दुबई/तेहरान। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब उस मुहाने पर पहुंच गया है जहां से ‘परमाणु युद्ध’ की आशंका गहराने लगी है। शनिवार को ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका और ब्रिटेन के रणनीतिक सैन्य बेस ‘डिएगो गार्सिया’ को निशाना बनाकर दो मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर पूरी दुनिया को चौंका दिया। हिंद महासागर में स्थित इस हाई-प्रोफाइल बेस पर हमले के तुरंत बाद खाड़ी देशों में हड़कंप मच गया। इस हमले की गूंज दुबई तक सुनाई दी, जहां धमाकों की आवाजों के बीच एयर डिफेंस सिस्टम को आनन-फानन में एक्टिव करना पड़ा।
ईरान के सबसे बड़े परमाणु केंद्र ‘नतांज’ पर बड़ा हमला
ईरान की इस हिमाकत का जवाब देने में अमेरिका और इजराइल ने भी देर नहीं की। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के सबसे महत्वपूर्ण और सुरक्षित माने जाने वाले ‘नतांज न्यूक्लियर सेंटर’ पर भीषण हवाई हमला किया गया है। यह वही प्लांट है जहां ईरान बड़े पैमाने पर यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) करता है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस हमले के बाद अभी तक किसी भी प्रकार के रेडियोएक्टिव रिसाव की खबर नहीं है। तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, जिस ‘अहमदी रोशन’ नामक स्थान पर हमला हुआ, वहां स्थिति नियंत्रण में है और आबादी को कोई खतरा नहीं है।
अंडरग्राउंड सीक्रेट ठिकानों को अमेरिका ने बनाया निशाना
अमेरिकी सैन्य अधिकारी ब्रैड कूपर ने पुष्टि की है कि उनकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान के एक सीक्रेट अंडरग्राउंड ठिकाने पर भारी बमबारी की है। अमेरिका का दावा है कि इस गुप्त बेस में रखे गए मिसाइल भंडार और रडार निगरानी सिस्टम को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। अमेरिका का मानना है कि इस कार्रवाई से ईरान की युद्धक क्षमता को करारा झटका लगा है। दिलचस्प बात यह है कि इजराइली सेना (IDF) ने नतांज हमले में अपनी भूमिका से फिलहाल इनकार किया है।
रूस ने जताया कड़ा ऐतराज, ट्रंप को लेकर ईरान का सख्त रुख
ईरान के परमाणु केंद्र पर हुए इस हमले के बाद वैश्विक राजनीति में भी उबाल आ गया है। रूस ने इस कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करार दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने इसे बेहद खतरनाक कदम बताया है। दूसरी ओर, ईरान के अधिकारियों ने साफ किया है कि वे डोनाल्ड ट्रंप की बातों पर भरोसा नहीं करते। ईरान का कहना है कि एक तरफ ट्रंप शांति की बात करते हैं और दूसरी तरफ अमेरिका के हमले कम नहीं हो रहे हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह ट्रंप को कड़ा सबक सिखाने के लिए तैयार है।
क्या खाड़ी में छिड़ने वाला है परमाणु युद्ध?
नतांज प्लांट का बड़ा हिस्सा जमीन के काफी नीचे बना है ताकि उसे हवाई हमलों से बचाया जा सके, लेकिन हालिया हमलों ने इसकी सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 2 मार्च के बाद यह दूसरा बड़ा हमला है। जिस तरह से ईरान अब सीधे अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बना रहा है, उससे साफ है कि ईरान अब ‘आर-पार’ के मूड में है। खाड़ी के इस तनाव ने वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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