वॉशिंगटन/नई दिल्ली: दुनिया के सामने आने वाले कुछ महीने जलवायु परिवर्तन के लिहाज से बेहद भयावह साबित हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी प्राकृतिक आपदा की चेतावनी जारी की है, जो 1877-78 के उस विनाशकारी दौर की याद दिला सकती है जिसने दुनिया की 3 फीसदी आबादी को खत्म कर दिया था। ताजा जलवायु मॉडलों के अनुसार, साल 2027 में एक ‘सुपर अल नीनो’ दस्तक दे सकता है, जो वैश्विक स्तर पर भीषण गर्मी, सूखे और खाद्यान्न संकट का कारण बनेगा।
क्या है अल नीनो और क्यों डरे हुए हैं वैज्ञानिक?
अल नीनो (El Niño) एक समुद्री घटना है, जो प्रशांत महासागर के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने के कारण होती है। जब समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया के मौसम चक्र पर पड़ता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान में समुद्र की सतह का तापमान जिस तेजी से बढ़ रहा है, वह एक ‘मेगा अल नीनो’ के बनने का पुख्ता संकेत है।
150 साल पुराना वो काला इतिहास: जब खत्म हुई थी 3% आबादी
इतिहास के पन्ने पलटें तो 1877-78 का अल नीनो मानव जाति के लिए किसी काल से कम नहीं था। उस दौरान भीषण गर्मी और लंबे सूखे के कारण फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं, जिससे भयानक अकाल पड़ा। उस समय दुनिया की आबादी आज के मुकाबले काफी कम थी, फिर भी करोड़ों लोग भूख और प्यास से मर गए थे। विशेषज्ञों को डर है कि 2027 का अल नीनो उस रिकॉर्ड को भी तोड़ सकता है, क्योंकि इस बार इसे ग्लोबल वार्मिंग का भी साथ मिल रहा है।
भारत पर सीधा प्रहार: मानसून की विफलता और भीषण लू
भारत के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। भारतीय कृषि और जल संसाधन पूरी तरह मानसून पर निर्भर हैं, और अल नीनो का सबसे पहला शिकार मानसून ही होता है।
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कम बारिश: अल नीनो के प्रभाव से मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाएंगी, जिससे देश के कई हिस्सों में सामान्य से बहुत कम बारिश होगी।
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भीषण लू (Heatwave): उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में लू का प्रकोप इतना ज्यादा होगा कि तापमान पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
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महंगाई और अकाल: फसलों की पैदावार गिरने से अनाज और सब्जियों के दाम आसमान छुएंगे, जिससे अकाल जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
दुनियाभर में दिखेगा असर: कहीं सूखा, कहीं बाढ़
अल नीनो का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा। जहां एक ओर ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और अमेजन के जंगलों में भीषण आग और सूखे का तांडव दिखेगा, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के कुछ दक्षिणी हिस्सों में अप्रत्याशित भारी बारिश और विनाशकारी बाढ़ आने की आशंका है। कुल मिलाकर, 2027 तक वैश्विक तापमान एक नए खतरनाक स्तर पर पहुँच सकता है।
एक्सपर्ट की राय: अभी से तैयारी है जरूरी
वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि इसे अभी से पक्के तौर पर ‘महा-विनाशकारी’ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन संकेत इतने मजबूत हैं कि इन्हें नजरअंदाज करना आत्मघाती होगा। विशेषज्ञों ने सरकारों को सलाह दी है कि वे अभी से बेहतर जल प्रबंधन (Water Management), सिंचाई की आधुनिक व्यवस्था और ‘हीट एक्शन प्लान’ पर काम शुरू कर दें, ताकि आने वाली इस महा-आपदा के प्रभाव को कम किया जा सके।
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