी रहीं। दोनों शीर्ष नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार संतुलन, अंतरिक्ष अनुसंधान और रक्षा सहयोग सहित भारत-रूस के ऐतिहासिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर पूर्ण सहमति व्यक्त की। इस दौरान पुतिन ने ब्रिक्स को वैश्विक अर्थव्यवस्था का ऐसा नया और निष्पक्ष केंद्र बनाने की वकालत की, जो पश्चिमी नियमों और पाबंदियों के दबाव से पूरी तरह मुक्त हो।

आर्कटिक और नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर पर काम करने को तैयार मॉस्को

ब्रिक्स बिजनेस फोरम के प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारिक नेताओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने बड़े बुनियादी ढांचागत प्रोजेक्ट्स में निवेश का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रूस अपने ब्रिक्स साझेदारों के साथ कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत रणनीतिक महत्व वाले ‘आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ और ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाने की पेशकश की गई। पुतिन ने कहा कि रूस न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के सहयोग से निजी पूंजी जुटाने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर स्तर पर तकनीकी व रणनीतिक सहयोग जारी रखेगा।

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