Thursday , 2 July 2026

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा के अवैध साम्राज्य पर चलेगा योगी सरकार का बुलडोजर! पत्नी के नाम पर बनाई थी करोड़ों की संपत्ति

अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी करने वाले आरोपियों पर कानून का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इस महाघोटाले के मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा की मुश्किलें अब और ज्यादा बढ़ने वाली हैं। मंदिर के चढ़ावे पर हाथ साफ करने वाले लवकुश के काले साम्राज्य को नेस्तनाबूद करने के लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने अपनी कमर कस ली है। प्राधिकरण ने लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर अवैध रूप से बन रही आलीशान संपत्ति पर सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। एडीए ने इस अवैध निर्माण को लेकर सुप्रिया मिश्रा को एक कड़ा नोटिस थमाया है, जिसमें साफ चेतावनी दी गई है कि अगर एक हफ्ते के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इस अवैध आशियाने को मलबे में तब्दील कर दिया जाएगा।

नौकरी के दौरान पत्नी के नाम खरीदी करोड़ों की जमीन

इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ रही जांच एजेंसियों के हाथ कई चौंकाने वाले दस्तावेज लगे हैं। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि राम मंदिर में नौकरी करने के दौरान ही लवकुश मिश्रा ने सोहावल तहसील के मंगसी परगना इलाके में अपनी पत्नी सुप्रिया के नाम पर एक कीमती जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। 16 अक्टूबर 2025 को हुई इस रजिस्ट्री के सरकारी कागजातों में जमीन की कीमत महज 8.8 लाख रुपये दिखाई गई थी, जबकि असलियत में इसका बाजार मूल्य करीब 25 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक आंका जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगा रही हैं कि क्या इस जमीन को खरीदने के लिए राम मंदिर के चढ़ावे से चोरी की गई रकम का इस्तेमाल किया गया था।

बिना पास नक्शे के खड़ी हो रही थी इमारत, एडीए का अल्टीमेटम

चढ़ावा चोरी कांड में नाम सामने आने के बाद जब अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) की टीम ने मौके पर जाकर निर्माण स्थल का मुआयना किया, तो वहां नियमों की जमकर धज्जियां उड़ती मिलीं। बिना कोई नक्शा पास कराए और विकास प्राधिकरण के नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से निर्माण कार्य कराया जा रहा था। एडीए ने सुप्रिया मिश्रा को भेजे नोटिस में सीधे तौर पर पूछा है कि इस निर्माण के लिए कोई वैध नक्शा स्वीकृत कराया गया था या नहीं? प्राधिकरण ने मालिकाना हक और नक्शे के जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी है। अगर तय समय सीमा के भीतर मालिकाना हक के पुख्ता सबूत नहीं दिए गए, तो इस अवैध निर्माण पर योगी सरकार का पीला पंजा (बुलडोजर) चलना बिल्कुल तय माना जा रहा है।

एसआईटी खंगाल रही है कुंडली, कई और चेहरों से उठेगा पर्दा

राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर हुए इस बड़े घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद सख्त रुख अपनाए हुए हैं। इस मामले की गहराई से जांच के लिए गठित की गई विशेष जांच टीम (SIT) दिन-रात एक कर सबूत जुटा रही है। मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा समेत इस गिरोह के कई शातिर आरोपियों को पुलिस पहले ही सलाखों के पीछे भेज चुकी है। एसआईटी अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि रामलला के दरबार से चुराई गई मोटी रकम को कहां-कहां खपाया गया और इस काली कमाई से और कौन-कौन सी संपत्तियां खरीदी गईं। इसके साथ ही इस सिंडिकेट में शामिल अन्य रसूखदार चेहरों को बेनकाब करने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं।

एसआईटी का कार्यकाल 15 दिन और बढ़ा, 15 जुलाई को सौंपेगी अंतिम रिपोर्ट

इस बीच, मामले की संवेदनशीलता और जांच के दायरे को देखते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड की परतें खोलने में जुटी एसआईटी का कार्यकाल 15 दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते 13 जून को इस विशेष जांच टीम का गठन किया था। एसआईटी द्वारा अब तक की गई जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपी जा चुकी है, जिसके आधार पर अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब एसआईटी आगामी 15 जुलाई को इस पूरे मामले की अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपेगी, जिसके बाद कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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