Thursday , 22 October 2026

वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग का बड़ा कदम: 20 राज्यों में चलेगा स्पेशल कैंपेन, घर-घर जाकर BLO भरवाएंगे फॉर्म-6

नई दिल्ली स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर उपजे विवाद और आपत्तियों के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक बड़ा सुधारात्मक फैसला लिया है। आयोग ने मतदाता सूची से छूटे हुए नागरिकों, पहली बार मतदान करने वाले युवाओं और नए वोटरों के नाम प्राथमिकता से जोड़ने के लिए देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सघन विशेष अभियान चलाने का निर्देश जारी किया है। इस संबंध में सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को विस्तृत गाइडलाइन भेजी गई है। आयोग का स्पष्ट निर्देश है कि बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मौजूदा वोटर लिस्ट का मिलान एसआईआर से पहले की सूची से करेंगे और जिन पात्र वोटरों के नाम कट गए हैं, उन्हें दोबारा शामिल करने की पहल तेज करेंगे।

BLO करेंगे पुरानी और नई वोटर लिस्ट का मिलान

आयोग के निर्देशानुसार, बूथ लेवल अधिकारियों को अपनी मौजूदा मतदाता सूची की तुलना सीधे एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले वाली मतदाता सूची से करने को कहा गया है। इस पड़ताल के जरिए ऐसे मतदाताओं की अलग सूची बनाई जाएगी जिनके नाम पहले की सूची में तो मौजूद थे, लेकिन वर्तमान सूची से हट चुके हैं। इसके बाद बीएलओ इन चिन्हित मतदाताओं के घर-घर जाकर उनकी वास्तविक स्थिति की पुष्टि करेंगे। यदि मतदाता उस पते पर निवास कर रहा है और सभी पात्रता शर्तें पूरी करता है, तो मौके पर ही उससे फॉर्म-6 भरवाकर नाम शामिल करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

एक महीने का लक्ष्य, हर हफ्ते 20 से 25 वोटरों से संपर्क

चुनाव आयोग ने इस पूरे अभियान को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं:

  • प्रत्येक बीएलओ को प्रति सप्ताह कम से कम 20 से 25 चिन्हित मतदाताओं के घर जाकर संपर्क करने का लक्ष्य दिया गया है, ताकि लगभग एक माह में यह काम पूरा हो सके।

  • बीएलओ को अपनी सूची में प्रत्येक मतदाता की अद्यतन स्थिति (वर्तमान में मौजूद, स्थानांतरित या मृत) दर्ज करनी होगी और जिनके फॉर्म-6 भरे गए हैं, उनका अलग से विवरण दिखाना होगा।

  • पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं (First-Time Voters) और छूटे हुए सभी योग्य नागरिकों के फॉर्म-6 मौके पर ही भरवाए जाएंगे।

राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा होगी सूची

प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग ने राजनीतिक दलों को भी इसमें सक्रिय रूप से जोड़ने की व्यवस्था की है। बीएलओ द्वारा तैयार की गई सत्यापन सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के साथ साझा की जाएगी। इसके बाद बीएलओ भरे हुए फॉर्म-6 और अपनी फील्ड वेरिफिकेशन रिपोर्ट संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) को सौंपेंगे। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत ईआरओ ही अंतिम निर्णय लेने वाले सक्षम प्राधिकारी होंगे। प्रक्रिया के समापन पर ईआरओ द्वारा बूथ-वार तैयार अंतिम सूची भी राजनीतिक दलों को दी जाएगी, जिससे कोई भी पात्र नागरिक वंचित न रह सके।

नाइट शेल्टर, लेबर कॉलोनी और शैक्षणिक संस्थानों में लगेंगे विशेष कैंप

वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने के लिए आयोग बूथ स्तर पर विशेष कैंप आयोजित करेगा। बेघर, श्रमिक और समाज के वंचित वर्गों को जोड़ने के लिए रैन बसेरों (Night Shelters) और लेबर कॉलोनियों में विशेष पंजीकरण शिविर लगाए जाएंगे। इसके अलावा कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘स्वीप’ (SVEEP) गतिविधियों के जरिए युवाओं को जागरूक किया जाएगा।

शीर्ष स्तर से होगी अभियान की सीधी निगरानी

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और कोई भी छूटा हुआ नागरिक कभी भी आवेदन कर सकता है। इस पूरे विशेष अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) स्तर पर की जाएगी। सभी राज्यों के सीईओ को निर्देश दिया गया है कि वे मैदानी स्तर पर अधिकारियों को सख्त दिशानिर्देश जारी करें ताकि इस अभियान का लाभ हर पात्र नागरिक तक पहुंच सके।

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