Saturday , 12 September 2026

BRICS समिट से बांग्लादेश की दूरी: भारत के न्योते के बाद भी नहीं आ रहे PM तारिक रहमान, शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर अड़ा ढाका

नई दिल्ली : भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने का नाम नहीं ले रही है। नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के भारत के निमंत्रण को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने ठुकरा दिया है। भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को स्वतंत्र द्विपक्षीय यात्रा के साथ-साथ क्षेत्रीय समूह ‘बिम्स्टेक’ (BIMSTEC) के मौजूदा अध्यक्ष के नाते ब्रिक्स के विशेष आउटरीच सत्र में हिस्सा लेने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया था। हालांकि, ढाका ने दोनों ही कार्यक्रमों के लिए अपनी सहमति देने से साफ इनकार कर दिया है, जिसे दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों में आई गंभीर गिरावट के तौर पर देखा जा रहा है।

वैश्विक मंचों के अध्यक्ष शामिल, पर सूची से बाहर रहा बांग्लादेश

भारत मंडपम में आयोजित हो रहे इस ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन में दुनियाभर के प्रमुख क्षेत्रीय संगठनों के प्रमुख देश भाग ले रहे हैं। आमंत्रित संगठनों की आधिकारिक सूची में आसियान (ASEAN), अफ्रीकी संघ (African Union), खाड़ी सहयोग परिषद (GCC), कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरेबियन स्टेट्स (CELAC) और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके विपरीत, बिम्स्टेक के अध्यक्ष होने के बावजूद बांग्लादेश का नाम इस महत्वपूर्ण सूची से नदारद है।

‘ठीक से नहीं मिला न्योता’: बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री का तल्ख बयान

ढाका में बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए दावा किया कि उनके प्रधानमंत्री को समुचित तरीके से आमंत्रित नहीं किया गया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने तीखे सवाल खड़े किए और कहा कि जब बांग्लादेश सरकार को औपचारिक और सीधे तौर पर पीएम के रूप में न्योता ही नहीं भेजा गया, तो वे कैसे शामिल हो सकते हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की पहली भारत यात्रा किसी बहुपक्षीय सम्मेलन का हिस्सा बनकर नहीं हो सकती।

‘आपसी सम्मान’ की शर्त और द्विपक्षीय बातचीत पर जोर

हुमायूं कबीर ने आगे स्पष्ट किया कि बांग्लादेश बहुपक्षीय सम्मेलनों की बजाय स्वतंत्र द्विपक्षीय यात्राओं और चर्चाओं को प्राथमिकता दे रहा है। उनके मुताबिक, नई दिल्ली का दौरा तभी संभव होगा जब माहौल पूरी तरह अनुकूल हो और दोनों मुल्कों के बीच आपसी संप्रभुता व सम्मान का भाव बना रहे। राजनयिक गलियारों में इसे ढाका का कड़ा कूटनीतिक पैंतरा माना जा रहा है, जो संबंधों को सामान्य करने के लिए भारत के सामने शर्तें रख रहा है।

शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग से यात्रा जोड़ने की कोशिश

ढाका की इस बेरुखी की असली वजह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भारत में प्रवास है। बांग्लादेश की मौजूदा हुकूमत प्रधानमंत्री रहमान की भारत यात्रा को शेख हसीना के प्रत्यर्पण की अपनी लगातार उठाई जा रही मांग से जोड़ रही है। अगस्त 2024 में हुए बड़े पैमाने पर छात्र आंदोलन और तख्तापलट के बाद से ही शेख हसीना भारत में स्वनिर्वासित जीवन व्यतीत कर रही हैं। ढाका ने यह आरोप भी मढ़ा है कि पिछले महीने भारत से शेख हसीना द्वारा की गई वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की वजह से प्रधानमंत्री रहमान के प्रस्तावित भारत दौरे की तैयारियों को भारी झटका लगा है।

विदेश मंत्रालय (MEA) का रुख: भारत ने दिया था औपचारिक निमंत्रण

दूसरी तरफ, भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले पर रुख साफ करते हुए कहा था कि भारत की तरफ से बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को औपचारिक निमंत्रण भेजा जा चुका है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत अपने इस पड़ोसी मुल्क के साथ संबंधों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। दोनों देशों के राजनयिकों के बीच संपर्क जारी है और हाल ही में ढाका में भारतीय उच्चायुक्त तथा बांग्लादेश के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई बैठक को संबंधों को पटरी पर लाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना गया था, हालांकि ब्रिक्स सम्मेलन में रहमान की गैरमौजूदगी ने कूटनीतिक फासलों को फिर उजागर कर दिया है।

 

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