Monday , 25 May 2026

दिल्ली में ब्रिक्स का शक्ति प्रदर्शन: ट्रंप की चीन यात्रा के बीच भारत में जुटेंगे रूस-ईरान समेत दिग्गज नेता, क्या निकलेगा पश्चिम एशिया संकट का समाधान?

नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति के पटल पर अगले कुछ दिन बेहद हलचल भरे रहने वाले हैं। एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के साथ चीन के तीन दिवसीय दौरे पर बीजिंग पहुंच चुके हैं, वहीं दूसरी ओर भारत की राजधानी दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों का दो दिवसीय महाकुंभ गुरुवार से शुरू हो रहा है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और सितंबर में होने वाले मुख्य शिखर सम्मेलन से पहले यह बैठक वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। इस महत्वपूर्ण मंथन में हिस्सा लेने के लिए रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची समेत कई कद्दावर नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं।

प्रधानमंत्री मोदी से मिलेंगे सदस्य देशों के प्रतिनिधि

ब्रिक्स दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक सशक्त समूह है। बैठक के पहले दिन सभी सदस्य देशों के विदेश मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आगामी शिखर सम्मेलन के एजेंडे को अंतिम रूप देना है। चूंकि भारत इस बार मेजबानी कर रहा है, इसलिए दिल्ली के इस मंच से निकलने वाले संदेश पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

पश्चिम एशिया का तनाव और ऊर्जा सुरक्षा पर मंथन

बैठक के केंद्र में सबसे बड़ा मुद्दा पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) का गहराता संकट रहने वाला है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की आशंका ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने पहले ही भारत से आग्रह किया है कि वह संघर्ष रोकने के लिए अपनी स्वतंत्र और प्रभावशाली भूमिका निभाए। विशेष रूप से ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की यह यात्रा काफी अहम है, क्योंकि अमेरिका और इजराइल के साथ तनाव बढ़ने के बाद वह पहली बार भारत आए हैं।

ट्रंप की नजरें और चीन की कूटनीतिक चाल

दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ दिल्ली में ब्रिक्स की बैठक हो रही है, तो दूसरी तरफ ट्रंप चीन में हैं। ट्रंप शुरू से ही ब्रिक्स को अमेरिकी प्रभुत्व के लिए एक चुनौती मानते रहे हैं। उन्हें लगता है कि चीन इस मंच का इस्तेमाल विकासशील देशों को अमेरिका के खिलाफ लामबंद करने के लिए कर रहा है। ट्रंप के चीन दौरे के कारण ही चीनी विदेश मंत्री वांग यी दिल्ली की बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं, उनकी जगह भारत में चीनी राजदूत शी फीहोंग बीजिंग का प्रतिनिधित्व करेंगे।

दुनिया की आधी आबादी और 40% जीडीपी का प्रतिनिधित्व

ब्रिक्स अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रहा। साल 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई के आने और 2025 में इंडोनेशिया के शामिल होने के बाद यह 11 देशों का एक विशाल ब्लॉक बन चुका है। यह समूह वैश्विक आबादी के लगभग 49.5 प्रतिशत और ग्लोबल जीडीपी के 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि, समूह के भीतर भी चुनौतियां कम नहीं हैं। पिछले महीने उप-विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान और यूएई के बीच तीखे मतभेदों के कारण सर्वसम्मति नहीं बन पाई थी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दिल्ली की इस बैठक में पश्चिम एशिया के मुद्दे पर कोई संयुक्त बयान जारी हो पाता है या नहीं।

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