
मुंबई ब्यूरो: महाराष्ट्र में अगले महीने से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्रि उत्सव को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राज्य भर में आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में गैर-हिंदुओं, विशेषकर मुस्लिमों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फरमान जारी किया है। संगठन ने आयोजकों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी करते हुए कार्यक्रमों में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करने को अनिवार्य बताया है। इस निर्देश के सामने आते ही राज्य की राजनीति गरमा गई है और विपक्षी दलों ने इसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला और असंवैधानिक कदम करार दिया है।
पहचान पत्र जांच और माथे पर तिलक अनिवार्य करने की गाइडलाइन
वीएचपी द्वारा तय किए गए नियमों के अनुसार, डांडिया और गरबा पंडालों में प्रवेश देने से पहले आगंतुकों के आधार कार्ड जैसे वैध पहचान पत्रों की सघन जांच की जाएगी। इसके अलावा, हिंदू परंपरा और पहचान की पुष्टि के तौर पर कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के माथे पर तिलक लगाने की व्यवस्था करने को कहा गया है। वीएचपी के प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने संगठन के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि नवरात्रि का पर्व विशुद्ध रूप से मां दुर्गा और शक्ति की आराधना का उत्सव है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जो समुदाय मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखता, उसके लोगों को इस धार्मिक उत्सव और डांडिया आयोजनों में शामिल होने की क्या आवश्यकता है।
शिवसेना (यूबीटी) का तीखा वार: मोहन भागवत के बयान की दिलाई याद
वीएचपी के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने विश्व हिंदू परिषद के रुख पर कड़ा एतराज जताया। राउत ने कहा कि वीएचपी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया भाषणों से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि भागवत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि भारत में मुस्लिमों से नफरत करने वाले सच्चे हिंदू नहीं हो सकते। राउत ने सवाल किया कि क्या वीएचपी अब संघ प्रमुख के विचारों और मार्गदर्शन से भी असहमत होने लगी है।
कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) ने उठाया संविधान और कानून-व्यवस्था का मुद्दा
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने वीएचपी के दिशा-निर्देशों को संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि भारत में त्योहार हमेशा से सामुदायिक सद्भाव और भाईचारे के प्रतीक रहे हैं। उन्हें स्वयं अक्सर सद्भावना के तहत नवरात्रि और डांडिया कार्यक्रमों में आदरपूर्वक आमंत्रित किया जाता है, ठीक उसी तरह जैसे रमजान और ईद के मौकों पर हिंदू भाइयों का स्वागत किया जाता है। वहीं, एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए पूछा कि क्या प्रदेश की सरकार वीएचपी को समानांतर व्यवस्था चलाने की अनुमति देगी। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की इस कोशिश पर क्या कदम उठा रही है।
महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग की दो टूक: त्योहार जोड़ने का माध्यम, बांटने का नहीं
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने धार्मिक रीति-रिवाजों और त्योहारों को मनाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने रेखांकित किया कि कोई भी व्यक्ति किसी आयोजन में जबरन प्रवेश नहीं करता; लोग वहीं जाते हैं जहां उन्हें सम्मान और प्रेम से आमंत्रित किया जाता है। खान ने कहा कि उत्सव समाज को एकजुट करने के लिए होते हैं, न कि दीवारों को खड़ा करने के लिए। 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस पावन पर्व से पहले उपजे इस विवाद ने राज्य में सियासी और सामाजिक पारे को पूरी तरह चढ़ा दिया है।
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