Monday , 7 September 2026

जनगणना 2027 का बिगुल: UP, पंजाब समेत चार चुनावी राज्यों में 1 दिसंबर से होगी गिनती, 16 नवंबर से खुद दर्ज कर सकेंगे डेटा, पूछे जाएंगे 40 सवाल

नई दिल्ली : देश में बहुप्रतीक्षित ‘जनगणना 2027’ की रफ्तार अब तेज होने जा रही है। लद्दाख और उच्च पर्वतीय इलाकों के बाद अब उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड के मैदानी हिस्सों में 1 दिसंबर 2026 से जनसंख्या गणना की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। यह पूरी कवायद 4 जनवरी 2027 तक चलेगी। भारत के महापंजीयक (RGI) एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी आधिकारिक राजपत्र (गजट नोटिफिकेशन) के अनुसार, जिन राज्यों में अगले वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, वहां चुनावी व्यस्तता और प्रशासनिक सुगमता को ध्यान में रखते हुए इस प्रक्रिया को पहले शुरू करने का फैसला लिया गया है।

16 नवंबर से खुलेगा ‘सेल्फ इन्यूमरेशन’ का विकल्प, 5 जनवरी से रिविजन राउंड

अधिसूचना के मुताबिक, नागरिकों की सुविधा के लिए डिजिटल स्व-गणना (Self-Enumeration) का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा। संबंधित क्षेत्रों के लोग 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक स्वयं ऑनलाइन माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद प्रगणक 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक घर-घर जाकर डेटा संकलित करेंगे। मुख्य गणना समाप्त होने के बाद, किसी भी त्रुटि या छूटे हुए नामों को जोड़ने के लिए 5 जनवरी 2027 से 9 जनवरी 2027 तक विशेष पुनरीक्षण (रिविजन राउंड) चरण संचालित किया जाएगा।

अलग-अलग क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि निर्धारित, मणिपुर में काम स्थगित

अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के गैर-बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि (Reference Date) 5 जनवरी 2027 की मध्यरात्रि 12:00 बजे होगी। वहीं, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के बर्फीले गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के उच्च पर्वतीय इलाकों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 की रात 12:00 बजे तय है। इन बर्फीले इलाकों में गणना 1 सितंबर से 30 सितंबर तक की जा रही है। इसके अलावा, देश के शेष हिस्सों के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 होगी। आरजीआई ने यह भी सूचित किया है कि मणिपुर में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए मकान-सूचीकरण (हाउस-लिस्टिंग) का कार्य फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

विधानसभा चुनावों के चलते बदला गया शेड्यूल

गोवा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मणिपुर और उत्तराखंड की मौजूदा विधानसभाओं का पांच साल का कार्यकाल मई 2027 तक समाप्त हो रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जनगणना और चुनाव—दोनों ही महाअभियानों में मुख्य रूप से शिक्षकों और राज्य के सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। यदि चुनाव और जनगणना की तिथियां आपस में टकरातीं, तो फील्ड मशीनरी पर अत्यधिक दबाव पड़ता और दोनों कार्य प्रभावित होते। इसी प्रशासनिक गतिरोध को टालने के लिए चुनावी राज्यों में यह प्रक्रिया वक्त से पहले पूरी की जा रही है। गौरतलब है कि आजादी के बाद देश की यह आठवीं जनगणना दो चरणों—पहले चरण में मकान-सूचीकरण व आवास गणना और दूसरे चरण में जनसंख्या की वास्तविक गणना—में पूरी की जा रही है।

पूछे जाएंगे 40 सवाल: आजादी के बाद पहली बार जाति का भी होगा कॉलम

इस राष्ट्रीय महासर्वेक्षण के दौरान प्रगणक प्रत्येक परिवार से कुल 40 सवाल पूछेंगे। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब नागरिकों से उनकी जाति से जुड़ी जानकारी भी ली जाएगी। नागरिक अपनी जाति के संबंध में जो भी विवरण देंगे, उसे आधिकारिक रूप से दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही, परिवार के सदस्यों की वैवाहिक स्थिति, पति या पत्नी का नाम, माता-पिता का पूरा विवरण, नागरिकता, मातृभाषा, अन्य ज्ञात भाषाओं की दक्षता, सामान्य एवं डिजिटल साक्षरता, आय और आजीविका के साधन, जन्म स्थान तथा स्थायी निवास से जुड़े विस्तृत प्रश्न शामिल होंगे। यही नहीं, स्वास्थ्य इतिहास के अंतर्गत कोविड-19 टीकाकरण (वैक्सीनेशन) का ब्यौरा भी प्रपत्र में दर्ज किया जाएगा।

 

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