
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस ने सूबे के सबसे बड़े और निर्णायक वोट बैंक पर अपनी सीधी पकड़ मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए पार्टी ने एक बड़ा रणनीतिक खाका तैयार किया है। इस रणनीति के तहत कांग्रेस राज्य में हर 10 जिलों के क्लस्टर पर एक विशेष ‘वार रूम’ स्थापित करने जा रही है। पार्टी ‘सामाजिक न्याय’, ‘आरक्षण’ और ‘जितनी आबादी उतना अधिकार’ जैसे मुद्दों को हथियार बनाकर सीधे जनता की चौखट तक पहुंचेगी।
45 फीसदी ओबीसी मतदाताओं पर टिकी चुनावी जंग
प्रदेश की सियासत में अन्य वर्गों की तुलना में पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की अनुमानित हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत मानी जाती है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) जैसे प्रमुख दल इस वर्ग के इर्द-गिर्द अपने सियासी समीकरण साधने में जुटे रहते हैं। अब राज्य में लंबे समय से सियासी हाशिए पर चल रही कांग्रेस ने भी इस मुकाबले में खुद को मजबूती से पेश करने के लिए अपनी ओबीसी केंद्रित राजनीति को नई धार देना शुरू कर दिया है।
डॉ. अनिल जयहिंद के दौरों से तेज हुई संगठनात्मक हलचल
ओबीसी समुदाय के बीच कांग्रेस की पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। इसी सिलसिले में पिछले एक महीने के भीतर कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जयहिंद तीन बार राजधानी लखनऊ का दौरा कर चुके हैं। बैठकों में जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने और बूथ स्तर तक पिछड़ा वर्ग के कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करने पर मंथन किया गया है।
मंडलों और जिलों में सामाजिक न्याय सम्मेलन, फिर सड़क पर आंदोलन
पार्टी अपनी विचारधारा से पिछड़े वर्ग को जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर सम्मेलनों का खाका खींच चुकी है। योजना के मुताबिक, सबसे पहले प्रदेश के हर मंडल में सामाजिक न्याय के मुद्दे पर भव्य सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद यही अभियान जिला स्तर तक पहुंचाया जाएगा। अगले तीन महीनों में इन सम्मेलनों के जरिए जनसमर्थन जुटाने के बाद कांग्रेस पिछड़े वर्ग के हक और अधिकारों को लेकर सड़क पर उतरकर बड़े आंदोलन की तैयारी में है।
विभागीय वार रूम से संचालित होगा विशेष प्रचार अभियान
पार्टी के पिछड़ा वर्ग विभाग की देखरेख में इन विशेष वार रूमों का संचालन किया जाएगा। विभाग के अनुसार, हर 10 जिले पर स्थापित होने वाले इस वार रूम का मुख्य फोकस केवल और केवल पिछड़े वर्ग से जुड़े मुद्दों, नीतियों, स्थानीय समस्याओं और पार्टी के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना होगा। यह वार रूम डिजिटल और जमीनी दोनों स्तरों पर प्रचार सामग्री के प्रसार और चुनावी रणनीति के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा।
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