
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए भयावह और दिल दहला देने वाले आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कई चौंकाने वाले और बेहद सनसनीखेज खुलासे किए हैं। एनआईए की पूछताछ और जांच में यह साफ हो गया है कि अगर समय रहते सुरक्षा बलों को भनक दे दी गई होती, तो 26 बेकसूर पर्यटकों की जान बचाई जा सकती थी। जांच में सामने आया है कि इस पूरे हमले की पटकथा सरहद पार पाकिस्तान में लिखी गई थी, लेकिन घाटी में मौजूद स्थानीय मददगारों की लापरवाही और मिलीभगत के कारण आतंकी अपने नापाक मंसूबों में कामयाब हो गए।
लश्कर और TRF का खूंखार आतंकी साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ है आरोपी नंबर-1
एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक, इस कायराना हमले का मुख्य साजिशकर्ता लश्कर-ए-तैयबा और उसके प्रॉक्सी संगठन टीआरएफ (TRF) का सबसे वांटेड आतंकी सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ है, जिसे एजेंसी ने आरोपी नंबर-1 बनाया है। साजिद जट्ट मूल रूप से पाकिस्तान के कसूर इलाके का रहने वाला है और भारत सरकार ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। एक मुठभेड़ में पैर में गोली लगने के बाद उसका एक पैर काटना पड़ा था, जिसके बाद से वह नकली टांग (प्रोस्थेटिक लिंब) के सहारे चलता है और इसी वजह से आतंकी गलियारों में उसे ‘लंगड़ा’ कोडनेम दिया गया है।
कश्मीरी बेटे ने की पिता की पहचान, 2005 में भारत आकर की थी शादी
जांच को पुख्ता करने के लिए एनआईए ने चार्जशीट में साजिद जट्ट की एक तस्वीर शामिल की है, जिसकी पहचान कश्मीर में ही रह रहे उसके सगे बेटे से कराई गई। बेटे ने पुष्टि की कि फोटो में दिख रहा शख्स कोई और नहीं बल्कि उसका पिता साजिद जट्ट ही है। जांच में पता चला कि साजिद साल 2005 में घुसपैठ कर जम्मू-कश्मीर आया था। यहां दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में रहकर उसने स्थानीय युवाओं का ब्रेनवॉश किया और ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया। इसी दौरान उसने एक स्थानीय कश्मीरी महिला शब्बीरा से निकाह किया था। बाद में वह अपनी पत्नी के साथ पाकिस्तान भाग गया, लेकिन कश्मीर में उसका बिछाया नेटवर्क आज भी एक्टिव है।
आतंकियों को झोपड़ी में पनाह दी, चाय-खाना खिलाया और ली 3 हजार रुपये की रिश्वत
एनआईए की तफ्तीश में सामने आया कि हमले से ठीक एक दिन पहले यानी 21 अप्रैल को लश्कर के तीन खूंखार आतंकी— फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी पहलगाम इलाके में घूम रहे थे। इन आतंकियों ने स्थानीय निवासी बशीर अहमद और परवेज से संपर्क किया। बशीर ने कबूल किया कि उसने हथियारों से लैस इन आतंकियों को देखा था और वह समझ गया था कि ये दहशतगर्द हैं। इसके बावजूद वह उन्हें गुपचुप तरीके से इशारे से परवेज की झोपड़ी पर ले गया। वहां आतंकियों ने खुद को थका हुआ बताया, जिसके बाद परवेज और बशीर ने उन्हें पानी, चाय और खाना परोसा। आतंकी करीब 5 घंटे तक उस झोपड़ी में छिपे रहे।
जाते-जाते अमरनाथ यात्रा और सुरक्षा बलों की खुफिया जानकारी ले गए आतंकी
झोपड़ी में रुकने के दौरान आतंकियों ने इन स्थानीय लोगों से अमरनाथ यात्रा के रूट, पहलगाम में सुरक्षा बलों की तैनाती, सेना के कैंप और उनकी मूवमेंट से जुड़ी बेहद संवेदनशील और खुफिया जानकारियां जुटाईं। रात करीब 10 बजे जब आतंकी वहां से निकले, तो अपने साथ परवेज की झोपड़ी से रोटी-सब्जी, मसाले, पतीला और करछी तक समेट कर ले गए। इसके एवज में आतंकियों ने बशीर और परवेज को 3,000 रुपये नकद दिए।
पार्क के बाहर दोबारा दिखे थे आतंकी, लेकिन डर या लालच में पुलिस को नहीं दी सूचना
जांच में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि अगले दिन यानी 22 अप्रैल को (हमले वाले दिन) परवेज और बशीर ने बैसरन पार्क के बाहर उन्हीं तीनों आतंकियों को दोबारा देखा था। दोनों उस वक्त कुछ पर्यटकों को गाइड कर रहे थे। आतंकियों को देखकर दोनों सतर्क तो हुए, लेकिन उन्होंने पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को इसकी कोई सूचना नहीं दी। इसके कुछ ही देर बाद आतंकियों ने बैसरन घाटी में निहत्थे पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं, जिसमें 26 पर्यटकों की मौत हो गई। हमले के बाद दोनों आरोपी सुरक्षा एजेंसियों के डर से छिप गए थे। एनआईए अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि यह मदद सिर्फ डर की वजह से थी या इसके पीछे कोई बड़ा स्लीपर सेल नेटवर्क काम कर रहा था।
पाकिस्तान में ऑनलाइन खरीदे गए थे मोबाइल, ‘फॉल्स फ्लैग’ नैरेटिव का भी भंडाफोड़
सुरक्षाबलों ने ‘ऑपरेशन महादेव’ के दौरान जिन तीन आतंकियों को ढेर किया था, उनके पास से दो पाकिस्तानी मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। एनआईए की टेक्निकल जांच में पता चला कि एक फोन लाहौर के कोट लखपत स्थित कायद-ए-आजम इंडस्ट्रियल एस्टेट के पते पर ऑनलाइन खरीदा गया था, जबकि दूसरा कराची से खरीदा गया था। पाकिस्तान में बैठा साजिद जट्ट इन फोन्स पर आतंकियों को रियल टाइम लोकेशन और निर्देश भेज रहा था। हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने के लिए टीआरएफ ने टेलीग्राम चैनलों के जरिए यह झूठ फैलाने की कोशिश की कि उनका चैनल हैक हो गया था और यह भारत का ‘फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन’ है, लेकिन एनआईए ने तफ्तीश कर साबित कर दिया कि वे टेलीग्राम चैनल पाकिस्तान के रावलपिंडी और खैबर पख्तूनख्वा से ही चलाए जा रहे थे।
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