Wednesday , 29 July 2026

प्रदर्शन दबाने के लिए लाठीचार्ज और हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, कानून हाथ में लेने वालों पर….!

नई दिल्ली: देश में विरोध प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और सख्त टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 20 जुलाई को हुए प्रोटेस्ट के दौरान जिसने भी ज्यादती की है या कानून अपने हाथों में लिया है, उसे सजा जरूर मिलनी चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि आंदोलन लोकतंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा हैं, लेकिन पुलिस की प्रतिक्रिया और प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए देश भर में एक स्पष्ट प्रोटोकॉल की सख्त जरूरत है।

स्टूडेंट प्रोटेस्ट और पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की पैनी नजर

यह पूरा मामला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा 20 जुलाई को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पुलिस की बर्बरता की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यदि इस मामले में कोई जिम्मेदारी तय नहीं की जाती है, तो इस तरह की जांच का कोई औचित्य नहीं रह जाता। अदालत का मानना है कि जब-तब निर्धारित नियमों और प्रोटोकॉल का उल्लंघन होता है, तब-तब कानून को अपना काम निष्पक्ष रूप से करना चाहिए।

सिर्फ आंदोलन दबाने के लिए लाठीचार्ज सही नहीं

बीते सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि केवल किसी आंदोलन को दबाने के मकसद से लाठीचार्ज को सही नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने 20 जुलाई के मार्च के दौरान छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग की कड़ी निंदा की। मंगलवार की कार्यवाही में कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों और पुलिसकर्मियों—दोनों को आई चोटों को लेकर समान रूप से चिंतित है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने रेखांकित किया कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस बल दोनों का ही अपने ऊपर संयम और अनुशासन रखना स्वस्थ लोकतंत्र का एक बुनियादी हिस्सा है।

देश भर के लिए तैयार होगी प्रोटेस्ट गाइडलाइन

सुनवाई के दौरान बिहार में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एके-47 (AK-47) राइफल के इस्तेमाल किए जाने का गंभीर मामला भी उठाया गया। इस पर पीठ ने संज्ञान लेते हुए कहा कि अदालत केवल एक घटना तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे देश के लिए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर विस्तृत गाइडलाइंस पर विचार करेगी। कोर्ट ने दो टूक अंदाज में कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता कि कोई आंदोलन हो और उसे कुचलने के लिए सीधे लाठीचार्ज का सहारा लिया जाए, और यह भी स्वीकार्य नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा फैलाई जाए। विरोध करना सबका अधिकार है, लेकिन हिंसा के लिए कानून में कोई जगह नहीं है।

Check Also

दिल्ली की महिलाओं को रक्षाबंधन का तोहफा: CM रेखा गुप्ता ने ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ को दी मंजूरी, हर महीने मिलेंगे ₹2,500….बस करना होगा ये काम

नई दिल्ली। दिल्ली की महिलाओं के लिए रक्षाबंधन के त्योहार से ठीक पहले एक बड़ी …