Thursday , 16 July 2026

काशी को मोदी सरकार का महा-तोहफा : अब सिर्फ 15 मिनट में पहुंचेंगे एयरपोर्ट से बाबा विश्वनाथ के दरबार, 25,000 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी

नई दिल्ली/वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में वाराणसी (काशी) के कायाकल्प के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार ने काशी को ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाने और पर्यटन को रफ्तार देने के लिए करीब 25,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले दो विशाल एलिवेटेड कॉरिडोर—गंगा और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है।

हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर बनने वाले इन हाई-टेक कॉरिडोर के तैयार होने के बाद वाराणसी की यातायात व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। सबसे बड़ी राहत यह होगी कि अब वाराणसी एयरपोर्ट से बाबा विश्वनाथ के दरबार तक का सफर महज 15 मिनट में पूरा हो सकेगा, जिसके लिए अभी 45 मिनट से एक घंटे का समय लगता है। वहीं, बीएचयू (BHU) पहुंचना भी अब सिर्फ 20 मिनट का खेल होगा।

100 की स्पीड में दौड़ेंगी गाड़ियाँ, बचेगा 1.25 करोड़ लीटर ईंधन

इस एलिवेटेड कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इस पर वाहन 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आसानी से फर्राटा भर सकेंगे। सरकार के अनुमान के मुताबिक, इन दोनों कॉरिडोर के बनने से शहर में जाम की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी, जिससे सालाना करीब 1.25 करोड़ लीटर फ्यूल (ईंधन) की बचत होगी। यही नहीं, इस बेहतरीन कनेक्टिविटी के कारण वाराणसी में व्यापार में 30 फीसदी और पर्यटन में 50 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है।

गंगा और वरुणा नदी पर बिछेगा एक्सप्रेसवे का जाल

इस महा-परियोजना के तहत दो अलग-अलग कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा:

  • पहला कॉरिडोर (गंगा नदी): राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) और वाराणसी रिंग रोड के बीच गंगा नदी पर 46 किलोमीटर लंबा सिक्स-लेन कॉरिडोर बनाया जाएगा। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर आधारित इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 14,447 करोड़ रुपये होगी।

  • दूसरा कॉरिडोर (वरुणा नदी): यह कनेक्टिविटी कॉरिडोर वरुणा नदी पर बनेगा, जिसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) कुल 10,998.32 करोड़ रुपये की लागत से तैयार करेगा। इस प्रोजेक्ट में मुख्य कैरिजवे, फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड सहित 6 और 4 लेन का एलिवेटेड ढांचा शामिल है।

इन दोनों कॉरिडोर के बन जाने से वाराणसी रिंग रोड, एयरपोर्ट, काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी स्टेशन, वाराणसी जंक्शन (कैंट), पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (मुगलसराय), रामनगर पोर्ट, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के सभी प्रमुख घाटों और पड़ोसी जिले चंदौली तक की पहुंच बेहद आसान हो जाएगी।

बिना शहर में घुसे सीधे बाबा के दरबार: बिहार सरकार ने दी 8 एकड़ जमीन

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मोदी सरकार ने एक बिल्कुल नया और अनूठा मार्ग तैयार किया है। अब रामनगर की तरफ से सीधे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक गंगा नदी पर एक विशेष पुल बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए बिहार सरकार ने रामनगर में स्थित बेतिया स्टेट की अपनी 8 एकड़ जमीन उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है।

इस 8 एकड़ जमीन पर 5,000 गाड़ियों की क्षमता वाला एक विशाल मल्टी लेवल पार्किंग लॉट बनाया जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड से आने वाले श्रद्धालु बिना वाराणसी शहर के भारी ट्रैफिक में प्रवेश किए, अपनी गाड़ियां खड़ी कर सीधे मंदिर जा सकेंगे। वाराणसी के मण्डलायुक्त एस. राज लिंगम ने बताया कि वाराणसी देश का एकमात्र ऐसा शहर है, जिसके सड़क विकास पर साल 2014 से अब तक रिकॉर्ड 59,500 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

साल 2028 तक पूरा होगा काम, डिप्टी CM ने कहा- काशी होगी और भव्य

सरकार ने इन दोनों महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इनके तैयार होने के बाद लखनऊ, प्रयागराज और जौनपुर की तरफ से आने वाले लोगों को भी शहर के जाम से बड़ी राहत मिलेगी।

इस ऐतिहासिक फैसले पर खुशी जताते हुए उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “यह काशी के लिए बहुत बड़ी सौगात है। इस प्रोजेक्ट से बाबा विश्वनाथ की नगरी और भी भव्य व दिव्य होगी। इसका लाभ काशी के साथ-साथ गाजीपुर, चंदौली और अन्य पड़ोसी जिलों को भी मिलेगा। जो काशी सपा और कांग्रेस के शासन में अपनी पहचान के संकट से जूझती थी, आज वह पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है और अब यहाँ हर साल 15 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु आ रहे हैं।”

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