लखनऊ। “तू किसी दिन कहीं बेमौत मारा न जाए, तूने यारों को मददगार समझ रखा है…” सुल्तानपुर जिले के ज्ञानीपुर गांव निवासी 22 वर्षीय गुलफाम अहमद के साथ दोस्तों ने कुछ ऐसा ही खौफनाक धोखा किया। किराए पर अर्टिगा गाड़ी चलाकर अपने परिवार का गुजर-बसर करने वाला गुलफाम 22 मई को गोरखपुर से लखनऊ के लिए सवारी लेकर निकला था, लेकिन कभी वापस घर नहीं लौट सका। महज ₹500 की सीएनजी डलवाने के मामूली विवाद में उसके अपने ही दोस्तों ने उसकी बेरहमी से गर्दन काट दी और शव को नहर किनारे फेंक कर फरार हो गए।
दो महीने तक शव बाराबंकी के माती थाना क्षेत्र में पड़ा रहा और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। अब पुलिस ने मामले में दूसरे आरोपी को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर घटनास्थल से गुलफाम का नरकंकाल बरामद कर लिया है।
‘गाड़ी ले लो, जान बख्श दो’… गिड़गिड़ाता रहा गुलफाम, पर नहीं पसीजा दिल
पुलिस जांच में सामने आया कि 22 मई को गुलफाम देवा क्षेत्र के हुसैनमऊ गांव निवासी अपने साथियों—साहिल, समीर, तौफीक और आदिल के साथ निकला था। लखनऊ के चिनहट इलाके में जब गाड़ी में सीएनजी डलवाने की बात आई, तो इस बात को लेकर विवाद छिड़ गया कि ₹500 का भुगतान कौन करेगा।
विवाद इतना बढ़ा कि आदिल ने गाड़ी को देवा रोड की तरफ मोड़ दिया। चलती कार के अंदर मारपीट और हाथापाई होने लगी। इसके बाद आरोपियों ने कार को माती थाना क्षेत्र के नईमऊ गांव के पास नहर किनारे रोका और गुलफाम को नीचे उतारकर बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। हमले के दौरान गुलफाम हाथ-पैर जोड़कर अपनी जिंदगी की भीख मांगता रहा और कहता रहा, “गाड़ी ले लो, लेकिन मेरी जान बख्श दो।” लेकिन सिर पर खून सवार आदिल ने चाकू निकालकर गुलफाम की गर्दन रेत दी और उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी शव को झाड़ियों में फेंककर अर्टिगा कार लेकर फरार हो गए और कुछ दूरी पर गाड़ी छोड़कर गायब हो गए।
2 महीने बाद सर्विलांस से खुला राज, टी-शर्ट से हुई कंकाल की पहचान
गुलफाम के गायब होने के बाद उसके भाई इश्तियाक ने 19 जुलाई को लखनऊ के चिनहट थाने में गुमशुदगी/अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। चिनहट पुलिस के इंस्पेक्टर दिनेश चंद्र मिश्र के नेतृत्व में उप-निरीक्षक रितेश सिंह और उनकी टीम ने तफ्तीश शुरू की।
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समीर की गिरफ्तारी: जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले समीर को हिरासत में लिया, जिसकी निशानदेही पर लावारिस खड़ी अर्टिगा कार बाराबंकी से बरामद हुई, लेकिन गुलफाम का कोई अता-पता नहीं चल सका।
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साहिल का कबूलनामा: पुलिस टीम ने सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से मामले के दूसरे मुख्य आरोपी साहिल (पुत्र स्वर्गीय बबलू) को दबोच लिया। कड़ाई से पूछताछ करने पर साहिल ने हत्या का खौफनाक सच उगल दिया।
साहिल की निशानदेही पर पुलिस टीम उसे माती थाना क्षेत्र के नईमऊ नहर किनारे ले गई, जहां से गुलफाम का नरकंकाल बरामद हुआ। मौके पर पहुंचे परिजनों ने कंकाल के पास पड़ी टी-शर्ट से गुलफाम की पहचान की।
फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया कंकाल, फरार आरोपियों की तलाश तेज
पुलिस ने घटनास्थल से बरामद नरकंकाल को कब्जे में लेकर डीएनए (DNA) प्रोफाइलिंग और विधि-विज्ञान जांच (Forensics) के लिए लैब भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्याकांड में शामिल दो अन्य फरार आरोपी—आदिल और तौफीक की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है और उन्हें जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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