Sunday , 26 July 2026

यूपी पंचायत चुनाव पर योगी सरकार का बड़ा दांव, बना दिया नया आयोग….जानिए कौन-कौन हैं सदस्य और क्या है इनका काम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक ऐसा बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है, जिसने राज्य की पूरी चुनावी बिसात को बदलकर रख दिया है। सरकार ने स्थानीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण की स्थिति को साफ करने के लिए एक नए ‘पिछड़ा वर्ग आयोग’ का गठन कर दिया है। सरकार का यह कदम आगामी चुनावों में ओबीसी वोटों को साधने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

पांच सदस्यीय आयोग की कमान हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज के हाथ

योगी सरकार ने इस नवगठित पिछड़ा वर्ग आयोग की जिम्मेदारी अनुभवी कंधों पर सौंपी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राम औतार सिंह को इस पांच सदस्यीय आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। आयोग में अध्यक्ष के अलावा कानून और प्रशासनिक क्षेत्र के धुरंधरों को शामिल किया गया है। इसमें दो रिटायर्ड जज और दो सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों को बतौर सदस्य जगह मिली है।

जानिए कौन-कौन हैं आयोग के सदस्य और क्या है इनका काम

इस विशेष आयोग में अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह के साथ सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) ब्रजेश कुमार और संतोष विश्वकर्मा को सदस्य बनाया गया है। वहीं, प्रशासनिक तजुर्बे का लाभ लेने के लिए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अरविंद चौरसिया और एस.पी. सिंह को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह आयोग पूरी तरह से छह महीने की अवधि के लिए काम करेगा, जो इनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी माना जाएगा। इस आयोग का मुख्य काम पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था का गहन अध्ययन करना और ओबीसी वर्ग के पिछड़ेपन की प्रकृति व उसके प्रभावों की जांच कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपना होगा।

अखिलेश यादव के ‘PDA’ फॉर्मूले की काट है सरकार का यह फैसला!

राजनीतिक गलियारों में योगी सरकार के इस फैसले को समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव के बहुचर्चित ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की जवाबी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। विपक्ष लगातार आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन चुनावों से ठीक पहले पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन करके योगी सरकार ने विपक्ष के तरकश से एक बड़ा तीर छीन लिया है। सरकार इस कदम के जरिए पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को यह कड़ा संदेश देना चाहती है कि उनके हक और आरक्षण की सुरक्षा के लिए सरकार पूरी तरह गंभीर है।

कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी, प्रशासकों के हाथ में जा सकती है कमान

इसी बीच प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक और बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने बताया कि विभाग ने सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें प्रशासकों या एक प्रशासनिक समिति की नियुक्ति के माध्यम से ग्राम प्रधानों और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग की गई है। दरअसल, वर्तमान ग्राम प्रधानों का कार्यकाल इसी महीने 26 मई को समाप्त होने वाला है। राजभर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने पंचायत चुनावों को टालने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद सरकार को यह कदम उठाना पड़ा है।

विधानसभा चुनाव के बाद ही हो सकेंगे अब पंचायत चुनाव!

पंचायती राज मंत्री की मानें तो प्रशासनिक समिति के माध्यम से न सिर्फ ग्राम प्रधानों, बल्कि ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल भी आगे बढ़ाया जा सकता है। मौजूदा कानूनी और प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए अब यह साफ नजर आ रहा है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव तय समय पर न होकर, राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के बाद ही संपन्न कराए जाएंगे। सरकार के इस फैसले के बाद अब सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी नई रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

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