कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी की ‘डबल सेंचुरी’ (206 सीटें) ने राज्य में 15 साल पुराने ममता राज का अंत कर दिया है। ऐतिहासिक जीत के बाद अब दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है— “बंगाल की कमान किसके हाथ?” गृह मंत्री अमित शाह के उस वादे के बाद कि मुख्यमंत्री कोई ‘बंगाली’ ही होगा, पार्टी के भीतर चेहरों को लेकर मंथन तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर मिली इस बड़ी जीत के बाद अब बारी है एक ऐसे नेतृत्व को चुनने की, जो बंगाल की संस्कृति और राजनीति दोनों को बखूबी संभाल सके।
शुभेंदु अधिकारी: ‘जायंट किलर’ की दावेदारी सबसे मजबूत
मुख्यमंत्री पद की रेस में शुभेंदु अधिकारी का पलड़ा सबसे भारी नजर आ रहा है। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं:
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लगातार दूसरी बार ममता को दी मात: शुभेंदु ने 2021 में नंदीग्राम और अब 2026 में भवानीपुर जैसे टीएमसी के सबसे मजबूत गढ़ में ममता बनर्जी को हराकर खुद को ‘जायंट किलर’ साबित किया है।
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मेदिनीपुर का चमत्कार: शुभेंदु के प्रभाव वाले मेदिनीपुर क्षेत्र की सभी 16 सीटों पर बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया है।
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RSS से पुराना रिश्ता: 22 साल टीएमसी में रहने के बावजूद शुभेंदु का शुरुआती जीवन संघ की शाखाओं में बीता है, जो उन्हें पार्टी और संगठन दोनों की पसंद बनाता है।
दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य: संगठन के दो स्तंभ
अगर पार्टी अनुभवी और संगठन पर पकड़ रखने वाले नेता को चुनती है, तो दो नाम प्रमुखता से उभरते हैं:
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दिलीप घोष: बंगाल में बीजेपी का जनाधार शून्य से शिखर तक ले जाने का श्रेय दिलीप घोष को जाता है। 2015 से 2021 तक अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने गांव-गांव में पार्टी को खड़ा किया। उनकी ‘कट्टर’ छवि कार्यकर्ताओं के बीच काफी लोकप्रिय है।
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समिक भट्टाचार्य: वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य शिक्षित मध्यम वर्ग और बंगाली भद्रलोक (Elite Class) के बीच काफी पसंद किए जाते हैं। आरएसएस से गहरे जुड़ाव और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की उनकी क्षमता उन्हें रेस में बनाए हुए है।
क्या बंगाल को मिलेगी महिला मुख्यमंत्री? अग्निमित्रा और रूपा भी रेस में
बीजेपी ‘आधी आबादी’ को साधने के लिए किसी महिला चेहरे पर भी दांव लगा सकती है। इस लिस्ट में दो बड़े नाम हैं:
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अग्निमित्रा पॉल: पेशे से फैशन डिजाइनर और बीजेपी की तेजतर्रार उपाध्यक्ष अग्निमित्रा पॉल ने अपनी सक्रियता से पार्टी में तेजी से जगह बनाई है। उनकी छवि एक मॉडर्न और मुखर महिला नेता की है।
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रूपा गांगुली: ‘महाभारत’ की द्रौपदी के रूप में घर-घर में मशहूर रूपा गांगुली राज्यसभा सदस्य रह चुकी हैं। उनकी लोकप्रियता और बंगाली अस्मिता के साथ उनका जुड़ाव पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
टीएमसी 100 के नीचे, बीजेपी की प्रचंड लहर
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बंगाल की 293 सीटों में से बीजेपी ने 206 सीटों पर कब्जा किया है। वहीं ममता बनर्जी की टीएमसी पहली बार दहाई के आंकड़े (81 सीटें) के करीब सिमट गई है। कांग्रेस और अन्य दलों का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा है। अब सबकी नजरें बीजेपी आलाकमान के फैसले पर टिकी हैं कि 9 मई को शपथ ग्रहण के मंच पर कौन मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा।
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