कानपुर। शहर की सड़कों को अपनी बपौती समझकर ट्रैफिक जाम का सबब बनने वाले मनबढ़ ई-रिक्शा और बैटरी ऑटो चालकों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई का बिगुल फूंक दिया है। अमूमन मामूली चालान या चेतावनी देकर छोड़े जाने वाले इन चालकों पर अब सीधे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। इसकी शुरुआत घंटाघर चौराहे से हो चुकी है, जहां बीच सड़क पर ‘पंचायत’ जोड़कर बैठना चार ड्राइवरों को बेहद भारी पड़ गया। पुलिस ने न सिर्फ उनके वाहन सीज किए, बल्कि उनके खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) भी ठोक दी है।
ट्रैफिक पुलिस की लगातार नाकामी के बाद अब ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (कानून-व्यवस्था) डॉ. विपिन टाडा ने खुद कमान संभाल ली है। साफ संदेश दे दिया गया है कि सड़कों पर अराजकता फैलाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सोमवार से यह अभियान पूरे शहर में एक साथ बेहद आक्रामक रूप से शुरू होने जा रहा है, जिससे ई-रिक्शा चालकों में हड़कंप मच गया है।
पुलिस की मौजूदगी में भी ‘रंगबाजी’, कलक्टरगंज पुलिस ने सिखाया सबक
यह पूरी कार्रवाई शुक्रवार को उस वक्त हुई जब घंटाघर चौराहे पर पुलिस की नियमित वाहन चेकिंग चल रही थी। खाकी वर्दी की मौजूदगी के बाद भी कुछ मनबढ़ ई-रिक्शा और ऑटो चालकों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे बीच सड़क पर गाड़ियां तिरछी खड़ी कर सवारियां बटोरने और आपस में पंचायत करने में मशगूल थे। इससे पीछे आ रहे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलक्टरगंज थाना प्रभारी विनय तिवारी ने तुरंत एक्शन लिया और चारों वाहनों को एमवी एक्ट की धारा 207 के तहत सीज कर दिया। इसके साथ ही चारों ड्राइवरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान अनुराग मिश्रा (निवासी गोविंदनगर), मनोज वर्मा (निवासी बर्रा), महेंद्र सिंह (निवासी कल्याणपुर) और आयुष मौर्य (निवासी उन्नाव) के रूप में हुई है।
सोमवार से थानों को फ्री हैंड, जेसीपी खुद उतरेंगे जमीन पर
अब तक इस अराजकता को मूकदर्शक बनकर देख रही पुलिस सोमवार से पूरी तरह ‘हंटर’ चलाने के मूड में है। शहर के सभी थानाक्षेत्रों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों में सड़कों को ई-रिक्शा और बैटरी ऑटो के चंगुल से मुक्त कराएं। सूत्र बताते हैं कि इस बार कागजी कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि सीधे गाड़ियां डंप की जाएंगी। इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग खुद ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर डॉ. विपिन टाडा कर रहे हैं। चर्चा है कि व्यवस्था को परखने और पुलिस की मुस्तैदी जांचने के लिए जेसीपी खुद रोजाना शाम को सड़कों पर औचक निरीक्षण के लिए निकलेंगे।
जब ट्रैफिक पुलिस के ‘धुरंधर’ हुए फेल, तब उठाना पड़ा सख्त कदम
कानपुर में ई-रिक्शा की बेलगाम संख्या और उनकी गुंडई पर लगाम लगाने के लिए इससे पहले कई बड़े प्रयोग किए गए, जो बुरी तरह फ्लॉप रहे। शहर में ई-रिक्शा को रूट अलॉट करने और व्यवस्थित करने के लिए दो बार भारी तामझाम के साथ ‘क्यूआर कोड योजना’ (QR Code Scheme) शुरू की गई थी। पहली बार नगर निगम के सहयोग से और दूसरी बार पुलिस ने अपने दम पर इसे लागू किया था।
दूसरी बार के अभियान के दौरान पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने दावा किया था कि कलर-कोडिंग और क्यूआर कोड से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह सुधर जाएगी। लेकिन ट्रैफिक पुलिस के आला अफसरों के बीच आपसी तालमेल की कमी और ढुलमुल रवैए के चलते करोड़ों का यह प्लान ‘टांय-टांय फिस्स’ हो गया। यही वजह है कि अब ट्रैफिक पुलिस के भरोसे रहने के बजाय जिला पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन ने खुद कमान संभालते हुए सीधे जेल भेजने वाली सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना है।
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