Saturday , 25 July 2026

लखनऊ में 69 हजार शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का जोरदार प्रदर्शन: शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का किया घेराव, पुलिस से धक्का-मुक्की के बाद कई हिरासत में

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार सुबह 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर अचानक बड़ा प्रदर्शन कर दिया। सुबह करीब 11:10 बजे प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी राज्य के बुनियादी शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के सरकारी आवास पहुंच गए और उनका घेराव शुरू कर दिया। करीब 60 से अधिक अभ्यर्थी हाथों में पोस्टर व बैनर लेकर पहुंचे थे, जिन पर “मैं अभागा पिछड़ा, दलित हूं” और “योगी की सरकार में पिछड़े-दलित कतार में” जैसे स्लोगन लिखे हुए थे।

‘योगी बाबा न्याय करो’ के लगे नारे, पुलिस से तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की

प्रदर्शन के दौरान उग्र अभ्यर्थियों ने मंत्री आवास के बाहर जमा होकर “योगी बाबा न्याय करो, हमारी मांगें पूरी करो” के गगनभेदी नारे लगाए। जैसे ही पुलिस प्रशासन को इस घेराव की भनक लगी, भारी पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया। पुलिसकर्मियों ने जब अभ्यर्थियों को हटाने का प्रयास किया तो दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ी और वहां भारी धक्का-मुक्की होने लगी।

अभ्यर्थियों ने पुलिसकर्मियों पर उनके कपड़े फाड़ने का गंभीर आरोप लगाया है। करीब 30 मिनट तक चले इस हाई-वोल्टेज हंगामे के बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई प्रदर्शनकारियों को जबरन हाथ-पैर पकड़कर उठाया, बसों में लादा और हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया।

6,800 सीटों पर नियुक्ति की मांग: ‘सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने किया धोखा’

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में हलफनामा (Affidavit) दाखिल करते समय उनके हितों की अनदेखी की है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि:

  • सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 8,270 सीटों का नया एफिडेविट पेश किया है, जिसमें 4,946 ऐसे अभ्यर्थियों के नाम शामिल कर दिए गए हैं जो पहले ही भर्ती प्रक्रिया से तीन बार बाहर हो चुके हैं।

  • मूल रूप से उनकी मांग 6,800 आरक्षित सीटों पर पिछड़े व दलित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की थी।

  • सरकार के इस नए कदम के चलते अब केवल 3,300 के आसपास पात्र अभ्यर्थियों को ही नौकरी मिल पाएगी।

अभ्यर्थियों का स्पष्ट कहना है कि आरक्षण और आरक्षण नियमों की अनदेखी कर उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है और जब तक सभी 6,800 अभ्यर्थियों को उनका हक नहीं मिल जाता, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

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