Monday , 31 August 2026

ईरान पर ट्रंप प्रशासन का बड़ा वित्तीय प्रहार: हर हफ्ते लगेंगे नए प्रतिबंध, बैंक निशाने पर; भारत और चीन को भी. …

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। ईरान को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने आर्थिक शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग चालू सप्ताह में ईरान से जुड़े वित्तीय लेनदेन में शामिल एक और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैंक पर कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने साफ कर दिया है कि वाशिंगटन अब हर सप्ताह तेहरान के खिलाफ नए द्वितीयक प्रतिबंधों (सेकेंडरी सैंक्शंस) की झड़ी लगाएगा, जिसकी शुरुआत बड़े बैंकिंग संस्थानों से की जा रही है।

साझेदार देशों को अल्टीमेटम: ईरान से व्यापार रोकें या अमेरिकी बाजार से बाहर हों अमेरिका ने अपने सहयोगी और साझेदार देशों को दोटूक शब्दों में चेताया है कि वे या तो ईरान के साथ अपने व्यापारिक और वित्तीय रिश्ते खत्म करें, या फिर अमेरिकी डॉलर और वित्तीय तंत्र से बाहर होने के लिए तैयार रहें। इसी आक्रामक नीति के तहत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मिस्र के दूसरे सबसे बड़े बैंक ‘बैंके मिस्र’ की संयुक्त अरब अमीरात (UAE) स्थित शाखाओं की अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच समाप्त करने के लिए एक नए नियम का प्रस्ताव रखा है।

जी-20 बैठक से पहले ट्रेजरी सचिव की सख्त चेतावनी नॉर्थ कैरोलिना के अश्विले में आयोजित होने वाली जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों की बैठक से पहले ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने वैश्विक मंच पर कड़ा संदेश दिया है। एक साक्षात्कार में बेसेंट ने कहा कि अमेरिका वैश्विक और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समकक्षों से आमने-सामने बात करेगा। उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर बेहद कठोर वित्तीय कदम उठाए जाएंगे। बेसेंट ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन को ईरान के साथ अवैध लेनदेन में शामिल सभी वित्तीय संस्थाओं की पूरी जानकारी है और यह गतिविधियां तुरंत रुकनी चाहिए।

भारत और चीन के व्यापारिक रुख पर अमेरिका की पैनी नजर मिस्र के बैंक पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाय आंशिक पाबंदी लगाने के कदम से विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अमेरिकी प्रशासन भारत और चीन जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों के साथ सावधानीपूर्वक कूटनीति साध रहा है। हालांकि, बेसेंट जी-20 सम्मेलन के दौरान भारत और चीन के शीर्ष वित्त अधिकारियों से विशेष बैठकें करेंगे। बेसेंट ने साफ किया है कि चीन द्वारा ईरान से कच्चा तेल खरीदे जाने के मुद्दे पर सभी दंडात्मक और प्रतिबंधात्मक विकल्प खुले हैं। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य वैश्विक शक्तियों पर दबाव बनाकर तेहरान की वित्तीय जीवनरेखा को पूरी तरह काटना है।

 

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