Tuesday , 15 September 2026

हॉर्मुज तनाव के बीच ओमान में ईरान-खाड़ी देशों की अहम बैठक स्थगित, जहाज पर हमले के बाद बढ़ी तनातनी; सऊदी की आपत्तियों ने भी बढ़ाई मुश्किलें

मस्कट/तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनातनी और समुद्री सुरक्षा के संकट के बीच ओमान में होने वाली बहुप्रतीक्षित उच्चस्तरीय वार्ता अचानक टल गई है। ईरान और खाड़ी देशों के बीच सोमवार को ओमान के सलालाह शहर में प्रस्तावित महत्वपूर्ण बैठक को स्थगित करने का फैसला लिया गया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, कुछ क्षेत्रीय देशों के आग्रह पर यह कदम उठाया गया है, हालांकि उन देशों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है। दूसरी ओर, ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि क्षेत्रीय सहमति और व्यापक हितों को ध्यान में रखकर बैठक को टाला गया है। उन्होंने दोहराया कि ओमान क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति, स्थिरता और कूटनीतिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर बननी थी सहमति

सलालाह में आयोजित इस बैठक का मुख्य एजेंडा वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाले हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए एक साझा व्यवस्था तैयार करना था। ईरान और ओमान इस संवेदनशील समुद्री गलियारे के संचालन और नए दिशा-निर्देशों को लेकर बीते कई महीनों से द्विपक्षीय बातचीत में जुटे हुए थे। भौगोलिक रूप से जलडमरूमध्य के दूसरे छोर पर ओमान का तट स्थित है, जिससे इस मार्ग पर दोनों देशों की रणनीतिक स्थिति बेहद मजबूत है। ईरान इस प्रस्तावित व्यवस्था का मसौदा अन्य खाड़ी देशों के सामने रखकर उनका समर्थन हासिल करने की तैयारी में था।

कार्गो जहाज पर मिसाइल हमले के बाद भड़का नया तनाव

वार्ता स्थगित होने से ठीक चंद घंटे पहले हॉर्मुज जलडमरूमध्य के निकट क़ेश्म द्वीप के पास एक ईरानी मालवाहक जहाज पर भीषण हमले की खबर ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। ब्रिटेन के मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) मॉनिटर ने भी पुष्टि की कि एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल के टकराने से जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक जहाज में भीषण आग लग गई और उसे भारी नुकसान पहुंचा। अमेरिकी सेना ने इस घटना पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जहाज पर संभावित अमेरिकी कार्रवाई से जुड़े सीधे सवालों को टाल दिया।

सऊदी अरब की आपत्तियां और बहरीन का बहिष्कार

राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, वार्ता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा खाड़ी देशों की आंतरिक असहमति रही। सऊदी अरब ने ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित समझौते के प्रारूप में बुनियादी बदलावों की मांग की है। रियाद को आशंका है कि इस नई व्यवस्था का हॉर्मुज जलडमरूमध्य की संप्रभुता और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के अन्य सदस्य देशों के दीर्घकालिक आर्थिक हितों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस बैठक में केवल इराक ने सार्वजनिक रूप से शामिल होने की सहमति दी थी, जबकि बहरीन ने तेहरान के साथ राजनयिक संबंध न होने की बात कहकर बातचीत से पूरी तरह किनारा कर लिया था।

ट्रांजिट टैक्स वसूलने की फिराक में तेहरान, सहमे हैं व्यापारिक जहाज

ईरान पहले ही खुले तौर पर यह संकेत दे चुका है कि वह हॉर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों से ट्रांजिट शुल्क (टोल टैक्स) वसूलने की नई प्रणाली लागू करना चाहता है। तेहरान के प्रस्तावित प्रारूप के अनुसार, फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाला समुद्री यातायात सीधे ईरानी जलक्षेत्र से गुजरेगा, जबकि बाहर जाने वाले जहाजों का मार्ग ईरान और ओमान के संयुक्त जलक्षेत्र से निर्धारित होगा। लगातार होते हमलों और बढ़े हुए सैन्य जोखिम के कारण इस मार्ग पर तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों की आवाजाही पहले ही काफी कम हो गई है, जिसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग लागत पर पड़ रहा है।

दिल्ली में ब्रिक्स मंच पर ईरान-यूएई के बीच दिखी थी सुलह की किरण

ओमान वार्ता टलने से पहले नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सकारात्मक कूटनीतिक संकेत देखने को मिले थे। सम्मेलन से इतर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच अहम द्विपक्षीय बातचीत हुई थी। पेजेशकियन ने इस मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों ने आपसी चिंताओं को दूर कर भविष्योन्मुखी रुख अपनाने और साथ मिलकर आगे बढ़ने पर सहमति जताई है। हालांकि, दिल्ली में दिखी इस कूटनीतिक गर्माहट के बावजूद हॉर्मुज की समुद्री राजनीति और स्थानीय मतभेद फिलहाल सुलझते नजर नहीं आ रहे हैं।

 

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