Friday , 24 July 2026

संसद में NEET और लाठीचार्ज पर घमासान: क्या है राज्यसभा का ‘नियम 267’, जिसके तहत चर्चा कराने की मांग पर अड़ा है विपक्ष?

नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और बहुचर्चित NEET (राष्ट्रीय पात्रता सह-प्रवेश परीक्षा) पेपर लीक का मुद्दा संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में बुरी तरह गरमाया हुआ है। हालांकि केंद्र सरकार ने दोनों सदनों में स्पष्ट किया है कि वह इन विषयों पर चर्चा कराने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष अब भी सदन में हंगामा कर रहा है। राज्यसभा में विपक्षी दल नियम 267 के तहत तत्काल अन्य सभी कामकाज रोककर NEET और लाठीचार्ज पर चर्चा कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है यह ‘नियम 267’ और विपक्ष इसको लेकर इतना आक्रामक क्यों है।

संसद में क्यों मचा है हंगामा?

राज्यसभा में दोपहर 2 बजे नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पुरजोर तरीके से यह मांग रखी कि विपक्ष नियम 267 के तहत NEET परीक्षा और छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन पर तुरंत चर्चा चाहता है। खड़गे ने कहा कि निष्पक्ष चर्चा के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जरूरी है। हंगामे के चलते उपसभापति हरिवंश ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। बाद में दोपहर 3 बजे कार्यवाही शुरू होने पर DMK सांसद तिरुचि शिवा ने भी यही मुद्दा दोहराया।

उपसभापति और सरकार का पक्ष

विपक्ष के भारी हंगामे पर उपसभापति ने नियम की बारीकियां समझाते हुए कहा कि नियम 267 के तहत चर्चा का प्रावधान केवल ‘बेहद दुर्लभ’ (Rarest of Rare) मामलों में ही लागू किया जा सकता है। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार NEET के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए समय, अवधि और नियम सभी दलों से बातचीत के बाद तय किए जाएंगे। इसके जवाब में खड़गे ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि यह नियम दुर्लभ मामलों के लिए है, तो आज देश में छात्रों, महिलाओं और बच्चों को सड़कों पर पीटा जाना एक दुर्लभ और अत्यंत गंभीर मामला ही है। इसके बाद सदन को गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

आखिर क्या है ‘नियम 267’?

‘नियम 267’ राज्यसभा के कार्य-प्रक्रिया और संचालन नियमों का एक विशेष प्रावधान है। इसके तहत राज्यसभा के सभापति की पूर्व अनुमति से सदन के किसी पूर्व-निर्धारित नियम को अस्थायी रूप से निलंबित किया जा सकता है, ताकि उस दिन की तय कार्यसूची को रोककर किसी अति-महत्वपूर्ण और जनहित के विषय पर तुरंत विचार-विमर्श किया जा सके।

इस नियम के तहत कार्यसूची से बाहर जाकर चर्चा कराने के लिए ठोस और उचित कारण बताना अनिवार्य होता है।

नियम 267 पर क्यों अड़ा है विपक्ष?

सरकार भले ही NEET पर चर्चा की बात कह रही है, लेकिन विपक्ष को आशंका है कि सरकार किसी अन्य सामान्य संसदीय प्रक्रिया का सहारा लेकर इस संवेदनशील मुद्दे को हल्का करना चाहती है। विपक्ष का तर्क है कि पहले पेपर लीक और लाठीचार्ज जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा पूरी होनी चाहिए, उसके बाद ही संसद का अन्य कोई नियमित या सरकारी कामकाज आगे बढ़ना चाहिए।

वर्ष 2000 में बदला गया था यह नियम

साल 2000 से पहले विपक्ष अक्सर नियम 267 का हवाला देकर पूर्व-निर्धारित कार्यों को रुकवा देता था और किसी भी तत्काल सार्वजनिक महत्व के मुद्दे पर बहस शुरू करा देता था। बाद में वर्ष 2000 में इस नियम में बड़ा संशोधन करके इसका दायरा काफी सीमित कर दिया गया। नए संशोधन के अनुसार, अब नियम 267 का उपयोग केवल उसी विषय से संबंधित नियमों को निलंबित करने के लिए हो सकता है, जो उस दिन की कार्यसूची (List of Business) में पहले से शामिल हो। किसी बिल्कुल नए या असूचीबद्ध विषय के लिए इसका इस्तेमाल सीधे तौर पर नहीं किया जा सकता।

क्या पहले कभी लागू हुआ है नियम 267?

संसदीय इतिहास पर नजर डालें तो इस नियम के तहत आखिरी बार चर्चा की अनुमति नवंबर 2016 में मिली थी। उस समय तात्कालिक उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने देश में हुई ‘नोटबंदी’ के बेहद संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए नियम 267 के तहत सदन का सूचीबद्ध कार्य रोक दिया था। हालांकि, इसके बाद 2017 से 2022 के दौरान तत्कालीन सभापति एम. वेंकैया नायडू के पूरे कार्यकाल में नियम 267 के तहत एक भी नोटिस स्वीकार नहीं किया गया। वर्तमान सभापति जगदीप धनखड़ के कार्यकाल में भी विपक्ष द्वारा दिए गए कई नोटिस खारिज किए जा चुके हैं।

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