Friday , 2 October 2026

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कब बनेगी बात? वाशिंगटन से आया बड़ा अपडेट, अभी बाकी हैं कई पेंच

नई दिल्ली/वॉशिंगटन भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को लेकर चल रही बातचीत अब और खिंच सकती है। महीनों से जारी गहन विचार-विमर्श के बावजूद दोनों देशों के बीच अंतिम सहमति का इंतजार लंबा होता दिख रहा है। 1 अक्टूबर को अमेरिकी पक्ष ने स्पष्ट किया कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन किसी समझौते पर तुरंत अंतिम मुहर लगने की संभावना नहीं है। दोनों देशों के वार्ताकार टैरिफ और मार्केट एक्सेस जैसे संवेदनशील मतभेदों को सुलझाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।

मिल्वौकी में जी20 बैठक के दौरान हुई सकारात्मक चर्चा

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने जानकारी दी कि वॉशिंगटन एक समग्र द्विपक्षीय समझौते को आकार देने के लिए भारत के साथ सक्रिय रूप से जुटा हुआ है। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह मिल्वौकी में आयोजित जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ उनकी बेहद सकारात्मक और सार्थक बातचीत हुई। ग्रीर के अनुसार, दोनों पक्षों ने उन मुख्य बिंदुओं और बाधाओं की स्पष्ट पहचान कर ली है जिन पर अभी सहमति बनना बाकी है। उन्होंने कहा कि कोई फैसला रातों-रात नहीं होने जा रहा, लेकिन दोनों देश इन मतभेदों को सुलझाने के लिए पूरी लगन के साथ काम कर रहे हैं।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर रणनीतिक संवाद

व्यापारिक वार्ता के इसी दौर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की। दोनों वैश्विक नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करने और आपसी संवाद को निरंतर बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में परस्पर सहयोग की समीक्षा की और दोनों देशों के रिश्तों को नए मुकाम पर ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

पीयूष गोयल का अमेरिकी दौरा और कारोबारी दिग्गजों से संवाद

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते और संभावित अंतरिम व्यवस्था को आगे बढ़ाना है। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने अमेरिकी उद्योग जगत के प्रमुखों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) व उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्र के दिग्गजों के साथ कई दौर की बैठकें की हैं।

टैरिफ, मार्केट एक्सेस और रूसी तेल शुल्क बने मुख्य गतिरोध

दोनों आर्थिक महाशक्तियों के बीच महीनों की बातचीत के बाद भी कुछ अहम मुद्दों पर पेंच फंसा हुआ है। बातचीत में सबसे बड़ा गतिरोध बाजार पहुंच (Market Access) और आयात शुल्कों (Tariffs) को लेकर बना हुआ है। इसके अलावा, भारत ने रूसी तेल आयात से जुड़े नए अमेरिकी शुल्कों और प्रतिबंधात्मक नीतियों पर भी अपनी गंभीर चिंताएं दर्ज कराई हैं। भारत अपने घरेलू विनिर्माण, कृषि और रणनीतिक ऊर्जा हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है, जबकि अमेरिका अपने उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में आसान पहुंच की वकालत कर रहा है।

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